बादलों की गरज-चमक के बीच माघ मेला के छठवें और अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर शुक्रवार को संगम समेत गंगा के दोनों तटों पर बने घाटों पर श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। भोर में बादलों के घिरने के बाद बारिश शुरू होने के बाद भी आस्था नहीं डिगी।
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संगम से रामघाट के बीच बने स्नान घाटों पर आस्थावानों की भीड़ दिन भर स्नान, अर्घ्य, दीपदान के साथ रेती पर शिवलिंग बनाकर पूजा, आरती करती रही। शाम तक मेला प्रशासन ने 5.50 लाख श्रद्धालुओं के संगम में डुबकी लगाने का अनुमान व्यक्त किया। इसी के साथ पौष पूर्णिमा से आरंभ माघ मेला पूरा हो गया। शिवालयों में भी रुद्राभिषेक के लिए शिवभक्तों का तांता लगा रहा।
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फाल्गुन शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी में ही महाशिवरात्रि पर्व के स्नान और पूजन का महत्व है। यह तिथि शुक्रवार की शाम पांच बजे के बाद आरंभ हुई लेकिन भोर से ही संगम पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने डुबकी के लिए चतुर्दशी का इंतजार नहीं किया। भोर से ही स्नान आरंभ हो गया। संगम समेत 10 स्नान घाटों पर श्रद्धालु डुबकी लगाने के साथ ही शिव और गंगा पूजन कर मनोकामना पूर्ति की अर्जी लगाते रहे।
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संगम पर रेत से शिवलिंग बनाकर दीपदान और आरती उतारी जा रही थी। उसी भीड़ में लोग जप, दान और ध्यान भी करते रहे। कोई बिछड़ रहा था तो कोई एनाउंसमेंट के बाद संगम टावर पर अपनों से मिलकर नेह के आंसुओं में भीग रहा था। संग की सक्युलेटिंग एरिया में संस्कारों के लिए भी जगह-जगह भीड़ लगी रही। कहीं मुंडन संस्कार तो कहीं उपनयन संस्कार के लिए वेदियों पर मंत्रोच्चार गूंज रहे थे।
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-5.50 लाख श्रद्धालुओं के महाशिवरात्रि पर्व पर संगम में डुबकी लगाने का अनुमान
-10 स्नान घाटों पर लगी महाशिवरात्रि पर्व की डुबकी
-08 मजिस्ट्रेटों के हवाले रही मेलाक्षेत्र की व्यवस्था
इस स्नान पर्व के बाद से ही पांटून पुलों से पीपे निकलने लगेंगे।
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आखिरी स्नान पर्व पर निकलीं संतों की टोलियां
माघ मेला के अंतिम स्नान पर्व पर तरह-तरह के वेश में साधु-संतों की टोलियां भी निकलीं। हालांकि मेला के सभी छह सेक्टरों में लगे संतों से शिविर समेटे जा चुके हैं, लेकिन महाशिवरात्रि स्नान के लिए कुछ संत ठहरे रहे। इनमें कुछ अघोरी तो कुछ बैरागी, संन्यासी और वैष्णव परंपरा के त्रिपुंडधारी संत मेले में आकर्षण का केंद्र बने रहे।
घाटों पर जलपुलिस, मेला क्षेत्र में आठ मजिस्ट्रेट रहे मुस्तैद
प्रयागराज। आखिरी स्नान पर्व पर संगम समेत पूरे मेला क्षेत्र की जिम्मेदारी आठ मजिस्ट्रेटों ने संभाली। 10 स्नान घाटों पर जेटी के साथ ही गोताखोर भी लगाए गए थे, ताकि दूर-दराज इलाकों से आने वाले श्रद्धालु गहरे पानी में न जाने पाएं।
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स्नान के बाद महिलाओं ने संगम तट पर पूजा अर्चना की।
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महाशिवरात्रि स्नान पर संगम पर सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक बंदोबस्त किया गया था।
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महाशिवरात्रि पर स्नान करने के लिए विदेशी श्रद्धालु भी पहुंचे।
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महाशिवरात्रि पर जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने भी पत्नी संग संगम तट पहुंचकर पूजा-अर्चना की।