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Mahakumbh 2025: अघोर पंथ के कुछ ऐसे रहस्य जो सोचने पर करते हैं मजबूर, क्या महिलाओं का इस पंथ में है कोई स्थान?

सार

अघोरी की दुनिया रहस्य और तंत्र से भरी हुई होती है, जबकि अघोर को संसार का सबसे सात्विक पंत माना गया है। भैरव और भैरवी की साधना करने वाले अघोरी तंत्र की दुनिया आपको चौंका देती है। सिद्धियां पाने की उनकी भूख कभी खत्म नहीं होती। ये एक ऐसी प्रक्रिया है जो उनके शरीर त्यागने का बाद ही मुक्त करती है। 
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महाकुंभ 2025 - फोटो : AI
हनुमान चालीसा में एक लाइन है, ''अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता असवर दीन जानकी माता'' कहने का तात्पर्य है कि भगवान हनुमान दुनिया में एक मात्र ऐसे हैं जिन्हें अष्ट सिद्धी प्राप्त हैं। यह उन्हें माता सीता द्वारा प्रदान की गईं थीं। यह सिद्धियां अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व हैं। वैसे तो अघोरी भगवान शिव द्वारा स्थापित माना जाने वाला एक रहस्यमयी साधना पंथ है और इनमें जो साधना की जाती है उनमें इन अष्ट सिद्धियों को प्राप्त करने का भी प्रयास होता है। मन में सवाल था कि क्या महिलाएं भी इस पंथ का हिस्सा होती है? 
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महिला अघोरी - फोटो : अमर उजाला
अघोर पंथ को समझने और उससे जुड़े रहस्यों को जानने के लिए काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी से संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि वैसे तो भगवान शिव को दुनिया का पहला अघोरी माना जाता है। लेकिन जब व्यक्तियों की बात की जाए तो सबसे पहले अघोरियों के रूप में बाबा किनाराम की पूजा की जाती है। वैसे अघोर साधना का सीधा संबंध पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के हिंगलाज देवी मंदिर से है। हिंगलाज भवानी इनकी प्रथम आध्या शक्ति हैं। हिंगुला शरीर के ऊपर के ब्रह्मरंध्र (सिर के ऊपरी हिस्से में स्थित एक छिद्र या मार्ग ) को कहा जाता है, जहां से साधु संत अपने प्राण छोड़कर मुक्ति प्राप्त करते हैं।
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महिला अखोरी - फोटो : AI
महिला अघोरी का क्या अस्तित्व होता है? 
इस पर उनका कहना था कि महिला अघोरी का कोई समावेश नहीं है। भगवान शिव के पांच रूपों को पंचवक्त्र या पंचमुखी कहा जाता है। इन पांचों रूपों का संयोजन ही पंचवक्त्र है। भगवान शिव के पांच मुखों को अघोर, सद्योजात, तत्पुरुष, वामदेव, और ईशान के नाम से जाना जाता है। उनका जो पांचवा वक्त्र है ''अघोर'' वो पार्वती रहित न होने के कारण वहां स्त्रीहीन माना जाता है। इस लिए अघोर पंथ में स्त्री का कोई स्थान नहीं है।
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महिला अघोरी - फोटो : AI
अघोरी महिलाएं महाकुंभ के मेले में नजर आती हैं उन्हें क्या कहा जाएगा?
महिला अघोरी का भैरवी चक्र न होने कारण वह छद्म अघोरी ही कहीं जाएंगी। तंत्र शास्त्र में उनकी शाश्वत सत्यता स्वीकार्य नहीं है। महाकाल संहिता में भी इनका कहीं पर जिक्र नहीं मिलता है। जो महिलाएं तंत्र साधना कर रही हैं वो उनका अपना निर्णय हो सकता है। वास्तिवक तंत्र साधना में इनका कोई अस्तित्व स्वीकार्य नहीं है। शिव के सद्योजात, तत्पुरुष, वामदेव, और ईशान रूप को लेकर वो साधना कर सकती हैं और इसे स्वीकार्य किया जाता है, पर अघोर पंथ में उनके अस्तित्व के प्रमाण नहीं है। साफ शब्दों में कहा जाए तो महिला अघोरी नहीं हो सकती है अगर हो सकती है तो बस छद्म अघोरी। 
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