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किराया न देने पर मकान मालिक ने निकाला, 4 दिन में 4 मोपेड से 14 सौ किमी का सफर कर प्रतापगढ़ पहुंचे आठ लोग

Tue, 14 Apr 2020 12:22 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रतापगढ़
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pratapgarh news - फोटो : प्रतापगढ़
लॉकडाउन के बाद भी बाहर कमाने वाले लोगों के घर लौटने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आर्थिक तंगी की मार झेल रहे लोग घरों की ओर चल पड़े हैं। रविवार की रात हैदराबाद से 14 सौ किमी का सफर मोपेड से तय कर सुल्तानपुर के आठ लोग यहां पहुंचे। पुलिस के रोकते ही उनकी आंखों से आंसू गिरने लगे। पुलिस ने सभी की जिला अस्पताल में जांच कराकर उन्हें भोजन कराया। साथ ही सभी को घर भेज दिया गया, जहां इन्हें क्वारंटीन किया जाएगा।

सुल्तानपुर के कूड़ेभार निवासी अनवर, पीपरपुर निवासी गुड्डू समेत आठ युवक रविवार की रात चार मोपेड से सुल्तानपुर की ओर जा रहे थे। भंगवाचुंगी चौराहे पर पुलिस ने सभी को रोक लिया। पुलिस के सवाल करने पहले से ही सभी रोने लगे। हालांकि मौके पर पहुंचे सीओ सिटी अभय पांडेय ने सभी को समझाते हुए कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है। तब जाकर सभी ने हिम्मत जुटाकर अपना परिचय बताया। कहा कि वे लोग मोपेड से हैदराबाद से घर जा रहे हैं। वहां सब्जी का कारोबार करते थे। लॉकडाउन के बाद मकान मालिक किराया मांग रहा था।
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Coronavirus Case - फोटो : amar ujala
रुपये न दे पाने के कारण सभी को भगा दिया। मरता क्या न करता। हिम्मत कर मोपेड से सभी घर के लिए निकल पड़े। नागपुर होकर वे घर की ओर बढ़ते रहे। किसी तरह वह चार दिनों का सफर तय कर अपने जनपद के करीब पहुंचने में कामयाब रहे। बताया कि सैकड़ों लोग पैदल ही घर आ रहे हैं। कोई संसाधन नहीं मिल रहा है। जान बचाने के लिए खतरा मोल लिया। सीओ सिटी ने सभी को खाना खिलाया। इसके बाद जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा।
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लॉकडाउन - फोटो : amar ujala

रास्ते में पुलिस की मदद से मिटाई भूख 

हैदराबाद से सुल्तानपुर के लिए निकले लोगों ने बताया कि रास्ते में पुलिस ने उनकी बहुत मदद की। चाहे महाराष्ट्र की पुलिस हो या मध्य प्रदेश की। हर प्रांत की पुलिस ने उनकी मदद की। रास्ता भी बताया और खाना भी खिलाया। पुलिस सभी को रोककर जांच भी कराती रही। जांच के दौरान दो से तीन घंटे तक रुकना भी पड़ा। चिकित्सक भी बिना पुलिस के उनकी जांच करने के लिए सामने नहीं आ रहे थे।

पैदल भी चले, रात में भी तय किया सफर

हैदराबाद से निकले लोगों ने रात में भी अपना सफर जारी रखा। पेट्रोल खत्म होने के बाद उन्हें पैदल भी चलना पड़ा। रात के अंधेरे में सुनसान रास्तों पर डर भी लगा, लेकिन उन्हें हर हाल में घर पहुंचना था। इसलिए चलते रहे। 

आठ घंटे तक नहीं मिला पानी

नागपुर से निकलने के बाद सभी को भूख, प्यास सता रही थी। सभी के पास मिलाकर तीन हजार रुपये ही थे। जिसे मोपेड में पेट्रोल डालने के लिए रखा था। बाजार भी बंद थे। ऐसे में बिना कुछ खाए पिए आठ घंटे तक सभी सफर पर रहे। रास्ते में पुलिसकर्मी मिले, लेकिन उनके पास पानी नहीं थीं। रास्ते में कुछ स्थानों पर रुककर लोगों से पानी मांगा, लेकिन हैदराबाद से आने की बात सुनने के बाद लोगों ने दरवाजा बंद कर लिया
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