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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र परिषद के खिलाफ बवाल, लाठीचार्ज, तोड़फोड़ और पथराव

Wed, 16 Oct 2019 01:16 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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allahabad university - फोटो : प्रयागराज
 इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र परिषद के खिलाफ मंगलवार को जमकर बवाल हुआ। परिषद के चुनाव के विरोध में छात्रसंघ भवन के सामने धरने पर बैठे छात्रों की पुलिस से झड़प हो गई। छात्रों की भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने पथराव कर दिया। जवाब ने पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। भीड़ वाहनों में तोड़फोड़ करते हुए विश्वविद्यालय परिसर से बाहर की ओर भागी। इस दौरान तीन दर्जन से अधिक वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए। घटना में इविवि के एक कर्मचारी समेत दो पुलिस कर्मी और कई छात्र भी घायल हुए हैं। मामले में छात्रसंघ के निवर्तमान उपाध्यक्ष, महामंत्री समेत 16 छात्रों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

छात्रों का भारी हुजूम मंगलवार पूर्वान्ह 11 बजे इविवि लाइब्रेरी गेट पर पहुंचा। वहां प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन छात्रों की भीड़ इतनी अधिक थी कि उन्हें रोका नहीं जा सका। जुलूस की शक्ल में छात्र लाल पद्मधर भवन पहुंचे और धरने पर बैठ गए। वहां नामांकन पत्रों का वितरण होना था, लेकिन धरने के कारण काम रोक दिया गया। लगभग एक बजे पुलिस ने छात्रों को वहां से हटने के लिए कहा। छात्र नहीं माने तो पुलिस ने बल प्रयोग किया और धक्कामुक्की शुरू हो गई। इसी बीच भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। एक पत्थर इविवि के कर्मचारी जनार्दन प्रसाद पांडेय के सिर पर लगा और वह घायल हो गए। पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया और छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटना शुरू कर दिया।

छात्रों की भीड़ प्रॉक्टर ऑफिस, पुराने वीसी दफ्तर, राजनीति विज्ञान विभाग और लाइब्रेरी के सामने खड़े चार पहिया वाहनों में तोड़फोड़ करते हुए बाहर की ओर भागी। लाइब्रेरी गेट और केपीयूसी गेट से बाहर निकलने के बाद भीड़ ने एलनगंज जाने वाली बंद रोड पर खड़े चार वाहिया वाहनों को भी नहीं छोड़ा और जमकर तोड़फोड़ की। पुलिस ने विभागों में घुसकर उपद्रवियों को पकड़ा और जमकर पिटाई की। इविवि के बाहर केपीयूसी रोड पर कुछ देर के लिए चक्काजाम भी किया गया। पुलिस ने इविवि के चारों ओर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया। इससे राहगीरों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा।

‘कुछ उपद्रवी तत्वों के उग्र प्रदर्शन से विश्वविद्यालय परिसर में शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों के वाहनों की जो क्षति हुई है, वह दुखद है। परिसर में इस प्रकार की गतिविधियां निंदनीय हैं। मैं लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करता हूं पर इसकी आड़ में उपद्रव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।’ 
प्रो. रतन लाल हांगलू, कुलपति, इविवि
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बवाल में रुका नामांकन फार्म का वितरण
लाल पद्मधर भवन में मंगलवार को नामांकन फार्म का वितरण हो रहा था। इस बीच बवाल शुरू हो गया और नामांकन फार्म का वितरण रोक दिया गया। आपाधापी में भवन पर ताला लगा दिया गया और चुनाव से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी वहां से चले गए।

कला संकाय में आज शिक्षण कार्य स्थगित
इविवि के पीआरओ डॉ. चित्तरंजन कुमार सिंह के अनुसार 16 अक्तूबर को छात्र परिषद चुनाव के नामांकन के मद्देनजर कला संकाय में शिक्षण कार्य स्थगित रहेगा। वाणिज्य, विधि और विज्ञान संकाय में पूर्ववत सभी कार्य होंगे। विश्वविद्यालय के सभी विभागों के अध्यक्ष बुधवार को अपने विभाग में रहेंगे ताकि उम्मीदवार अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकें।
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आधे घंटे तक होता रहा उपद्रव, तांडव देख सहमे राहगीर

छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर शांति मार्च निकाल रहे छात्रनेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद विवि व बैंक रोड पर आधे घंटे तक जमकर उपद्रव हुआ। पुलिस ने खदेड़ा तो पथराव करते हुए उपद्रवी विवि रोड पर आ गए। जिसके बाद राहगीरों में भगदड़ मच गई। उधर, उपद्रवियों ने विवि और फिर बैंक रोड पर पहुंचकर सड़क किनारे खड़े दर्जनों वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। 

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हिरासत में लेते ही भड़के छात्र

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यूनियन हॉल पर हंगामा कर रहे छात्रनेताओं को जैसे ही हिरासत में लिया गया, छात्रों की भीड़ में शामिल कुछ उपद्रवियाें ने पथराव कर दिया। पुलिस ने उन्हें खदेड़ने के लिए लाठियां भांजी तो वह और उग्र हो उठे और पथराव करते हुए विवि रोड पर आ गए। चौतरफा पत्थरों की बरसात होते देख राहगीर सकते में आ गए और वहां भगदड़ मच गई। उधर, विवि मार्ग से हॉलैंड हॉल की ओर बढ़ी उपद्रवियों की भीड़ ने सड़क किनारे खड़े वाहनों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। सीओ कर्नलगंज के वाहन को भी पत्थर बरसाकर क्षतिग्रस्त कर दिया। साथ ही पुलिसकर्मियों को पीछे आते देख उपद्रवी बैंक रोड पर आ गए। कुछ उपद्रवियों ने केपीयूसी के सामने स्थित विवि गेट पर भी पत्थर फेंके, जिस पर सुरक्षाकर्मी पीछे हट गए। इसके बाद लाइब्रेरी गेट के पास पहुंचकर उपद्रवियों ने मारपीट शुरू की, जिसे देख सड़क पटरी पर स्थित दुकानों को छोड़कर दुकानदार भाग खड़े हुए।
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केपीयूसी के रास्ते को किया जाम
कुछ उपद्रवियों ने पुलिस चौकी के पास पहुंचकर लल्ला चुंगी से केपीयूसी की ओर जाने वाले रास्ते को जाम कर दिया। साथ ही राहगीरों पर भी पत्थर बरसाने लगे। हालात यह हुए कि जान खतरे में देख वाहनसवारों को पीछे मुड़कर उसी रास्ते पर उल्टे भागना पड़ा। यहां भीड़ में शामिल कुछ युवकों ने राहगीरों से भी मारपीट की। इसी दौरान एसपी सिटी बृजेश कुमार श्रीवास्तव कई थानों की फोर्स लेकर पहुंचे और उपद्रवियों को खदेड़ा तब जाकर हालात कुछ सामान्य हुए। हालांकि भागते वक्त भी उपद्रवी पत्थर बरसाते रहे और सड़क किनारे सहमे खड़े लोगों से गालीगलौच भी की। 
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बंद रोड पर तोड़े गए दर्जनों वाहन 

पुलिस के पहुंचने से पहले उपद्रवियों की भीड़ में शामिल कुछ युवकों ने बंद रोड पर भी पहुंचकर तांडव किया। यहां स्थित घरों व कोचिंग संस्थानों के बाहर खड़े दर्जनों वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया। अराजक तत्वों ने लोहे की रॉड व डंडों से वाहनों में तोड़फोड़ की। संख्या ज्यादा होने के कारण कोई उनका विरोध करने की हिम्मत भी नहीं जुटा सका। इससे पहले एफसीआई बिल्डिंग के सामने खड़ी सफेद रंग की गाड़ी में भी तोड़फोड़ की गई। इस कार में पीछे की ओर भारत सरकार लिखा हुआ था और यह किसी प्रोफेसर की बताई जा रही थी। 
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तांडव होते देख चीखने लगीं छात्राएं

बैंक रोड पर बवाल के दौरान उपद्रवियों का तांडव देख उधर से गुजर रही कुछ छात्राएं दहशत के चलते चीखने लगीं। पथराव व गालियां देते उपद्रवी उनकी ओर दौड़े तो वह कांपने लगीं। जिसके बाद कुछ छात्राओं ने विवि पुलिस चौकी और कुछ ने विवि एफसीआई बिल्डिंग के भीतर छिपकर खुद को बचाया। उधर कर्मचारियों ने भी उपद्रव होता देख एफसीआई बिल्डिंग का गेट बंद कर लिया था। लाइब्रेरी हाल व केपीयूसी के सामने स्थित विवि के गेट को भी सुरक्षाकर्मियों ने बंद कर दिया जो उपद्रव शांत होने के बाद ही खोला गया। 

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दो छात्रों की भी पिटाई, पटक दिया मोबाइल

बैंक रोड पर बवाल के दौरान उपद्रवियों ने छात्रों को भी नहीं छोड़ा। मोबाइल पर बात करते  हुए जा रहे दो छात्रों की जमकर पिटाई कर दी। पहली घटना पुलिस चौकी के पास और दूसरी घटना कृष्णा कोचिंग के पास स्थित बंद रोड मोड़ पर हुई। दरअसल दोनों छात्र मोबाइल पर बात कर रहे थे। इसी दौरान उपद्रवियों ने समझा कि वह मोबाइल से वीडियो बना रहे हैं। जिसके बाद उन्हें घसीटकर सड़क पर लाने के बाद पीटना शुरू कर दिया। साथ ही मोबाइल छीनकर जमीन पर पटक दिया। दोनों छात्रों ने किसी तरह उपद्रवियों के चंगुल से छूटने के बाद वहां से भागकर खुद को बचाया। 

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पुलिस ने भी दिखाए तेवर, घेरकर बरसाई लाठियां

उधर जबरदस्त उपद्रव से झल्लाए पुलिसकर्मियों ने पकड़ में आए उपद्रवियों को जमकर पीटा। बैंक रोड पर फोर्स को आते देख उपद्रवी लल्लाचुंगी की ओर भागे। जिस पर पुलिसकर्मी उनके पीछे दौड़े। इस दौरान अन्य तो भाग निकले लेकिन कुछ पकड़े गए। पुलिस चौकी के पास पेड़ के पीछे छिप रहे एक उपद्रवी को पकड़ने के बाद पुलिसकर्मियों ने घेरकर उस पर लाठियां बरसाईं। उधर सड़क पटरी पर लगी किताब की दुकान के पीछे छिपने की कोशिश कर रहे एक उपद्रवी की भी जमकर पिटाई हुई। सीओ पंचम आदेश कुमार त्यागी ने उसे जमकर पीटा। हालांकि पीटे गए दोनों युवक ख्ुाद को निर्दोष बताते रहे। 

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अनहोनी की आशंका में बंद की दुकानें

उधर उपद्रवियों को खदेड़ने के दौरान ही मौके पर डायल 100 की मोबाइल बाइकों को फौरन लल्ला चुंगी तिराहे पर पहुंचने का निर्देश जारी किया गया। एक साथ दर्जनों बाइकें पहुंचीं तो हूटरों के शोर से पूरा इलाका गूंज उठा। उधर जबरदस्त फोर्स व चौतरफा हूटरों की गूंज सुनकर तिराहे पर स्थित दुकानों के संचालक व वहां खड़े ग्राहक भी अनहोनी की आशंका से खौफजदा हो गए। जिसके बाद वहां धड़ाधड़ दुकानों के शटर गिरने लगे और दुकानदार भी चले गए। इसके बाद लल्ला चुंगी तिराहे पर हर तरफ केवल फोर्स ही नजर आई। 

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तोड़फोड़ करने वाले छात्रों से वसूली की तैयारी

छात्र परिषद के विरोध में इविवि में हुए बवाल के दौरान हुए नुकसान की भरपाई उन छात्रों को करनी होगी, जिन्होंने वाहनों में तोड़फोड़ की या किसी अन्य तरीके से संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया। इविवि में तोड़े गए ज्यादातर वाहन शिक्षकों और अफसरों के हैं। तोड़फोड़ करने वालों की सीसी टीवी फुटेज से पहचान की जा रही है।

पिछले दिनों इविवि की अनुशासन समिति की बैठक में निर्णय लिया गया था कि उपद्रव के दौरान अगर विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है तो इसकी भरपाई उपद्रव में शामिल छात्रों को करनी होगी। इसके लिए चिह्नित छात्रों के घर नोटिस भेजा जाएगा और नुकसान का आंकनल करते हुए उनसे वसूली की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि टीवी फुटेज के माध्यम से तोड़फोड़ करने वाले छात्रों की पहचान की जा रही है। उन्हें चिह्नित करने के बाद नुकसान भरपाई के लिए इविवि प्रशासन की ओर से नोटिस भेजा जाएगा।

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तय समय पर ही होगा चुनाव, नामांकन आज
इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर में चुनाव तय समय पर ही कराए जाएंगे। इविवि में मंगलवार को हुए बवाल के बाद डीएम और एसएसपी की इविवि प्रशासन के अफसरों के साथ हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया।

डीएम भानु चंद्र गोस्वामी और एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने बैठक के दौरान इविवि के अफसरों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया। उन्होंने विश्वविद्यालय में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूर्ण सहयोग का वादा किया। बैठक में तय हुआा कि सख्ती के साथ चुनाव संपन्न कराया जाएगा। इसके साथ ही छात्र परिषद के चुनाव की तैयारियों को लेकर समीक्षा भी की गई। इस दौरान इविवि के रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला, चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे, डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार, एडवायरी बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. एसए अंसारी, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. चित्तरंजन कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।

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इविवि में नामांकन फॉर्म ले गए 33 छात्र-छात्राएं

प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में बवाल शुरू होने से पहले 33 छात्र-छात्राएं नामांकन फॉर्म ले गए। इसके अलावा नामांकन फॉर्म ऑनलाइन भी डाउनलोड किए जा रहे हैं। वहीं, सीएमपी में मंगलवार से नामांकन पत्रों की बिक्री और नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई। हालांकि पहले दिन कोई नामांकन नहीं हुआ लेकिन 31 छात्र-छात्राएं नामांकन फॉर्म ले गए।

इविवि में छात्र परिषद के चुनाव के तहत कक्षा प्रतिनिधियों के लिए नामांकन बुधवार को सुबह नौ से अपराह्न दो बजे तक लाल पद्मधर भवन में होगा। प्रत्याशियों को केपीयूसी गेट से प्रवेश दिया जाएगा। पीआरओ डॉ. चित्तरंजन कुमार सिंह के अनुसार इस बार किसी प्रस्तावक को साथ लाने की जरूरत नहीं है। मंगलवार को सुबह 11 बजे तक 22 छात्राओं ने गर्ल्स हॉस्टल से और 14 छात्रों ने लाल पद्मधर भवन से नामांकन फॉर्म प्राप्त किए। इसके बाद बवाल के कारण नामांकन पत्रों का वितरण बंद कर दिया गया। इस दौरान प्रत्याशियों को परीक्षा नियंत्रक कार्यालय और प्रॉक्टर कार्यालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया भी रुकी रही।

हालांकि बवाल के बाद शाम को अतिरिक्त समय में छात्रों को नामांकन कराने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किए गए। 
उधर, सीएमपी डिग्री कॉलेज 15 एवं 16 अक्तूबर को नामांकन की तिथि निर्धारित की गई है। कक्षा प्रतिनिधि कला संकाय के लिए 21, विज्ञान संकाय के लिए सात, वाणिज्य संकाय के दो और बीसीए संकाय के लिए एक फॉर्म की बिक्री हुई लेकिन किसी प्रत्याशी ने नामांकन नहीं कराया। विधि संकाय से किसी ने फॉर्म नहीं लिया। बुधवार को सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक नामांकन पत्रों की बिक्री और दोपहर दो बजे तक नामांकन होगा। फिलहाल स्थिति यह है कि अगर नामांकन फॉर्म लेने वालों छात्र-छात्राओं की संख्या नहीं बढ़ी तो प्रत्याशियों की संख्या पदों से भी कम रह जाएगी।

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छात्रों का आरोप, पथराव इविवि प्रशासन की साजिश

प्रयागराज। छात्रसंघ बहाली के लिए आंदोलन कर रही संयुक्त संघर्ष समिति का आरोप है कि उपद्रव इविवि प्रशासन के इशारे पर किया गया और तोड़फोड़ करने वाले इविवि प्रशासन के लोग थे। समिति की ओर से कहा गया है कि छात्रसंघ बहाली के लिए 42 दिन तक शांतिपूर्ण तरीके से क्रमिक अनशन किया गया और आठ दिन का आमरण अनशन भी हुआ। शांति मार्च निकाला गया। ऐसे में हिंसा के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। छात्रों के आंदोलन को कमजोर बनाने के लिए इविवि प्रशासन ने यह साजिश की है।

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छात्रों ने निकाला कैंडल मार्च

प्रयागराज। छात्रों पर लाठीचार्ज की निंदा करते हुए इविवि के छात्रों ने मंगलवार शाम कैंडल मार्च निकाला और बालसन चौराहे पर सभा की। छात्रों ने कहा कि लाठी के दम पर लोकतंत्र की आवाज को बहुत देर तक दबाया नहीं जा सकता। सभा में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित मिश्र, पूर्व महामंत्री निर्भय द्विवेदी, राहुल, अभिनव, प्रशांत, नवीन, आयुष, पीयूष, संदीप आदि मौजूद रहे।

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...तो माहौल भांपने मेें पुलिस की चूक ने कराया बवाल

प्रयागराज। इविवि में हुए बवाल को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल भारी फोर्स की मौजूदगी के बावजूद परिसर में चिह्नित छात्रनेताओं के प्रवेश करने को लेकर यह बात कही जा रही है। कुछ लोगों का तो यह तक कहना है कि कहीं न कहीं माहौल भांपने में पुलिस चूक गई और यही चूक इस बवाल की वजह बन गई। 

दरअसल विवि प्रशासन का कहना है कि 10 अक्तूबर को छात्र परिषद चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही जिला प्रशासन के साथ पत्र व्यवहार किया गया। जिनका संज्ञान लेते हुए मंगलवार को विवि के सभी प्रवेश द्वारों पर भारी फोर्स तैनात की गई थी। जिसमें से प्रॉक्टोरियल बोर्ड यूनियन भवन गेट पर सुबह 10.30 बजे से ही मौजूद रहकर आईडी कार्ड जांचने के बाद ही वैद्य छात्रों का परिसर में प्रवेश करने दिया गया। लगभग 11.15 बजे विवि से निष्कासित व ब्लैकलिस्टेड अखिलेश यादव, सौरभ सिंह, अवनीश यादव, अतेंद्र सिंह, शिवम सिंह व अनूप कुमार निर्मल आदि के नेतृत्व में 50-60 अज्ञात प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्यों को गालियां जान से मारने की धमकी देते हुए यूनियन भवन गेट कूदकर परिसर में प्रवेश कर गए। अब सवाल यह है कि भारी फोर्स की मौजूदगी के बावजूद आखिर किस तरह उपरोक्त छात्रनेता परिसर में प्रवेश कर गए। वह भी तब जब विवि की ओर से बवाल की आशंका जताने के बाद ही उसे यहां तैनात किया गया था। एक खास बात यह है कि विवि प्रशासन के मुताबिक, इनमें से छह छात्र वह थे जिनके खिलाफ एक दिन पहले ही रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। सवाल यह भी है कि पुलिस आखिर इन आरोपियों को कैसे नहीं पहचान सकी। 

कुछ लोगोें का कहना है कि कि पुलिस माहौल को पूरी तरह से भांप नहीं सकी। और यही वजह रही कि भारी फोर्स की मौजूदगी के बार भी छात्रनेता परिसर मेें प्रवेश कर गए। जिसके बाद भारी बवाल हुआ। हालांकि इस मामले में पुलिस अफसर किसी चूक की बात मानने को तैयार नहीं। उनका कहना है कि पुलिस अलर्ट थी और इसी के लिए सुबह से ही भारी फोर्स तैनात की गई थी। 


बोले भुक्तभोगी, हमारा क्या कसूर 
उधरबवाल के दौरान जिन लोगों के वाहनों में तोड़फोड़ की गई, वह यही कहते रहे कि आखिर उनका क्या कसूर था। बवाल के दौरान तीन दर्जन से ज्यादा वाहनों केा क्षतिग्रस्त किया गया। जिनमें से ज्यादातर के आगे व पीछे की ओर के शीशे चकनाचूर कर दिए गए। बीमा मामलों के जानकारों का कहना है कि कंपनियां शीशे के क्षतिग्रस्त होने पर किसी तरह का क्लेम नहीं देतीं। यह खर्च मोटर मालिक को खुद से उठाना पड़ता है। ऐसे में बवाल में जिन लोगों की गाड़ियों के शीशे क्षतिग्रस्त हुए, उन्हें अपनी जेब से इसे दुरुस्त कराना होगा। उधर कार एसेसरीज व्यापारियों से बात करने पर पता चला कि चारों ओर के शीशे क्षतिग्रस्त होने पर मोटर मालिक को कम से कम 50 हजार का नुकसान तो होता ही है। 
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महीने भर से बिना प्रभारी के चल रही पुलिस चौकी

प्रयागराज। बवाल मामले में यह भी कहा जा रहा है कि विवि चौकी पर प्रभारी की तैनाती न होने की वजह से भी पुलिस को माहौल भांपने मेें कठिनाई हुई। दरअसल पूर्व चौकी प्रभारी का स्थानांतरण होने के बाद करीब एक महीने से चौकी बिना प्रभारी के चल रही है। विवि व हॉस्टलों में आए दिन होने वाले बवाल को देखते हुए माना जाता है कि यह बेहद संवेदनशील चौकी है जिसके प्रभारी को हर वक्त अलर्ट मोड पर रहना पड़ता है। इसके बावजूद लंबे समय से यहां प्रभारी की तैनाती न होने से कई तरह के सवाल भी खड़े हो रहे हैं। 
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