पर्यटन की अनंत संभावनाओं वाले प्रयागराज के पर्यटन विकास के लिए जरूरी है कि हम इसकी खूबियों को पहले खुद बेहतर तरीके से जाने, समझें और फिर अपने मित्रों, करीबियों, रिश्तेदारों आदि को भी उससे परिचित कराएं। तभी लोगों में यहां के महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों सहित साहित्यिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक धरोहरों को करीब से देखने, जानने, समझने की ललक पैदा होगी। लोग उन स्थलों पर जाना और उससे जुड़ना चाहेंगे।
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- फोटो : प्रयागराज
सरकार की ओर से चलाई जा रही अनेक योजनाओं से इतर अपनी धरोहरों के प्रति रुचि लेते हुए उनके विकास के लिए निजी स्तर पर भी पर्याप्त प्रयास होने चाहिए। इससे जनजुड़ाव बढ़ेगा। यहां न सिर्फ धार्मिक बल्कि ऐतिहासिक, साहित्यिक-सांस्कृतिक, जलीय पर्यटन एवं मेडिकल पर्यटन की भी अनेक संभावनाएं हैं। हमें ऐसी सभी संभावनाओं की पड़ताल करते हुए उनके विकास और लोगों को उनसे जोड़ने के लिए सजग और सक्रिय रहना होगा।
ऐसे ही अनेक संकल्पों के साथ युवा उद्यमियों, प्रतियोगी छात्रों, शिक्षक-प्रधानाचार्य, लेखक, समाजसेवी, प्रशिक्षक के साथ ही डॉक्टर, इंजीनियर ने भी शनिवार को ‘अमर उजाला’ दफ्तर में जुटे। उन्होंने ‘पर्यटन के नक्शे पर प्रयागराज की संभावनाएं’ विषयक ‘यूथ कान्क्लेव ए यंग एंटरप्रेन्योर मीट’ में शिरकत करते हुए मुखर होकर समस्याएं गिनाईं तो समाधान की राह भी सुझाई।
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रचनाओं के माध्यम से हों रेखांकित पर्यटन की खूबियां
जिस तरह से अन्य साहित्य में मेट्रो सिटीज की हलचलों को शामिल किया जा रहा है, उसी तरह से हम अपने शहर की विरासत, उसकी खूबियों को रचनाओं की विषयवस्तु नहीं बना रहे। रचनाओं के माध्यम से प्रयागराज को पर्यटन की दृष्टि से एक समृद्ध शहर के तौर पर प्रस्तुत करने की जरूरत है। प्रयागराज के दिल को लोगों तक पहुंचाना है। सोशल मीडिया से जुड़े लोग एजुकेशनल हब सहित इसकी अन्य खूबियों को भी प्रचारित प्रसारित करें ताकि यहां के प्रति लोगों की रुचि बढ़े। सुरक्षा के साथ महिलाओं के लिए ‘सोलो ट्रिप’ सुलभ हो। कला से जुड़े छात्र-शिक्षक शहर की बाकी दीवारों पर भी प्रयागराज से जुड़ी कथाएं चित्रित करें। लीमा धर, युवा लेखिका, उपन्यासकार
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प्रमुख पर्यटन स्थलों पर संभव हो बेरोकटोक आना और जाना
अकबर के किले सहित शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बेरोकटोक आने-जाने की सुविधा मिलनी चाहिए ताकि लोग उन विरासतों के बारे में सिर्फ किताबों तक ही सीमित न रहें, बल्कि करीब से देख सकें। सरकार और शहरियों दोनों की जिम्मेदारी है कि वे बाहर से आने वाले लोगों को महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूक कर सकें। प्रिया मिश्रा, नीट की प्रतियोगी
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सिर्फ धार्मिक नहीं अन्य दृष्टियों से भी हो प्रचार
प्रयागराज को अब तक सिर्फ धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में ही प्रचारित किया जाता रहा है जबकि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक दृष्टियों से भी इसकी खूबियों को प्रचारित-प्रसारित किया जाना चाहिए। मनोरंजन की दृष्टि से विकसित किए जाने सहित शहर को ग्रीन सिटी बनाने की मुहिम भी चले ताकि बाहर से आने वालों को शहर साफ-सुथरा दिखे। पर्यटन स्थलों के पास तक जाने के लिए उचित साधन भी उपलब्ध हो। -शालू पांडेय, प्रिंसिपल, एसेस इंटरनेशनल स्कूल
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प्रयागराज के पर्यटन स्थलों की हो सुनियोजित रूप में मार्केटिंग
प्रयागराज के पर्यटन स्थलों की मार्केटिंग नहीं की जा रही है। पर्यटन को सुनियोजित तरीके से प्रचारित करना होगा। कुंभ के दौरान चर्चा में आए ‘रिवर रूट’ प्रोजेक्ट की पड़ताल करके उसे शुरू कराया जाना चाहिए। इससे वाराणसी तक आने वाले पर्यटक यहां भी आएंगे और उन्हें जलमार्ग का आनंद मिलेगा। घाटों की सफाई और उनका सौंदर्यीकरण भी बहुत जरूरी है। इससे श्रद्धालुओं से इतर भी लोगों का संगम के लिए आकर्षण बढ़ेगा। संगम क्षेत्र में ड्रोन का एयर शो भी किया जा सकता है। प्रमुख स्थलों से जुड़े हेरिटेज वीडियो बनाकर उन्हें वायरल किया जाना चाहिए। इससे लोगों में यहां के पर्यटन के प्रति रुचि बढ़ेगी। शिवेश गौड़, निदेशक, एंपाइरियन रोबोटिक्स, युवा उद्यमी, ड्रोन निर्माता
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कचरे का सुनियोजित ढंग से हो निस्तारण, रहे सफाई
शहर में कचरे का सुनियोजित ढंग से निस्तारण नहीं होता है, इससे शहर साफ-सुथरा नहीं दिखता। इस बारे में मुहिम चलाए जाने की जरूरत है। शहर के पर्यटन स्थलों के विकास सहित वहां पर सुरक्षा सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध होनी चाहिए ताकि लोगों की उन पर्यटन स्थलों के प्रति रुचि बढ़े।
डॉ.जितेंद्र सिंह, नेत्ररोग विशेषज्ञ, एमडीआई हास्पिटल
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नागरिक सुविधाओं की नियमित पड़ताल, रखरखाव बेहद जरूरी
शहर के पर्यटन की संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है कि शहर को भी बेहतर बनाए रखें। कुंभ के दौरान शहर का जबर्दस्त विकास हुआ लेकिन उन सभी सुविधाओं का उचित रखरखाव नहीं हो रहा है। चाहे बिजली का मामला हो या फिर सड़कों का। प्रयागराज में भी सरकार की योजनाएं जल्द पहुंचें और उन पर काम हो ताकि लोगों को उसका त्वरित लाभ मिल सके। औन जैदी, युवा उद्यमी, लॉ पब्लिशर
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कुंभ मेले के दौरान ही नहीं संगम पर पूरे वर्ष हों लेजर शो
यह हैरत की बात लेकिन सच है कि अब भी बाहर के तमाम लोग प्रयागराज के प्रमुख पर्यटन स्थलों या यहां की खूबियों, विरासतों के बारे में नहीं जानते। संगम और आनंद भवन के महत्व से उन्हें परिचित कराना होगा। कुंभ मेले के दौरान संगम पर शुरू किए गए लेजर शो पूरे वर्ष होने चाहिए। यमुना में वाटर स्पोर्टर्स या फि र यमुना की लहरों पर नौका विहार तथा रात्रि विश्राम जैसी पहल और प्रयोग भी होने चाहिए, जिससे पर्यटक आकर्षित हो सकेंगे। आदित्य खरबंदा, युवा उद्यमी, ऑटोमोबाइल
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पर्यटन स्थलों के बारे में जरूरी है जानकारी के साथ जागरुकता
सबसे बड़ी बात कि लोगों में यहां के पर्यटन स्थलों के बारे में ज्यादा जानकारी और जागरुकता नहीं है। प्रयागराज का नाम जहां पर्यटन की दृष्टि से चर्चित होना चाहिए, वहीं इसका नाम शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से ही चर्चित है। लोगों को बताना होगा कि संगम सिर्फ दो नदियों का मिलन या फिर आनंद भवन सिर्फ इमारत ही नहीं है। विरासतों के बारे में लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए। राहुल सिंह, शिक्षक
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मनीषियों की स्मृतियों को संजोएं संवारें, साथ ही प्रचारित भी करें
पौराणिक एवं साहित्यिक संदर्भों में इलाहाबाद बहुत चर्चित है। लेकिन, जरूरत है कि हम यहां की खूबियों से पहले स्वयं बखूबी परिचित हों और फिर लोगों को उसे देखने के लिए कहें। नैनी को औद्योगिक, झूंसी को धार्मिक-ऐतिहासिक और झलवा को एजुकेशनल हब के तौर पर प्रचारित करने की जरूरत है। मनीषियों की स्मृतियों को संजोकर और उनसे जुड़े स्थलों को संवारें। सरस्वती पार्क, मदन मोहन मालवीय उद्यान आदि के सौंदर्यीकरण सहित शहर के तमाम पुराने पार्कों को उनके मौलिक स्वरूप में संरक्षित और विकसित किया जाना चाहिए। शरदेंदु सौरभ, तालाब संरक्षण मुहिम से जुड़े
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पर्यटन स्थलों तक जाने के लिए हों निश्चित साधन, तय हो किराया
कुंभ के दौरान होने वाले काम और मिलने वाली सुविधाएं पूरे वर्ष जारी रहें। इससे पर्यटकों के आने का क्रम पूरे वर्ष बना रहेगा। बेहतर यातायात संचालन के साथ ही पर्यटन स्थलों तक जाने के लिए साधन हों और उनका किराया निश्चित हो। पर्यटन विभाग की ओर से ऐसी योजनाएं संचालित की जाएं जिनमें जनसहभागिता हो। सोमनाथ विद्यार्थी, चीफ इंस्ट्रक्टर, इंडियन स्कूल ऑफ मार्शल आर्ट्स
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मेडिकल टूरिज्म के तौर पर भी विकसित किए जाने की जरूरत
प्रयागराज को मेडिकल टूरिज्म के तौर पर भी विकसित किया जाना चाहिए। साथ ही स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा मिले। पर्यटन विभाग की ओर से प्रयागदर्शन के नाम से योजनाएं चलाई जानी चाहिए ताकि बाहर से आने वाले सुगमतापूर्वक शहर के खास-खास पर्यटन स्थलों को घूम सकें और उसके बारे में ज्यादा से ज्यादा जान सकें। पर्यटन विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया जाना चाहिए ताकि पास-पड़ोस ही नहीं देश भर से लोग आएं। डॉ.संतोष सिंह, जनरल ऐंड लेप्रोस्कोपिक, सर्जन, एसआरएन अस्पताल
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पर्यटन विकास के लिए जनसहभागिता जरूरी
लोगों को इस धारणा से बाहर निकलना होगा कि पर्यटन के विकास की जिम्मेदारी सिर्फ विभाग पर ही है, शहरी भी इस पहल से जुड़ें। बड़े उद्यमियों को पर्यटन विकास या फिर वाटर स्पोर्टर्स की दिशा में योगदान देना होगा। निजी स्तरों पर पहल के बिना एडवेंचर टूरिज्म संभव नहीं है। प्रयाग या द्वादश माधव परिक्रमा आरंभ की गई थी, अब शहरियों की जिम्मेदारी है कि वे इसकी निरंतरता बनाए रखें। अपने मित्रों, परिचितों, रिश्तेदारों को किसी पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी देते हुए इस आग्रह के साथ अनुरोध करें कि अमुक स्थल नहीं देखा तो प्रयागराज नहीं देखा। फिलहाल हेली सेवा और संगम पर रोप वे जैसी कई योजनाएं पूरी होनी हैं। दिनेश कुमार, उप निदेशक, पर्यटन
यूथ कान्क्लेव में शामिल विभिन्न वर्गों से जुड़े युवाओं ने कहा कि हमें लोगों को बारी-बारी से शृंखलाबद्ध रूप में पर्यटन स्थलों से जोड़ने की पहल करनी होगी। जरूरी है कि हम यहां आने वाले अपने लोगों से पूछें कि उन्होंने क्या-क्या देखा और फिर उन्हें नए पर्यटन स्थल के बारे में यह कहकर जानकारी दें कि इसे नहीं देखा तो प्रयागराज नहीं देखा। इस तरह से ज्यादा से ज्यादा लोगों को पर्यटन स्थलों से जोड़ा जा सकेगा।
साझा हुए सुझाव
0 प्रयागराज पर्यटन विकास परिषद बने जो समय-समय पर पर्यटन विभाग के साथ ही शहरियों को भी पर्यटन विकास से संबंधित योजनाएं बनाते, सुझाते हुए उस पर अमल करने के लिए प्रेरित, प्रोत्साहित कर सके।
0 साहित्यिक विभूतियों जैसे निराला, पंत, महादेवी, बच्चन, फिराक आदि से जुड़े स्थलों को संरक्षित, विकसित और प्रचारित किया जाना चाहिए।
0 गंगा वाटर रैली सहित यमुना की प्रचुर जलराशि का उपयोग तरह-तरह के रोचक, रोमांचक वाटर स्पोर्टर्स के लिए किया जाना चाहिए, इससे आर्थिक और पर्यटन विकास होगा।
0 टूरिस्ट वॉक, संगम वॉक, हेरिटेज वॉक आदि को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि लोग इसके दायरे में आने वाले पर्यटन स्थलों से परिचित हो सकें।
0 कुंभ मेले के दौरान संगम और किले की दीवार पर लेजर शो के माध्यम से जिन पौराणिक प्रसंगों को दिखाया गया था, उन्हें मेले के बाद भी पूरे वर्ष संगम या भारद्वाज आश्रम के पास दिखाया जाना चाहिए।
0 कई वर्षों से रुके प्रयाग महोत्सव को फिर से आरंभ किया जाना चाहिए ताकि राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसके प्रचार-प्रसार के साथ ही सृजन के सरोकारों से जुड़ीं स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर और मंच मिल सके।