प्रयाग मेले में नागा साधुओं का मेला लगा हुआ है। स्थानीय लोगों के साथ जो श्रद्धालु बाहर से आ रहे हैं वो भी इन नागा साधुओं की ओर खिंचे चले आ रहे हैं। इन नागा साधुओं के अंदर बहुत से ऐसे रहस्य छुपे हुए हैं जिन्हें जानने के लिए हर कोई उत्सुक है। ऐसे में कहा जा सकता है कि इस कुंभ मेें नागा साधु आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। हम आपको इनके बारें में खास रहस्य बताने जा रहे हैं।
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Naga Sadhu
नागा साधु हमेशा नग्न अवस्था में रहते हैं। ये युद्ध कला में माहिर होते हैं। ये विभिन्न अखाड़ों में रहकर अपने गुरु से ज्ञान लेते रहते हैं। इस दौरान इन्हें कठिन तप से होकर गुजरना पड़ता है। इन्हें एकांत पसंद होता है जहां आसानी से भगवान का ध्यान किया जा सके।
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Naga Sadhu
किसी भी नागा साधु को लम्बे समय तक ब्रह्मचारी के रूप में रहना होता है, फिर उसे महापुरुष तथा फिर अवधूत बनाया जाता है। अन्तिम प्रक्रिया महाकुम्भ के दौरान होती है जिसमें उसका स्वयं का पिंडदान तथा दण्डी संस्कार आदि शामिल होता है।
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Naga Sadhu
यूं तो नागा संन्यासी जीवन भर कड़े नियम-व्रत का पालन करते हैं लेकिन, उनको खुद का श्रृंगार करना भी बेहद पसंद है। यह उनकी नागा परंपरा का ही एक हिस्सा है। इसमें 17 श्रृंगार का जिक्र है। नागाओं का जमावड़ा होने पर परंपरागत श्रृंगार करके ही ये उसमें शामिल होते हैं। खास तौर से शाही स्नान से पूर्व सभी नागा संन्यासी श्रृंगार के बाद गंगा में डुबकी लगाने जाते हैं।
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kumbh photo 2019
नागा परंपरा में धूने की भभूत सबसे पवित्र मानी जाती है। नागा साधुओं का जीवन इसी धूना के इर्द-गिर्द सिमटा होता है। इसके बगैर उनका डेरा कहीं नहीं जमता। धूना से निकली भभूति नागा संन्यासियों का पहला आभूषण होता है। भगवान शिव का प्रसाद मानकर नागा इसे पूरे शरीर पर मलते हैं। इसके अलावा नागा परंपरा में नख से शिख तक श्रृंगार का प्रचलन है।
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kumbh photo 2019
नागा साधुओं के मुताबिक भभूति, चंदन का लेप, जटा में पुष्प की माला एवं चंद्रमा, आंखों में काजल, माथे पर लाल रंग की रोली का लेप, रुद्राक्ष का बाजूबंद, कलाई में चांदी का कड़ा, गले में रुद्राक्ष की माला, रोली का त्रिपुंड, कमरपेटी की तरह फूलों की माला, पांव में चांदी का कड़ा, हाथों में चिमटा और डमरू। नागा इसे ही आभूषण मानते हैं।
इनको धारण करने के बाद ही नागाओं का श्रृंगार पूर्ण होता है। अमूमन नागा संन्यासी महाकुंभ में यही श्रृंगार करते हैं। शाही स्नान से पूर्व सभी नागा अपने-अपने अखाड़े में जुटते हैं और अपना यह श्रृंगार करते हैं।