New Naga Sadhu
शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती का कहना है कि जूना का वैभव सबसे अलग है। यही वजह है कि उससे ज्यादा लोग जुडऩा चाहते है। वह अपने संयासियों के प्रति अधिक उदार है। महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी ने बताया कि जिस अखाड़े के जितने ज्यादा महामंडलेश्वर समझिए उसके उतने ज्यादा शिष्य बनेंगे। जूना इसमें सबसे आगे हैं। शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप का कहना है कि सनातन परंपरा में संन्यास धारण करने के बाद सब एक समान हो जाते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय से अपने को वैभवशाली दिखाने की होड़ संतों में दिखने लगी है, जिससे कई विकृतियां भी आ गई हैं, इसे दूर करने की आवश्यकता है।