Kumbh 2019
जिन चार स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरी थीं उनमें हरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन शामिल हैं। इन्हीं चार जगरों पर कुंभ का आयोजन होता है, लेकिन अर्द्धकुंभ का आयोजन सिर्फ हरिद्वार और प्रयागराज में होता है। टीकरमाफी आश्रम के संस्थापक स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज के अनुसार छह वर्षों में हरिद्वार तथा प्रयाग में कुंभ का कुछ योग बनता है लेकिन वह पूरा योग नहीं होता है। इसलिए इसको अर्द्धकुंभ कहते हैं। इसमें संपूर्ण देवताओं को आगमन नहीं होता है। अर्द्धकुंभ में सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति की ही प्रधानता होती है। अन्य देवता इसमें शामिल नहीं होते हैं। ऐसा मत्स्यपुराण में कहा गया है।