इलाहाबाद हाईकोर्ट के नौ मंजिला महाधिवक्ता कार्यालय भवन में आग के पीछे पीडब्ल्यूडी के विद्युत यांत्रिक खंड की बड़ी लापरवाही सामने आई है। वर्ष 2012 में निर्माण पूरा होने के बाद एडवोकेट जनरल को हैंडओवर किए गए इस भवन में पिछले नौ साल से स्विचिंग, नेटवर्किंग, वायरिंग, पैनल बोर्ड की मरम्मत ही नहीं कराई गई। इतना ही नहीं, अनुरक्षण के लिए 4.60 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत होने के बाद भी यांत्रिक खंड के अभियंताओं ने खराब वायरिंग बदलवाने की जहमत नहीं उठाई। भवन में शार्ट सर्किट से आग लगने का अनुमान है।
मरम्मत और देखरेख के अभाव में महाधिवक्ता कार्यालय की खराब हो चुकी वायरिंग और नेटवर्किंग प्वाइंट को बदलने को लेकर कई बार प्रमुख सचिव न्याय से लेकर मुख्य सचिव तक बात पहुंचाई गई। लेकिन, नतीजा सिफर ही रहा। भवन महाधिवक्ता को हस्तांतरित किए जाने के एक वर्ष बाद यानी 2013 तक कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस ने अनुरक्षण कार्य किया। इसके बाद से ही इस भवन के रखरखाव और अनुरक्षण का काम पूरी तरह ठप था।