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कुंभ 2019: कहीं संन्यासी बनने के लिए लगी है लाइन, कहीं इंतजार में अखाड़े

Fri, 08 Feb 2019 08:36 PM IST
shubham पंकज प्रसून, अमर उजाला, प्रयागराज
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Naga Sadhu
धर्म और अध्यात्म के महासंगम कुंभ नगरी में करोड़ों की भीड़ में बहुत कुछ ऐसा भी है, जिसे देखना अपने आप में अचंभित करने वाला है। कहने को तो सभी अखाड़ों की संस्कृति, धर्म और रीति-नीति में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है लेकिन वैभव के नजरिए से इनमें जमीन-आसमान का अंतर दिखाई पड़ रहा है।


 
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Niranjani Akhara Naga
कुंभ के दो शाही स्नान पूरे होने के बाद सभी 13 अखाड़ों में कुल मिलाकर करीब 40 हजार नए संन्यासी बनाए गए हैं। यदि सभी अखाड़ों में बनने वाले संन्यासियों की संख्या के हिसाब से देखा जाए तो 35 हजार संन्यासी अकेले तीन अखाड़ों में ही बने हैं। सबसे आगे जूना अखाड़ा फिर निरंजनी और महानिर्वाणी अखाड़ा है। बाकी 10 अखाड़ों में अलग-अलग संख्या के आधार पर सिर्फ पांच हजार नए संन्यासियों ने इस कुंभ में अभी तक दीक्षा ली है।
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New Naga Sadhu
अखाड़ों में संन्यासी बनने की इस  संख्या के पीछे का अर्थशास्त्र काफी चौंकाने वाला है। जूना अखाड़ा सभी में बड़ा और वैभवशाली है। प्रत्येक कुंभ में इस अखाड़े से संन्यासी बनने वालों की संख्या सबसे ज्यादा रहती है। इस बार भी यह 15 हजार से अधिक पहुंच चुकी है। अटल, आवाहन, अग्रि जैसे अखाड़ों में संन्यासी बनने वालों की संख्या काफी कम है। इसके पीछे इनका मैनेजमेंट काफी कमजोर होना बताया जाता है। बैरागी अखाड़ों की स्थिति भी इसी तरह की है।

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New Naga Sadhu
शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती का कहना है कि जूना का वैभव सबसे अलग है। यही वजह है कि उससे ज्यादा लोग जुडऩा चाहते है। वह अपने संयासियों के प्रति अधिक उदार है। महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी ने बताया कि जिस अखाड़े के जितने ज्यादा महामंडलेश्वर समझिए उसके उतने ज्यादा शिष्य बनेंगे। जूना इसमें सबसे आगे हैं। शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप का कहना है कि सनातन परंपरा में संन्यास धारण करने के बाद सब एक समान हो जाते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से अपने को वैभवशाली दिखाने की होड़ संतों में दिखने लगी है, जिससे कई विकृतियां भी आ गई हैं, इसे दूर करने की आवश्यकता है।
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Naga Sadhu
महामंडलेश्वर दिखाते हैं अपनी ताकत
हर अखाड़े के महामंडलेश्वर अपनी प्रतिभा और ताकत दिखाने के लिए कुंभ के अवसर पर अधिक से अधिक लोगों को संन्यासी बनवाने की भूमिका निभाते हैं। इसमें जूना, निरंजनी और महानिर्वाणी में सक्रियता अधिक दिखती है।
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Naga Sadhu
संन्यासियों से बढ़ता है दान का भंडार
जिस अखाड़े में जितने संन्यासी बनेंगे, उसके गुरुओं के पास उतना ही दान संन्यासियों के जरिए आता है। जिस तरह से किसी राजा का जितना बड़ा और वैभवशाली साम्राज्य होता है, उसके साथ उतनी ही प्रजा भी जुड़ती है। कुछ इसी तरह की व्यवस्था अखाड़ों में भी देखने को मिल रही है। जिसका जितना बड़ा औरा उसका दायरा भी उतना ही बड़ा होता है। यही वजह है कि बड़े दायरे वाले से ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ रहे हैं। वैभवशाली संतों के शिविरों में इसी वजह से श्रव्द्धालुओं की भीड़ ज्यादा दिख रही है।

 
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