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इससे पहले कवि सम्मेलन की शुरुआत गौरी मिश्रा वाणी वंदना से की। फिर, गौरी ने शृंगार रस की कविताओं से सराबोर कर दिया। न मैं डर से निकलती हूं/ न मैं भय से निकलती हूं/ जो है संगीत लहरों में उसी लय से निकलती हूं...। इनके बाद हास्य कवि किरण जोशी ने माइक संभाला। कवि जोशी की कविताओं में भारतीय संस्कृति, समभाव, भाईचारा के भाव झलक रहे थे।