महाशिवरात्रि पर सुख-समृद्धि-सफलता का महायोग बन रहा है। धनिष्ठा नक्षत्र के साथ परिघ योग में मकर राशि पर चंद्रमा गोचर करेंगे। संगम में आखिरी डुबकी का विशेष फल मिलेगा।
महाशिवरात्रि पर इस बार ग्रहों के मिलन से सुख-समृद्धि और सफलता का महायोग बन रहा है। धनिष्ठा नक्षत्र और परिघ योग में महाशिवरात्रि की आराधना हर तरह की कामनाओं को पूरी करने वाली होगी। मकर राशि पर शीतलता के प्रतीक चंद्रमा के विराजमान होने से भय और चिंता हरण के भी योग बनेंगे।
ऐसे में शिवरात्रि पर संगम में पुण्य की आखिरी डुबकी विशेष फलदायी होगी। पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 26 फरवरी की सुबह 11:08 बजे होगी। यह तिथि 27 फरवरी की सुबह 8:54 बजे तक रहेगी।
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पंचांगं के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है
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महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा-आरती का विशेष महत्व
ऐसे में थोड़े से उपायों से भी तीनों लोक के स्वामी भगवान शिव को भक्त प्रसन्न कर सकते हैं। महाशिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा-आरती का विशेष महत्व है। प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव की विशेष उपासना होगी। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान शिव की पूजा-आरती करनी चाहिए।
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Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक का महत्व
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'महाशिवरात्रि इस बार धनिष्ठा नक्षत्र और परिघ योग में'
चार प्रहर की आराधना से धन, यश, प्रतिष्ठा और समृद्धि की प्राप्ति के योग हैं। जिनके जीवन में संतान संबंधी बाधा हो, उन्हें भी यह शिव आराधना अवश्य करनी चाहिए। वह बताते हैं कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की महाशिवरात्रि इस बार धनिष्ठा नक्षत्र और परिघ योग में आ रही है। शकुनी करण के साथ मकर राशि पर चंद्रमा गोचर करते रहेंगे है। इस दिन चार प्रहर की आराधना से शिव की विशेष कृपा प्राप्त होगी।
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भय और चिंता से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप
ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र बताते हैं कि महाशिवरात्रि पर शिव पूजा करते समय में अपनी मनोकामना के अनुसार मंत्र जप करना चाहिए। इस मंत्र के जप से अनजाना भय और चिंता दूर होती है। महामृत्युंजय मंत्र की वजह से शिव जी की विशेष कृपा मिलती है, जिससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
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चार प्रहर की पूजा -आरती का मुहूर्त
प्रथम प्रहर: शाम 06:19 बजे से रात्रि 09:26 बजे तक
द्वितीय प्रहर : रात 09:26 बजे से मध्यरात्रि 12:34 बजे तक
तृतीय प्रहर: मध्यरात्रि 12:34 बजे से 27 फरवरी , प्रातः 03:41 बजे तक
चतुर्थ प्रहर: 27 फरवरी सुबह 03:41 बजे से प्रातः 06:48 बजे तक
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मनकामेश्वर में रात भर होगा अभिषेक, चार प्रहर की आरती
महाशिवरात्रि पर तीनों लोक के स्वामी महादेव के दरबारों को सजाने का सिलसिला आरंभ हो गया है। शिव मंदिरों में मन मोहन झांकियां सजाई जा रही हैं। सरस्वती घाट स्थित मनकामेश्वर महादेव का रजत शृंगार किया जाएगा। कामनापूर्ति के इस महातीर्थ को भांति-भांति के फूलों से सजाया जा रहा है। महाशिवरात्रि की रात चार प्रहर अभिषेक और आरती होगी। मंदिर में दो पुरुषों और दो महिलाओं की चार कतारें लगेंगी।
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सुरक्षा के लिहाज से बैरिकेडिंग कर दी गई है। मनकामेश्वर मंदिर में शिव भक्तों के दर्शन पूजन की सुगम व्यवस्था के लिए अफसरों ने होमवर्क कर लिया है। बैरहना से सरस्वती घाट जाने वाले रास्ते पर चार लेन में बैरिकेडिंग की गई है। अफसरों ने मंदिर के प्रधान पुजारी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी के साथ सुरक्षा इंतजामों पर मंथन किया।
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सोमेश्वर-तक्षकेश्वर से पंडिला महादेव तक तांता
श्रीधरानंद के मुताबिक महाशिवरात्रि पर 26 फरवरी की भोर में चार बजे शृंगार आरती के बाद मंदिर के पट खुलेंगे। 4:30 बजे से आम भक्तों का प्रवेश आरंभ होगा। दिन के 11:45 बजे भोग आरती होगी। इसके बाद 12:05 बजे फिर मंदिर खोला जाएगा। रात 10 बजे शृंगार आरती होगी। इस दौरान रजत आभूषणों और फूलों से शृंगार झांकी सजाई जाएगी। रात 11 बजे से पूरी रात चार प्रहर अभिषेक और आरती की जाएगी।
महाशिवरात्रि पर शिव मंदिरों में सजेंगी झांकियां
इसी तरह सोमेश्वर महादेव में भी मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों और झालरों से सजाया जा रहा है। वहां भी भोर में चार बजे मंगला आरती के साथ पट खुल जाएंगे। पुजारी राजेंद्र पुरी के मुताबिक मंदिर परिसर में यज्ञ और विशेष अनुष्ठान भी होते रहेंगे। तक्षकेश्वर महादेव, नाकवासुकि, पंडिला महादेव और भरद्वाजेश्वर महादेव में भी विशेष शृंगार झांकियां सजाई जाएंगी।