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प्रयागराजः विकराल यमुना भी खतरे के निशान के पार, सैकड़ों बस्तियों में भरा पानी

Thu, 19 Sep 2019 11:53 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj me flood - फोटो : प्रयागराज
मध्य प्रदेश व राजस्थान के बांधों से छोड़े गए पानी के दबाव के बीच बुधवार की शाम यमुना भी खतरे के निशान को पार कर गई। गंगा-यमुना के रौद्र रूप से बाढ़ का संकट और गहरा गया है। तटवर्ती सैकड़ों बस्तियों, गांवों में पानी घुसने से स्थिति चिंताजनक हो गई। वहीं तीन दिन पहले राजस्थान के कोटा और धौलपुर बांधों से छोड़े गए पानी के अगले 24 घंटे के भीतर यहां पहुंचने का अनुमान है, जिससे बाढ़ का पानी शहर के कुछ हिस्सों में भी दाखिल हो सकता है। प्रशासन ने राहत व बचाव के लिए कमर कस ली है। 



फिलहाल गंगा और यमुना एक सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से बढ़ रही हैं। माना जा रहा है कि जलस्तर में वृद्धि की रफ्तार यदि इससे अधिक नहीं बढ़ी तो बाढ़ से विस्थापन और बर्बादी का दायरा सिमट सकता है। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड की ओर से बुधवार की शाम जारी बुलेटिन के अनुसार गंगा के बाद शाम चार बजे यमुना भी खतरे के निशान पर पहुंच गई। फिलहाल बांधों से बुधवार को बड़ी जलराशि गंगा-यमुना में न छोड़े जाने से थोड़ी राहत महसूस की जा रही है। अब प्रशासन का पूरा जोर राजस्थान के बांधों से छोड़े गए पानी के यहां असर से निबटने को लेकर है।

जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने अफसरों के साथ बाढ़ राहत व बचाव की तैयारियों की समीक्षा की। साथ ही राहत शिविरों व बांधों की स्थिति भी उन्होंने देखी। प्रभावित इलाकों में संक्रमण न फैलने पाए, इसके लिए नगर निगम और चिकित्सा विभाग को कड़ी हिदायत दी। राहत शिविरों में खाने के पैकेट, बिजली, पानी व दवा के समुचित इंतजाम रखने के निर्देश दिए। उधर, कछारी इलाकों की बस्तियों में बाढ़ का पानी बुधवार को और फैलने से बर्तन, बिस्तर और अनाज लेकर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए दिन भर मशक्कत जारी रही। 

गंगा का जलस्तर शाम छह बजे
फाफामऊ -84.99 मीटर
छतनाग - 84.26 मीटर

यमुना का जलस्तर
नैनी - 84.82 मीटर
-------------------------
खतरे का निशान- 84.73 मीटर
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बृहस्पतिवार से बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका है। इसे देखते हुए प्रशासन ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। डीएम भानु चंद्र गोस्वामी तथा अन्य अफसरों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। अफसरों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में हाई एलर्ट जारी किया गया है। लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है। डीएम ने बताया कि चार से पांच दिनों तक हालात खराब रहने की आशंका है। इस बाबत उन्होंने सभी संबंधित विभाग के अफसरों को तैयार रहने का निर्देश दिया। डीएम ने बताया कि जिले में कुल 99 बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं। इनमें 66 ग्रामीण क्षेत्र में हैं। शिविरों में अफसरों तथा कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। शिविरों के अलावा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सभी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम ने बख्शी बांध, बदरा-सोनौटी आदि स्थानों का निरीक्षण भी किया। एसडीएम तथा अन्य अफसरों ने बाढ़ क्षेत्र तथा शिविरों का निरीक्षण किया और जरूरी निर्देश दिए।
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सूबे के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य बृहस्पतिवार को प्रयागराज पहुंच रहे हैं। यहां वह जिले में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। साथ ही तमाम शिविरों में राहत सामग्री का वितरण करेंगे। प्रशासनिक एवं विभागीय अफसरों के साथ उनकी बैठक भी होगी। डिप्टी सीएम का हेलीकॉप्टर दिन में 12.15 बजे लखनऊ के लामार्टीनियर ग्राउंड से उड़ान भरेगा। दिन में एक बजे उनका हेलीकॉप्टर पुलिस लाइंस में उतरेगा। यहां प्रशासनिक अफसरों एवं पार्टी नेताओं से मिलने के बाद वह भाजपा नगर अध्यक्ष अवधेश चंद्र गुप्ता आदि के साथ तकरीबन 30 मिनट जिले के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई निरीक्षण करेंगे। दिन में 1.50 बजे सर्किट हाउस में बाढ़ राहत के संबंध में जिले के अफसरों के साथ उनकी बैठक आयोजित है। बैठक के बाद बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों के राहत शिविरों का निरीक्षण कर वहां राहत सामग्री का वितरण करेंगे। शाम को भाजपा नेताओं से मुलाकात का उनका कार्यक्रम है। नगर अध्यक्ष ने बताया कि डिप्टी सीएम 20 सितंबर को भी प्रयागराज में रहेंगे। दिन में 11.55 बजे सर्किट हाउस में पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ उनकी बैठक आयोजित है।

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राजस्थान, मध्य प्रदेश और यूपी के तमाम स्थानों में आई बाढ़ की वजह से प्रयागराज आने वाले ट्रकों की रफ्तार थम गई है। कच्चे माल की सप्लाई पर इसका असर भी दिखना शुरू हो गया है। स्थिति यही रही तो आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि हरी सब्जियों की सप्लाई पर इसका असर दिखना जरूर शुरू हो गया है। टमाटर छोड़ सप्ताह भर में हरी सब्जियों के दाम में काफी बढ़ोत्तरी हो गई है। थोक कारोबारियों की माने तो सब्जियों के दाम में भी अभी और तेजी होगी।
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बाढ़ की वजह से मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं प्रदेश के तमाम स्थानों से आने वाले ट्रक रास्ता बंद हो जाने की वजह से जहां के तहां खड़े हो गए हैं। तमाम ट्रकों में कच्चा माल आदि लदा हुआ है। इन ट्रकों में लहसुन, प्याज, अदरक, अरहर दाल आदि प्रमुख रूप से लदे हुए हैं। प्रयागराज ट्रक एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल कुशवाहा की माने तो ट्रकों की लोडिंग और अनलोडिंग भी इन दिनों काफी कम हो गई है। सब्जियों की आवाजाही इससे कुछ ज्यादा ही प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया दाल, गेहूं एवं अन्य आवश्यक वस्तुएं भी तमाम शहरों से प्रयागराज आती हैं। ट्रांसपोर्ट नगर में भी लोडिंग बीते तीन चार दिनों के दौरान कम हुई है। इलाहाबाद गल्ला तिलहन व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश केसरवानी का कहना है कि अभी कारोबारियों के पास आटा, तेल, दाल, गेहूं आदि का पर्याप्त स्टाक है लेकिन अगर बाहर से आने वाले ट्रकों की आवाजाही बाढ़ की वजह से रुकती है तो सप्ताह भर बाद इसका असर बाजार में दिख सकता है। 
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बाढ़ संग बारिश आफत बनी है। बुधवार को तेज बारिश से परेशानियां बढ़ा दीं। प्रभावित इलाकों में नीचे बाढ़ का पानी भरा है और छतों पर डेरा जमाए लोगों पर बारिश का कहर बरपा। तेज हवाओं से डेरा-छतरी उड़ गईं। प्लास्टिक की छावनी जगह-जगह पानी भरने से चूने लगी। बिजली न पानी, फिर बाढ़ और बारिश एक साथ कई मुसीबतों का कारण बनी। करीब दो दर्जन मोहल्लों में फंसे हजारों लोग असहाय बने हैं। 
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बुधवार सुबह से डरा रहे बादल थोड़ी देर ही सही खूब बरसे। बारिश ने बाढ़ प्रभावित लोगों की दुश्वारियां बढ़ा दीं। छतों पर डेरा जमाए लोग तो भीगे ही, उनका सामान भी गीला हो गया। गनीमत रही कि दिन था, रात होती तो मुश्किल बड़ी हो जाती। पीड़ितों का दर्द पूछने वाला कोई नहीं है। दिक्कत पीने के पानी की बड़ी है। इसके लिए नाव से जाएं या फिर बाढ़ के पानी में फैली गंदगी को पार करें। फिर बोतल बंद पानी मिलेगा या नहीं, इसकी गारंटी नहीं हैं। कहीं-कहीं मोहल्लों के किनारों पर पहुंचने वाले पानी की टैंकर लोगों की जरूरत पूरी नहीं कर पा रहे हैं।  

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शहर के कछारी बुधवार को बाढ़ प्रभावित मोहल्लों की संख्या बड़ गई। नालियों के रास्ते घुसा पानी अब घर पहुंच चुका है। दारागंज, बक्शीकला, द्रौपदी घाट, राजापुर, गंगानगर, नेवादा, ऊंचवागढ़ी, सरकुलर रोड का निचला हिस्सा, बेली कछार, मऊसरइयां, शंकरघाट, स्वामी सदानंद नगर, मेंहदौरी, छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, गऊघाट, करेलाबाग आदि मोहल्लों में बाढ़ प्रभावित लोगों की दिक्कतें बढ़ी हैं। मोहल्लों के घरों ही नहीं सड़कों और गलियों पर भी पानी लगा रहा। प्रभावित इलाकों में लोग सामन ही ढोते रहे। दारागंज, राजापुर, बघाड़ा, नेवादा, द्रौपदी घाट, करेली, करेलाबाग में भी लोग ऊपरी मंजिल पर सामान चढ़ाते रहे। गठरी में बांधा गया सामान प्रभावित इलाकों से परिचितों, रिश्तेदारों के घर ले जाया गया। 

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यमुना के जलस्तर के साथ ही करेली के गौसनगर इलाके में दिक्कतें भी बढ़ने लगी है। निचली मंजिल में पानी भरने के बाद लोग सामान समेट कर ऊपरी मंजिल पर पहुंच गए हैं। टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन जैसी वस्तुएं या तो ऊपरी मंजिल या फिर रिश्तेदारों, करीबियों के घरों में पहुंचा दी गई हैं। गड्ढा कॉलोनी के बिस्मिल्ला चौराहा के करीब रहने वाले शाहिद अली राजू बोले, गड्ढा कॉलोनी के ट्रांसफार्मर के पास तकरीबन ढाई फीट तक पानी आ पहुंचा तो विभाग से कहकर ट्रांसफार्मर हटवाया गया।

इससे बिजली तो नहीं आ रही है लेकिन क्षेत्रीय लोगों ने ऊंचे मकानों की छतों से तार खींचकर, दो तीन मकानों के बीच में एक जगह रोशनी की है, ताकि लोगों को परेशानी न हो। शमशाद टेंट वाले बोले, पानी बढ़ने के साथ चोरी का भी खतरा बढ़ गया है। नीचे खाली और अंधेरा होने से पुरुष रात-रात भर जागकर बारी-बारी से पहरा दे रहे हैं। दरअसल पिछली बाढ़ में निचली मंजिल पर रखी मोटरसाइकिल आदि को नाव से बांधकर चोर खींच ले गए थे। पास-पड़ोस के ही चोर दिन भर रेकी करते हैं। जहां किसी का घर खाली दिखता था, वहां रात में नावें लगाकर गाड़ी वगैरह खींच ले जाते थे।

इसी वजह से इस बार भी चोरी को लेकर लोग काफी सतर्क हैं। जिया अहमद ने जोड़ा, लाइट न होने से कई तरह की परेशानी है। लोग विशेषकर रात में काफी चौकन्ने होकर रह रहे हैं। बाढ़ की वजह से जहरीले जंतुओं जैसे सांप, बिच्छू, गोजर आदि का खतरा बढ़ गया है। ऊपरी मंजिल पर एक तो वैसे ही आदमी फंसा हुआ है, उस पर सांप या बिच्छू की डर बना हुआ है। इससे लोग दहशत में हैं। किसी अनहोनी की स्थिति में प्राथमिक उपचार का मिलना भी मुश्किल ही होगा।

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गंगा, यमुना के साथ टोंस, लपरी, ससुर खदेरी आदि नदियां भी ऊफान पर हैं। इसकी वजह से दर्जनों गांव बाढ़ में घिर गए हैं। हर तरफ बाढ़ का पानी होने की वजह से अन्य क्षेत्रों से उनका संपर्क टूट गया है। कटान के कारण एक दर्जन से अधिक मकान भी गंगा में समा गए। इससे जान-माल का भी खतरा बन गया है। बाढ़ में डूबने से धान की सैकड़ों एकड़ फसल भी बर्बाद हो गई है।

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गंगा और टोंस नदी का पानी गांवों में घुस गया है। भीरपुर के डीहा, सेमरहा, बबुरा, खजुरैल, बगरहा आदि गांव इसकी चपेट में हैं। क्षेत्र में उड़द, मूंग, तिल, चरी आदि की खेती होती है लेकिन पूरी फसल पानी में डूब गई है। मांडा के चौकठा नरवर और उमापुर कला के 11 मकान गंगा में समाहित हो गए। कटान का खतरा अब भी बना हुआ है। इसे देखते हुए गांव के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। नरवर गांव में ग्रामीण क्षेत्र का पहला शिविर बनाया गया है। वहां दोनों गांव के 250 लोगों ने शरण ले रखी है। कोरांव में लपरी नदी पर बना पुल भी डूब गया है। इसके अलावा भमौर गांव का संपर्क हर तरफ से टूट गया है। करछना के पनासा समेत एक दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं। कोड़हार के सुलमई, पिपराव, झाड़ियाहीं, शाहपुर, कंजासा, मोहानी आदि गांव भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं तथा ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है।

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मांडा के नरवर चौकठा विद्यालय को बाढ़ राहत शिविर में तब्दील कर दिया गया है। वहां करीब 250 लोगों ने शरण ले रखी है लेकिन शाम पांच बजे तक उन्हें भोजन नहीं मिल पाया था। इससे ग्रामीणों में नाराजगी रही। लोगों ने एडीएम प्रशासन से इसकी शिकायत की लेकिन उनकी ओर से भी सिर्फ आश्वासन मिला। इससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई। नांव न चलने से भी ग्रामीणों में नाराजगी रही।

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बाढ़ की भयावहता के बीच बुधवार को बक्शी बांध एसटीपी के स्लूज गेट में रिसाव से हड़कंप मच गया। आननफानन में बालू से भरी बोरियां लगाकर पानी रोका गया। अफसरों के मुताबिक फिलहाल खतरा टल गया है। सूचना पर सिंचाई विभाग, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई समेत कई विभागों के अफसर वहां भोर में ही पहुंच गए। सूचना पर वहां पहुंचे डीएम ने भी हालात का जायजा लिया।

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बक्शी बांध एसटीपी चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरा है। डीएम को इसकी सूचना पार्षद कमलेश सिंह ने दी। वहां पहुंचे डीएम को अफसरों ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही स्लूज गेट और एसटीपी के फाटक बंद किए गए थे। पानी और बढ़ा तो दबाव से फाटक और दीवार के बीच दरार से पानी भीतर पहुंचने लगा। इसकी जानकारी होने पर बालू भरी बोरियां लगाई गईं। अभी पानी रुक गया है। मौके पर सिंचाई विभाग और गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसर पालीवार निगरानी कर रहे हैं। डीएम के मुताबिक फिलहाल खतरा नहीं है। फाटक दुरुस्त है और रिसाव को रोक दिया गया है।
वर्ष 2013 में बांध में आई थी दरार

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पार्षद कमलेश सिंह ने जिलाधिकारी को बताया कि वर्ष 2013 में बक्शी बांध में इसी तरह एक दरार बड़ी परेशानी का कारण बनी थी। बांध में आई दरार को भरने में काफी दिक्कत आई थी। उस समय सुझाए गए उपायों पर अमल नहीं किया गया। यदि कुछ उपाय कर लिए जाएं तो आपदा की स्थिति में दरार जैसी परेशानी से बचा जा सकता है।

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एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम बाढ़ पीड़ितों के लिए सहारा बनी हुई है। उन्हाेंने बुधवार को बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित सलोरी, बघाड़ा, बेली, ऊंचवागढ़ी में रिस्क्यू अभियान चलाया। उन्होंने बाढ़ में फंसे सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। एनडीआरएफ की टीम को कई जगहों को परेशानी भी उठानी पड़ी। कई अर्द्धनिर्मित मकानों में सरिया निकले हैं लेकिन वे पानी में डूब गए है। इसके विपरीत एनडीआरएफ की मोटरबोट रबड़ की होती है। इसकी वजह से उन्हें बड़ी सावधानी से रिस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ रहा है। एनडीआरएफ के अलावा नावें भी बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए मददगार साबित हो रही हैं। प्रभावित क्षेत्रों में 50 से अधिक नावें लगाई गई हैं। तीन दर्जन नावें शहर में चल रही हैं। एडीएम वित्त एवं राजस्व मार्तंड प्रताप सिंह ने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर राहत शिविरों तथा नावों की संख्या बढ़ा दी जाएगी। इसकी तैयारी की गई है।

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शहरियों के लिए बाढ़ लंबी मुसीबत का कारण बनने जा रही है। शहर के बड़े इलाके में करीब एक सप्ताह तक बाढ़ का प्रकोप जारी रहने की आशंका है। इसके बाद पानी निकलने की उम्मीद है लेकिन प्रभावित लोगों और प्रशासन के सामने गंदगी तथा मच्छर जनित बीमारियों से निपटने की चुनौती होगी।
गंगा और यमुना दोनों नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। मध्य प्रदेश और राजस्थान की नदियों में छोड़े गए पानी का असर भी अब यहां दिखने लगा है। यहां की दोनों नदियों में जल स्तर तेजी से बढ़ने लगा है। ऐसे में बृहस्पतिवार को कई और मोहल्लों के बाढ़ की चपेट में आने की आशंका है।

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पांच से छह दिन बाद ही बाढ़ का पानी निकलेगा लेकिन अपने पीछे गंदगी का अंबार छोड़ जाएगा। बाढ़ के पानी के साथ कछारी इलाके की गंदगी भी मोहल्लों में पहुंच गई है। बाढ़ का पानी निकलने के बाद यह गंदगी बस्तियों में ही रह जाएगी तथा इनकी सड़न लोगों की बीमारी का कारण बनेगी। इसके अलावा खाली स्थानों, सड़काें, गलियों में कीचड़ का आलम होगा। हजारों मकानों में अभी से बाढ़ का पानी घुस गया है। इस तरह से 15 दिन से भी अधिक समय तक पानी में डूबे रहने से मकान कमजोर हो जाएंगे तो शीलन की भी शिकायत होगी। इसकी वजह से बाहर ही नहीं घर के भीतर भी बदबू, मच्छर आदि से लोगों की परेशानी बढ़ने की आशंका है। प्रशासन भी बाढ़ का पानी निकलने के बाद आने वाली इस मुसीबत से अवगत है तथा इससे निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है। बुधवार को हुई बैठक में इस बाबत तैयारी की समीक्षा भी की गई।

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ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन की ओर से बाढ़ पीड़ितों की परेेशानियों को लेकर बुधवार को अपर जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में एसडीएम युवराज सिंह को पांच सूत्रीय ज्ञापन दिया गया। इसके माध्यम से बचाव कार्य में तेजी लाए जाने, बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था करने, पुलिस गश्त बढ़ाए जाने आदि की मांग की गई। ज्ञापन देने वालों में महानगर अध्यक्ष अफसर महमूद, इफ्तेखार अहमद, मो.हसन गदी, इसरार अहमद, सैफी हब, इरफान अंसारी, नदीम अंसारी अबु सालिम, मो.आमिर बादशाह आदि शामिल थे।

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प्रशासनिक दावों के विपरीत बाढ़ राहत शिविरों में भारी अव्यवस्था की शिकायत है। सफाई न होने की सीधे डीएम से शिकायत की गई है। इसके बाद अपर नगर आयुक्त की ओर से बुधवार को जिम्मेदार अफसरों को चेतावनी जारी की गई। शिविरों में दूध का पैकेट तो वितरित किया जा रहा है लेकिन पर्याप्त मात्रा में नहीं। मात्र एक पैकेट दूध मिलने से दो से अधिक बच्चों वाले परिवारों के सामने संकट खड़ा हो गया है। जबकि, जरूरत के हिसाब से दूध वितरण का आदेश है।

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शहर में नौ बाढ़ शिविरों में लोग पहुंचने लगे हैं। बाढ़ पीड़ितों के लिए मेन्यू तय है। यानी, उन्हें कब क्या मिलेगा यह निर्धारित है। इसके तहत सुबह और शाम दो बार दूध दिया जाना है। इसके विपरीत उन्हें सिर्फ सुबह दूध मिल रहा है, वह भी मात्र एक पैकेट। एनी बेसेंट इंटर कालेज शिविर में शरण लेने वाली सुमन का कहना था कि उनके 11, आठ और एक वर्ष के तीन बच्चे हैं। इनके अलावा पति, पत्नी तथा भाई भी शिविर में हैं। पूरे परिवार के लिए उन्हें एक पैकेट दूध मिला। ऐसे में बच्चे बिना दूध के रह गए। यही शिकायत अन्य शिविरों में भी है। एसडीएम सदर गौरव रंजन का कहना है कि दूध की कोई कमी नहीं है। जरूरत के हिसाब से दूध देने का निर्देश है। उधर, उमराव सिंह इंटर कालेज शिविर में कूड़े से भरा टैंकर दो दिन तक पड़ा रहा। लोगों ने इसकी शिकायत की लेकिन नहीं हटाया गया। गंदगी, ओवरफ्लो मोबाइल शौचालय को न हटाने आदि की शिकायत ज्यादातर शिविरों में रही। डीएम से भी इसकी शिकायत की गई। हालांकि, इसके बाद असर दिखा। अपर नगर आयुक्त अमरेंद्र वर्मा ने जिम्मेदार अफसरों को चेतावनी जारी की। इसके बाद शिविरों में सफाई होने लगी थी। शिविरों में मच्छर का प्रकोप, बाथरूम की सुविधा न होने समेत कई अन्य शिकायतें भी हैं।

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बाढ़ में फंसे मवेशियों को भी शिविरों में लाया गया है। एनी बेसेंट शिविर में बड़ी संख्या में गाय, भैंस, बकरियां आदि पशु रखे गए हैं। इसके अलावा बेली में तथा अन्य स्थानों पर उनके लिए अलग से बाढ़ा बनाए गए हैं लेकिन बुधवार तक चारा की व्यवस्था नहीं हो पाई थी। शिविरों में पहुंचे मवेशी बिना चारा के रहे। सीवीओ विजय प्रताप सिंह का कहना है कि मवेशियों के लिए भूषा आदि की व्यवस्था की जा रही है। शिविरों से जानवारों की बाबत रिपोर्ट मांगी गई है। जरूरत पड़ी तो दूसरे जिलों से भूषा मंगाया जाएगा।

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च्छे कॅरियर की चाहत में दूसरे जिलों से आए हजारों प्रतियोगियों के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है। वे आशियाना के लिए दर-दर भटक रहे हैं। स्कूल-कालेज तथा कोचिंग संस्थान खुले हैं। इसकी वजह से वे घर वापस नहीं जा पा रहे हैं। इसके विपरीत बाढ़ राहत शिविरों में उन्हें ठहरने नहीं दिया जा रहा है। जिनकी हाल फिलहाल परीक्षाएं हैं उनकी परेशानी ज्यादा बढ़ गई है।

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सलोरी, बघाड़ा, तेलियरगंज, बेली, ऊंचवागढ़ी, गंगापुरी आदि इलाकों में मकान का किराया अपेक्षाकृत कम है। इसकी वजह से इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में प्रतियोगी रहते हैं लेकिन इन मोहल्लों का बड़ा इलाका बाढ़ की चपेट में है। प्रतियोगियों की समस्या को इससे ही समझा जा सकता है कि  छोटा बघाड़ा में ही करीब 300 लाज में बाढ़ का पानी घुस गया है। इसकी वजह से प्रतियोगी भटकने के लिए मजबूर हैं। उनमें से कई युवा एनी बेसेंट बाढ़ राहत शिविर में पहुंचे लेकिन उन्हें वापस कर दिया गया। उन्हें बताया गया कि शिविर में सिर्फ परिवार वाले ही रह सकते हैं। उमराव सिंह इंटर कालेज शिविर पर पहुंचे विवेक यादव, सिद्धार्थ आदि को भी वापस कर दिया गया। बेली के अमित बैंक की भर्ती परीक्षओं की तैयारी कर रहे हैं। कोचिंग खुली है। ऐसे में वह घर नहीं जा सकते लेकिन पानी घुस जाने के बाद मकान मालिक ने उनसे फिलहाल घर छोड़ने के लिए कह दिया है। अमित प्रथम तल पर रहते हैं लेकिन भूतल पर पानी आ जाने के बाद सामान रखने के लिए मकान मालिक ने कमरा खाली करा दिया है। अब वह तैयारी छोड़कर नया ठिकाना ढूंढ़ रहे हैं। इस तरह की परेशानी से हजारों प्रतियोगी जूझ रहे हैं।

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बाढ़ का पानी भरने से मुसीबत में फं से लोगों को जरूरी वस्तुओं के साथ दर्द और बुखार की गोली के लिए तरसना पड़ रहा है। राहत केंद्रों पर पीड़ितों के लिए दवा-उपचार की सुविधा है, लेकिन घर की छतों पर रह रहे लोगों की स्वास्थ्य विभाग सुध नहीं ले रहा है। छोटा बघाड़ा निवासी राजेश घर की छत पर तीन दिन से रह रहे हैं। उनकी पत्नी मंगलवार से बुखार पीड़ित होकर कराह रही हैं। तमाम प्रयास के बाद पड़ोसी ने पैरासीटामाल की दो गोलियां दीं। बुधवार को तमाम प्रयास के बाद भी उन्हें दर्द की गोली नहीं मिली। सलोरी की सविता, राजापुर के संजय, गंगा नगर के राजेश का भी यही हाल है। बदलते मौसम में बाढ़ के साथ सर्दी,जुकाम और बुखार परेशान कर रहा है। बाढ़ और बारिश के कारण वह दवा लेने भी नहीं जा पा रहे हैं। जिला संक्रामक रोग प्रभारी डॉ. एएन मिश्रा के मुताबिक बाढ़ पीड़ितों के लिए दवाओं का इंतजाम है। राहत केंद्रों पर व्यवस्था की गई है। प्रभावित इलाकों में नोडल अफसरों को दवाएं और एंटी फंगल क्रीम, ओआरएस आदि वितरण के लिए दिए गए हैं। 
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 नगर निगम ने बुधवार से बाढ़ प्रभावित मोहल्लों में प्रतिदिन शाम पांच बजे फागिंग कराएगा। साथ ही सभी मोहल्लों में अभियान चलाकर सफाई और कीटनाशक छिड़काव के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए पांच टीमेें गठित की गई हैं। प्रभारी नगर आयुक्त अमरेंद्र वर्मा ने बुधवार को अफसरों की बैठक में निर्देश दिए। पांच टीमों में वरिष्ठ अफसरों को नामित कर निगरानी व्यवस्था में लगाया गया है। ये अफसर पेयजल, सचल शौचालय, सफाई, वाहनों की उपलब्धता, मार्ग प्रकाश, कीटनाशक का छिड़काव के साथ बाढ़ राहत केंद्रों की सफाई व्यवस्था के साथ फागिंग कराना सुनिश्चित कराएंगे। सभी जोनल अफसर अपने-अपने क्षेत्रों में सफाई के साथ अन्य कार्यों का संपादन कराएंगे।
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