फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नरेंद्र गिरि:...जब महंत के खिलाफ धरने पर बैठ गए थे आईजी, तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने की थी ये बड़ी कार्रवाई

Tue, 21 Sep 2021 11:53 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
विज्ञापन
1 of 7
नरेंद्र गिरि (फाइल फोटो) - फोटो : amarujala
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि सोमवार को संदिग्ध हालत में फांसी पर लटके मिले। बांघबरी मठ स्थित एक कमरे में उनका शव फंदे पर लटका मिला। मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें अपमान से आहत होकर कदम उठाने समेत अन्य बातें लिखी हैं। पुलिस अफसर इसे खुदकुशी बता रहे हैं लेकिन बहुत से सवाल हैं जिनका जवाब मिलना अभी बाकी है। अफसर देर रात तक जांच पड़ताल में जुटे रहे। आइए जानते हैं, नरेंद्र गिरि और तत्कालीन आईजी इलाहाबाद आरएन सिंह के विवाद के बारे में। 

जब नरेंद्र गिरि के खिलाफ आईजी बैठ गए थे धरने पर 
बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि 2004 में मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद धीरे-धीरे प्रभावशाली होने लगे थे। इसी समय मठ की बेशकीमती जमीनों की खरीद फरोख्त का भी काम शुरू हो गया था। तत्कालीन आईजी इलाहाबाद आरएन सिंह के किसी करीबी का विवाद नरेंद्र गिरि से हो गया। विवाद का कारण जमीन की खरीद फरोख्त था। 
 
विज्ञापन

2 of 7
नरेंद्र गिरि (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
मुलायम सिंह से सीधे संबंध के कारण स्थानीय पुलिस नरेंद्र गिरी के खिलाफ किसी कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। आईजी इतना परेशान हो गए कि वह हनुमान मंदिर के पास महावीर मार्ग पर धरने पर बैठ गए। आईजी के धरने पर बैठने की खबर से सरकार की खूब फजीहत हुई। 


विज्ञापन

3 of 7
नरेंद्र गिरि का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
एसएसपी समेत तमाम अधिकारी धरना स्थल पर पहुंचे और मिन्नतें कीं, हाथ पैर जोड़े लेकिन आईजी टस से मस नहीं हुए थे। नरेंद्र गिरी ने इसकी शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह से की तो वह भी आईजी पर काफी नाराज हुए। उन्होंने आईजी आरएन सिंह को सस्पेंड कर दिया। तब जाकर यह विवाद शांत हुआ। 
 

4 of 7
नरेंद्र गिरि (फाइल फोटो) - फोटो : prayagraj
आपको बता दें कि मूलरूप से प्रयागराज के ही हंडिया के रहने वाले तकरीबन साठ वर्षीय महंत नरेंद्र गिरि का बीस वर्ष की उम्र में एक साधु के तौर पर पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी से नाता जुड़ा था। वह हरिद्वार के कुंभ मेले में ही पहली बार महात्मा और फिर अखाड़े की परंपरा के अनुसार नागा संन्यासी बने। इसके बाद वह बतौर सेवादार राजस्थान के खीरम स्थित अखाड़े के आश्रम में रहे। 
विज्ञापन

5 of 7
बाघंबरी मठ में जुटी भीड़ और पुलिस अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 1998 में हरिद्वार में ही वह अखाड़े के अष्टकौशल में कारबारी यानी उप महंत के रूप चुने गए। फिर वर्ष 2001 में वह अष्टकौशल के श्रीमहंत बने। मठ बाघंबरी गद्दी के महंत भगवान गिरि के नहीं रहने पर उन्हें उनका उत्तराधिकारी घोषित करते हुए वर्ष 2004 में मठ का महंत बनाया गया। 
विज्ञापन

6 of 7
narendra giri suicide case - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2015 में उज्जैन कुंभ के दौरान अखाड़े की ओर से पहले उन्हें सचिव बनाया गया और फिर उज्जैन कुंभ में ही वह अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष बने।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
शव ले जाती एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला
निरंजनी अखाड़े के हरिद्वार के सचिव महंत रविंद्रपुरी के मुताबिक अखाड़े के चार सचिवों में से महंत नरेंद्र गिरि अखाड़े के प्रयागराज के सचिव थे। प्रयागराज के दूसरे सचिव महंत ओंकार गिरि हैं। वहीं निरंजनी अखाड़े के हरिद्वार के दूसरे सचिव महंत रामरतन गिरि हैं।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें