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ओमान से आई डेढ़ साल की बच्ची कोरोना संदिग्ध, दिखे लक्षण

Sat, 21 Mar 2020 10:45 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
ओमान से एक सप्ताह पहले यहां मां के साथ आई डेढ़ साल की बच्ची लक्षणों के आधार पर कोरोना संदिग्ध बनी है। शासन-प्रसाशन के तमाम दावों के बावजूद आइसोलेशन वार्ड में भर्ती तो दूर उसका परीक्षण भी नहीं किया गया। निजी चिकित्सक की सलाह पर एएसआरएन और बेली अस्पताल से मां संग गई बच्ची को बैरंग लौटा दिया गया। बच्ची की सेहत से परेशान स्वास्थ्य कर्मियों की लापरवाही से हैरान है। 

करछना इलाके में रहने वाली महिला बीमार पिता को देखने यहां आई हैं। 14 मार्च को ओमान से लखनऊ एयरपोर्ट पहुंची। वहां एक अस्पताल में भर्ती अपने पिता को देखने गईं। दुखद रहा कि 16 को उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। रोते कलपते परिजन यहां गांव आ गए। 
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
शुक्रवार को महिला संग आई उनकी डेढ़ वर्षीय बेटी असहज होने लगी। सर्दी-जुकाम और हल्के  बुखार के कारण चिंतित मां उसे लेकर सिविल लाइंस स्थित बच्चों के अस्पताल पहुंची। वहां परीक्षण के बाद डॉक्टर ने दवा तो दी लेकिन महिला को बच्ची की कोरोना जांच सरकारी अस्पताल में कराने की सलाह दी। डॉक्टर ने सीएमओ दफ्तर और एसआरएन प्रबंधन को भी मामले की जानकारी दी। 

शनिवार को महिला बच्ची को गोद में लिए एसआरएन के आइसोलेशन वार्ड पहुंची। महिला के मुताबिक वहां डॉक्टरों ने कहा कि यहां संक्रमित कोरोना पीड़ितों को भर्ती करने की व्यवस्था है। बच्ची को आप बेली अस्पताल में स्थापित कोरोना ओपीडी, वार्ड में ले जाएं। बेली पहुंची महिला को करीब दो घंटे टहलाने के बाद डॉक्टरों ने बिना परीक्षण, जांच के बैरंग लौटा दिया। 

भटकाव से परेशान महिला फिर निजी अस्पताल पहुंची। वहां उन्होंने बच्ची को भर्ती करने का अनुरोध किया। डॉक्टर ने परीक्षण कर दवाएं दीं फिर उन्हें घर भेज दिया। जीबीपी रक्त जांच की रिपोर्ट सामान्य रही सो उन्हें सलाह दी कि बच्ची को और खुद को भीड़ से अलग रखें।

किसी भी तरह की परेशानी हो तो प्रशासन की ओर से स्थापित कंट्रोल रूम पर खबर करें। वहीं दूसरी ओर एसआरएन अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में तैनात डॉ. अजीत के मुताबिक बच्ची की स्क्रीनिंग में कोरोना के लक्षण नहीं मिले हैं। महिला को बच्ची संग 14 दिन सेल्फ कोरंटाइन (अलग रहने) को कहा गया है। जरूरत पड़ी तो टीम भेजकर जांच कराई जाएगी।

हर तरफ लापरवाही से टूटा भ्रम

डेढ़ साल की बच्ची को गोद में लेकर एक से दूसरे अस्पताल भटक रही महिला ने कहा कि दावों से इतर स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बेहद चिंताजनक है। अस्पतालों में सिर्फ उन्हें टरकाया गया। स्क्रीनिंग और अन्य जांच के बारे में कहा गया कि जरूरत नहीं है, सिर्फ भीड़ से बचाव करें। दवाएं क्या दें, इस बारे में किसी ने नहीं बताया। यह स्थिति अफसोसजनक है। उन्होंने बताया कि शाम को सीएमओ दफ्तर फोन करने पर उनसे बच्ची का विवरण और फोन नंबर लिया गया है। 
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