फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अस्पताल लाइव : डॉक्टर की राह देखते मरीजों- तीमारदारों को आई नींद, ओपीडी के बाहर नंबर लगाने वाला भी सोया

Sun, 10 Jul 2022 03:18 AM IST
विनोद सिंह अनूप ओझा, प्रयागराज

सार

220 शैया वाले पांच मंजिला इस सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के वार्डों में पहुंचने के लिए मरीजों और तीमारदारों के लिए इन दिनों सीढ़ियां ही सहारा हैं। स्ट्रेचर पर मरीज को लेकर हांफते हुए तीमार भी जगह-जगह मिले।
विज्ञापन
1 of 7
Prayagraj News : एसआरएन स्थित सुपर स्पेशियलिटी भवन में चिकित्सक के इंतजार में सुबह से बैठे मरीज और परिजन। - फोटो : अमर उजाला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता वाली स्वास्थ्य सेवा में शुमार सुपर स्पेशियलिटी सेंटर को उदासीनता के दीमक खा रहे हैं। करोड़ों की लागत वाले पांच मंजिला इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में शनिवार को हर कदम पर खामियां मिलीं। अमर उजाला की पड़ताल में दोपहर 12:30 बजे तक कैंसर की ओपीडी में चिकित्सक नदारद रहे। घंटों राह डॉक्टर की राह देखते मरीजों-तीमारदारों को नींद आ गई थी, तो ओपीडी के बाहर पर्चा जमा करने वाले सोते मिले।  लिफ्ट खराब होने से मरीजों को वार्डों में पहुंचाने में जहां लोगों का पसीना छूटता रहा, वहीं पोर्टिको में मोटरसाइकिलों की मनमानी पार्किंग से स्ट्रेचर और व्हील चेयर फंसी नजर आई।


करछना के डीहा गांव निवासी सुग्रीव रिश्तेदारों के साथ कैंसर पीड़ित अपनी मां कलावती का उपचार कराने के लिए सुपर स्पेशियलिटी सेंटर में सुबह नौ बजे पहुंचे। उन्हें कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. राजुल अभिषेक को दिखाना था। सुबह से ओपीडी के सामने चिकित्सक का रास्ते देखते-देखते एक बजे गए, लेकिन चिकित्सक का पता नहीं चला। इस दौरान थकान की वजह से सुग्रीव को नींद आ गई।
विज्ञापन

2 of 7
Prayagraj News : एसआरएन हास्पिटल पहुंचे परिजन और अन्य लोग। - फोटो : अमर उजाला।
इस चिकित्सक की ओपीडी के बाहर मरीजों का पर्चा जमा करने और नंबर लगाने वाला भी सोता रहा। उसके पास सुबह से कैंसर पीड़ित 12 मरीजों के पर्चे जमा थे। पूछने पर उसने बताया कि डॉक्टर राउंड पर गए हैं। जबकि, चिकित्सक के राउंड पर जाने का समय ओपीडी शुरु होने से पहले का होता है। इसी तरह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में पीजी के छात्र आशीष रंजन भी ओपीडी के बाहर सोते मिले।


कैमरा क्लिक होने पर जब उनकी नींद खुली तब उन्होंने बताया कि सुबह से ही वह अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन, अभी तक उनका नंबर ही नहीं आया। यूरोलॉजी विभाग में उन्हें दिखाना था। इसी तरह जौनपुर के पंवरा गांव से गुर्दे की बीमारी से पीड़ित अपने पिता गौतम(70) को दिखाने के लिए सुबह अस्पताल आए विशाल का खड़े-खड़े पांव दुखने लगा तो वह फर्श पर ही बैठ गए।
विज्ञापन

3 of 7
Prayagraj News : डॉक्टरों के इंतजार में सो गए मरीज। - फोटो : अमर उजाला।
दोपहर एक बजे तक इनकी भी नंबर नहीं आ सका था। इनके अलावा न्यूरोलॉजी विभाग में दिखाने के लिए आए झूंसी के विवेक पटेल भी घंटों परेशान रहे। करंट लगने के बाद उपचार के लिए पति शिव कुमार को लेकर धूमनगंज की सरिता भी भटकती रहीं। ऐसे एक नहीं दर्जनों मरीज सुपर स्पेशियलिटी सेंटर में मरीज और तीमारदार अपनी बारी के इंतजार में जगह-जगह फर्श पर बैठे या फिर कुर्सियों पर खर्राटे भरते नजर आए।

4 of 7
Prayagraj News : मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल की खराब पड़ी लिफ्ट। - फोटो : अमर उजाला।
सुपर स्पेशिएलिटी सेंटर में लगी सभी छह लिफ्ट खराब,वार्डों में पहुंचने के लिए सीढ़ियां ही सहारा
220 शैया वाले पांच मंजिला इस सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के वार्डों में पहुंचने के लिए मरीजों और तीमारदारों के लिए इन दिनों सीढ़ियां ही सहारा हैं। स्ट्रेचर पर मरीज को लेकर हांफते हुए तीमार भी जगह-जगह मिले। पचा चला कि इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के वार्डों में जाने के लिए लगी छह में से पांच लिफ्ट पहले से ही खराब थी। एक लिफ्ट जो चल रही थी, वह भी पिछले 10 दिनों से बंद पड़ी है। ऐसे में इस सेंटर के रखरखाव में बरती जा रही उदासीनता और लापरवाही का अंदाजा लगाया जा सकता है।
विज्ञापन

5 of 7
Prayagraj News : वाहन स्टैंड में तब्दील हुआ अस्पताल का परिसर। - फोटो : अमर उजाला।
अस्पताल का पोर्टिको वाहन स्टैंड में तब्दील, मरीजों के स्ट्रेचर- व्हील चेयर निकलने में भी दिक्कतें
सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के पोर्टिको को अस्पताल कर्मियों से लेकर मरीजों-तीमारदारों ने वाहन स्टैंड में तब्दील कर दिया है। इस दिन दोपहर 12 बजे का आलम यह था कि अस्पताल के पोर्टिको के दोनों तरफ मोटरसाइकिलें खड़ी किए जाने से मरीजों की व्हील चेयर गुजरने तक का रास्ता नहीं बचा था। प्रतापगढ़ से अपने 70 वर्षीय अब्बू जान शकील अहमद का उपचार कराने आए मोहम्मद आशिफ और उनके परिजन तब हैरान रह गए, जब मरीज का स्ट्रेचर पोर्टिको के जाम में फंस गया।


इसी तरह कई मरीजों की व्हील चेयर वहां खड़ी बेतरतीब बाइकों की वजह से किसी तरह बचाकर बाहर निकाली जाती रही। मनमाना तरीकेसे बाइक खड़ी किए जाने से वहां पोर्टिको में इस तरह अतिक्रमण कर लिया गया है कि स्ट्रेचर और व्हील चेेयर पर लाए जाने वाले मरीज को सकुशल अस्पताल में पहुंचाना भी किसी चुनौती से कम नहीं लगता।
विज्ञापन

मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में 1.20 बजे तक होती रही पढ़ाई
यहां से निकलने पर मानसिक रोग विभाग की ओपीडी  में क्लास चलती हुई पाई गई। जिस कक्ष में मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. क्षितिज कुमार श्रीवास्तव बैठते हैं, उसमें दिन के 1:45 बजे तक डॉ. अनुराग वर्मा क्लास लेते रहे।


चिकित्सकों के मनमाना हुए तबादलों से भी चरमराई चिकित्सा सेवा,लौटाए जा रहे मरीज
हाल में ही हुए चिकित्सकों के तबादले का असर इस अस्पताल पर भी पड़ा है। इस अस्पताल के चार चिकित्सकों का तबादला कर दिया गया है। इसमें सुपर स्पेशियलिटी सेंटर की ओपीडी में बैठने वाले वरिष्ठ न्यूरो सर्जन डॉ. एनएन गोपाल भी शामिल हैं। डॉ. गोपाल का बांदा मेडिकल कॉलेज में जनरल सर्जन के पद पर किया गया है। इसलिए वह अवकाश पर चले गए हैं। बांदा मेडिकल कॉलेज में यूरो सर्जरी का विभाग ही नहीं है। ऐसे में वह इस तबादले से परेशान हैं।


शनिवार को न्यूरो सर्जरी के कई मरीजों को वापस करना पड़ा। इसी तरह मेडिसिन विभाग की डॉ. पूनम गुप्ता का भी बांदा तबादला किया गया है। उनके तबादले से बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल का संकट आ गया है। इनके अलावा मानसिक रोग विभाग के डॉ. क्षितिज श्रीवास्तव भी सहारनपुर तबादला किए जाने नाराज हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और शहर उत्तरी ेक विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी को पत्र लिखकर तबादला रोकने की गुहार लगाई है, ताकि उन्हें अपने बुजुर्ग माता-पिता को भगवान भरोसे न छोड़ना पड़े। दंत विभाग में तैनात डॉ. आनंद कुमार के तबादले से भी चिकित्सा सेवा पर असर पड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से बने अस्पताल का बुरा हाल
प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत 57.93 करोड़ रुपये की लागत से बने सुपर स्पेशियलिटी सेंटर की यह हालत तब है, जब सरकार ने यहां सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों की तैनाती की है।  इस हॉस्पिटल के प्रमुख विभागों में यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, कार्डियोलॉजी, गैस्ट्रोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, इंडोक्राइनोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी के अलावा जांच की कई उच्चस्तरीय सुविधाएं मौजूद हैं। 


लिफ्ट खराब होने की जानकारी मुझे है। शासन को बजट के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। बजट आने पर लिफ्ट चालू हो जाएगी। रही बात न्यूरो सर्जरी और अन्य विभागों से चिकित्सकों की कमी से मरीजों को परेशानी की तो यह शासन स्तर का मामला है। कुछ चिकित्सकों का तबादला होने से दिक्कतें पैदा हुई हैं। मैं अस्पताल में दिन में बैठता हूं। किसी को भी कोई पीड़ा या परेशानी हो तो वह सीधे मुझसे मिले। किसी को दिक्कत नहीं होगी। सबको उपचार मुहैया कराया जाएगा। अस्पताल का पोर्टिको वाहन स्टैंड में हर रोज तब्दील हो जाता है। पुलिस की मदद के बिना उसे खाली कराना संभव नहीं है। - डॉ. एसपी सिंह, प्रधानाचार्य, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें