संगम तट पर शाही स्नान की परंपरा के अद्भुत रूप ने पूरे विश्व का ध्यान खींचा। भस्मी रमाए, डमरूनाद,शंखध्वनि के साथ त्रिशूल भांजते नागाओं के बीच संन्यासिनियों ने शाही स्नान की परंपरा को भक्ति के भावों से अभिसिंचित किया।
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SHAHI SNAN
एक तरफ नागाओं का रेला तो दूसरी ओर साध्वियों का भी संगम तट पर मेला देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना।
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शाही स्नान के दौरान संगम नोज पर भोर से शाम तक संन्यासिसिनियों की टोलियां भी हर हर महादेव के जयकारे के बीच पहुंचती रहीं। आनंद अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी राम गिरि जी महाराज के साथ संन्यासिनियों की भीड़ थी।
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उनकी शोभायात्रा में कई विदेशी साध्वियां भी संगम पर डुबकी लगाने के लिए पहुंचीं। इटली से आई विदेशी साध्वी उमा पुरी ने संगम तट पर अपनी कई शिष्याओं के साथ डुबकी लगाई।
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इसी तरह साध्वी सत्य गिरि के साथ भी 20 से अधिक संन्यासिनियों ने डुबकी लगाकर संगम तट की छटा बदल दी। कई साध्वियां चंवर, छत्र के साथ संगम तट पर पहुंचीं। इस दौरान संन्यासिनियों के दर्शन और आशीर्वाद के लिए भक्तों की कतारें लगी रहीं। लोग बैरीकेडिंग के बीच से उन पर पुष्प वर्षा करते रहे।