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UP: घटता जलस्तर छोड़ रहा बर्बादी के निशान...70 हजार बेघर; फसल के साथ दो हजार से अधिक घरों में नुकसान का अनुमान

Thu, 07 Aug 2025 01:29 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रयागराज में गंगा-यमुना के जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। हालांकि घटता जलस्तर बर्बादी के निशान छोड़ रहा है। दो हजार से अधिक घरों में नुकसान का अनुमान है। 21 शिविरों में 9368 लोग शरण लिए हैं, कोई रिश्तेदार तो कोई किराये पर रह रहा है। 
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Prayagraj flood - फोटो : अमर उजाला
प्रयागराज में गंगा-यमुना का घटता जलस्तर बर्बादी के निशान छोड़ रहा है। बाढ़ की चपेट में आई करीब पांच लाख की आबादी की दुश्वारियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हालात यह है कि लोगों के सामने भोजन-पानी का संकट खड़ा होने लगा है। करीब 65 से 70 हजार लोगों के बेघर होने व छह दिनों से पानी में डूबे दो हजार से अधिक घरों में नुकसान की आशंका जताई जा रही है। साथ ही कृषि विभाग के अनुसार दो हजार से अधिक हेक्टेयर में धान की फसल और सब्जियों के नुकसान का अनुमान है।

 
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अशोक नगर नेवादा इलाके में बाढ़ का पानी कम हो रहा है। - फोटो : अमर उजाला
गुरुवार सुबह को गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 84.19 और यमुना का नैनी में 84.08 मीटर रहा। सोमवार से नदियों में पानी कम होना शुरू हुआ है। बुधवार को फाफामऊ में 40 सेमी और नैनी में 21 सेमी जलस्तर कम हुआ है।
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अशोक नगर नेवादा इलाके में बाढ़ का पानी कम होने के बावजूद अभी भी हजारों मकान इसकी चपेट में है। - फोटो : अमर उजाला
बाढ़ से शहर के तकरीबन 60 मोहल्ले और जिले के करीब 290 गांव अब भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। जिले के 21 राहत शिविरों में करीब 9368 लोग शरण लिए हैं। इसके अलावा कुछ लोग रिश्तेदार तो कुछ किराये पर कमरा लेकर रह रहे हैं।

 

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गंगा के जलस्तर में कमी के बाद नेवादा में लोगों को आने जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन ने 330 नावें और 29 मोटर बोट लगाई हैं। जिले के 133 गांवों-मोहल्लों में 300 नावों और मोटरबोट का संचालन किया जा रहा है। शहर से गांव तक करीब 68 गांवों का संपर्क अब भी कटा है।

 
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राजापुर गंगानगर इलाके में बाढ़ के पानी में कमी के बावजूद अभी भी खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है - फोटो : अमर उजाला
बाढ़ में फंसे लोगों के सामने पानी, दूध, एलपीजी की समस्या के साथ ही अब गंदगी और संक्रामक बीमारियां मुसीबत बन रही हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के 630 जवानों को बचाव कार्य में लगाया गया है।
 
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लेटे हनुमान मंदिर बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूबा। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी से गर्भगृह भी जलमग्न हो - फोटो : सोशल मीडिया
डीएम मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि मकानों की क्षति का आकलन कराया जा रहा हैं। गंगा, यमुना के जलस्तर में तेजी से कमी आ रही है। पानी उतरते ही सफाई के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश नगर आयुक्त को दिया गया है। बाढ़ के दौरान शहर से ग्रामीण अंचल में करीब 100 से अधिक सड़कें व पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त हुई हैं।
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पानी में डूबा मौज गिरी घाट और हेलीकॉप्टर व्यू - फोटो : सोशल मीडिया
बाढ़ की भेंट चढ़ीं दो हजार हेक्टेयर से ज्यादा में बोई गईं फसलें
कृषि विभाग के अनुसार गंगा, यमुना की बाढ़ में दो हजार से अधिक हेक्टेयर में बोई गईं धान और सब्जी की फसलों को नुकसान होने का अनुमान है। जब भी बाढ़ आती है तो किसानों की फसलें चौपट हो जाती हैं। इस बार बाढ़ की चपेट में करीब 290 गांव हैं। ऐसे में दो हजार से ज्यादा किसानों द्वारा बोई गईं फसलें बर्बाद होने का अनुमान है। उधर डीएम ने जिले की सभी तहसीलों में किसानों की फसलों की क्षति के आकलन के लिए टीमें गठित कर दी हैं।

 

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Prayagraj Flood : प्रयागराज में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
जिले में गंगा, यमुना दो मुख्य नदियां हैं। इसके अलावा टोंस, बेलन, वरुणा, मनसैता, ससुरखदेरी आदि नदियां हैं। बाढ़ की समस्या मुख्यत: गंगा और यमुना के कारण आती है। इन नदियों में अन्य सहायक नदियों से पानी आ जाने से जलस्तर में सामान्य से अधिक तेजी से वृद्धि होती है जिससे बाढ़ आती है।

 

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दारागंज इलाके में बाढ़ के पानी में डूबे निचले इलाके के मकान - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 1978 में 1075 गांव हुए थे प्रभावित, 78 करोड़ की फसलें हुई थीं बर्बाद
प्रयागराज। वर्ष 1978 में आई बाढ़ में 1075 गांव प्रभावित हुए थे और करीब 1,24,412 हेक्टेयर में बोई गईं फसलों को नुकसान हुआ था। 5023 भवन भी क्षतिग्रस्त हुए थे। उस समय कुल अनुमानित क्षति 78 करोड़ 21 लाख रुपये आंकी गई थी। वर्ष 2013 में 233 गांव और 59 मोहल्ले बाढ़ से प्रभावित हुए थे। करीब आठ हजार हेक्टेयर में बोई गईं फसलें नष्ट हो गई थीं।

 

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प्रयागराज में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
जिले के सभी तहसीलों में किसानों की धान व सब्जियों की फसलें बर्बाद हुई हैं। टीमें गठित कर क्षति का आकलन कराने का निर्देश सभी एसडीएम को दिया गया है। कितने हेक्टेयर में बोई गईं फसलें बर्बाद हुई हैं यह आकलन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।- मनीष कुमार वर्मा, डीएम
 

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गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। - फोटो : अमर उजाला।
बाढ़ से 200 से अधिक सड़कों को भारी नुकसान
प्रयागराज जिले में आई बाढ़ ने न केवल ग्रामीण इलाकों को प्रभावित किया, बल्कि लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, जिला पंचायत की सड़कों और पुल-पुलिया को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक 200 से अधिक सड़कें और कई पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई हैं। 60 के करीब रास्तों पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है।
 

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प्रयागराज में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
डीएम ने लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, जिला पंचायत के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बाढ़ का पानी उतरते ही प्राथमिकता के आधार पर सभी क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों का भौतिक सत्यापन करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक तहसील और ब्लॉक स्तर पर सड़कों की सूची तैयार कर तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए ताकि मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए धन की व्यवस्था की जा सके।

 

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प्रयागराज में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
बाढ़ से अधिकांश संपर्क मार्गों पर गड्ढे हो गए हैं। कई स्थानों पर सड़कें बह गई हैं और पुल-पुलिया की नींव तक उखड़ गई है। कुछ स्थानों पर तो यातायात पूरी तरह से बंद है जिससे गांवों का मुख्य बाजार और तहसील से संपर्क टूट गया है।
 

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प्रयागराज में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
शहर के कई मोहल्लों में जलभराव की वजह से सड़कों की सतह उखड़ गई है। विशेषकर अल्लापुर, नैनी, सलोरी, करेली, झूंसी और बघाड़ा क्षेत्र की सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ने बताया कि क्षतिग्रस्त सड़कों का सर्वे कराया जा रहा है।

 

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छोटा बघाड़ा क्षेत्र में बाढ़ का पानी घर में घुस जाने के बाद सामान समेटकर कर जाते लोग - फोटो : अमर उजाला
जहां मरम्मत की आवश्यकता है, वहां की स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके आधार पर शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा ताकि बजट की व्यवस्था हो सके और मरम्मत कार्य समय पर शुरू हो सके।

 
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प्रयागराज में बाढ़। - फोटो : अमर उजाला।
पीडब्लूडी समेत अन्य विभागों को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुईं सड़कों को जल्द ठीक कराने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं पर पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई हो या कहीं पर गड्ढ़ा हो गया हो तो वहां पर साइनेज लगाए जाने के निर्देश दिए गए हैं।- मनीष कुमार वर्मा, डीएम
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