फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिव्य देव दीपावलीः संगम पर दीपोत्सव की आभा से शरमाया पूनम का चांद

Tue, 01 Dec 2020 01:35 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
विज्ञापन
1 of 7
देव दीपावली 2020 - फोटो : prayagraj
कार्तिक पूर्णिमा की शाम गंगा, यमुना, विलुप्त सरस्वती केसंगम तट पर दीपोत्सव की आभा से जगमग हुई तो कुछ देर के लिए लगा जैसे नभ का तारामंडल ही धरा पर उतर आया हो। पावन त्रिवेणी के तट पर गंगा-यमुना की वेणी में यूं ही असंख्य दीपों के चंद्रहार गुंथते गए और पूनम का खिलखिलाता चांद उस जगमग ज्योति की ओट में शरमाता सा नजर आता रहा।


बच्चों, महिलाओं, युवाओं, कर्मचारियों के हाथों संगम से किला घाट के बीच इस तरह दीपों की अल्पनाएं और रंगोलियां सजाई जाती रहीं। दूसरी ओर लहरों पर इतराते दीये हर दिल में उल्लाह के अंकुर बन फूटते रहे। शंखध्वनियां भी गूंजती रहीं और घटे घड़ियाल भी। इस दीपोत्सव के यादगार मौके को गीतों, भजनों की प्रस्तुतियों से संगीतमय बनाया गया था। पौराणिक मान्यता के अनुसार कभी त्रिपुरासुर के वध के बाद देवी-देवताओं ने पुष्पवर्षा कर देव दीपावली मनाई थी।

 
विज्ञापन

2 of 7
देव दीपावली 2020 - फोटो : prayagraj
सांझ ढलने से पहले ही लोग घरों से दीया-बाती लेकर संगम की ओर पहुंचने लगे। स्कूलों के छात्र, छात्राओं ने भी दीपमालाएं सजाईं और एनसीसी के कैडेट्स ने भी रंगोलियों से तट को भव्यता प्रदान करने की कोशिश की। बच्चों ने भी अपनी परिकल्पनाओं से दीपों के स्वास्तिक रचे तो महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं। महिलाओं ने संगम पर एक ओर हल्दी-चंदन के टीके लगाकर शुभ के गीत भी गाए और दीप भी जलाती रहीं।




दीपोत्सव का यह दृश्य हर किसी के मनोभावों में रचा बसा नजर आया। किसी ने रेती पर दीपों की लड़ियों से भारत का नक्शा बनाया तो किसी ने स्वच्छता अभियान का संदेश दिया। कहीं कमल के पुुष्पों के आकार में दीप जले तो कहीं कलश के रूप में। लोगों के साथ पुलिस के जवान और अफसर भी दीपोत्सव का हिस्सा बने।

 
विज्ञापन

3 of 7
देव दीपावली 2020 - फोटो : prayagraj
कतारबद्ध दीपों, अल्पनाओं, रंगोलियों से कार्तिक पूर्णिमा की छटा इसी तरह निखरती रही। कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए लोग मास्क लगाकर दीपोत्सव में शामिल हुए। संगम तट से लेकर शहर के तिराहों, चौराहों तक को दीपमालाओं से सजाया गया। भवनों पर भी दीप जलाए गए और झालरों से भी सजावट की गई। खास तौर से यमुना पार अरैल में त्रिवेणी पुष्प परिसर को सतरंगी झालरों से सजाकर दीपोत्सव के रंग बिखेरे गए। इसी तरह झूंसी में भी गंगा तट पर लोगों ने दीप जलाए गए। गंगा, यमुना के दोनों तटों पर दीपों की लड़ियां सजाई गईं। साथ ही शहर के तीर्थों, भवनों को और मंदिरों को भी सजाया गया।

4 of 7
देव दीपावली 2020 - फोटो : prayagraj

अफसरों ने उतारी आरती, किया दीपदान

प्रयागराज। कार्तिक पूर्णिमा पर दीपोत्सव के दौरान प्रयागराज मेला प्राधिकरण की ओर से भव्य महाआरती की गई। संगम महाआरती समिति के 11 पुरोहितों ने धूप, कपूर और गुगुल दशांग से त्रिवेणी की आरती उतारी। इस दौरान आईजी केपी सिंह, डीएम भानुचंद्र गोस्वामी, एसएसपी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी, प्रभारी मेलाधिकारी विवेक चतुर्वेदी समेत कई अधिकारियों ने भी आरती के बाद दीपदान किया।
विज्ञापन

5 of 7
देव दीपावली 2020 - फोटो : prayagraj
कार्तिक पूर्णिमा पर सोमवार को त्रिवेणी संगम में हजारों श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। संगम की रेती पर एक ओर स्नान और दूसरी ओर जप और ध्यान चलता रहा। कहीं रेती पर यज्ञ वेदियां बनाकर आहुति दी जा रही थी, तो कहीं शिवलिंग बनाकर अभिषेक किया जा रहा था। शिव मंदिरों में भी स्नान के बाद रुद्राभिषेक किया गया।



संगम में कार्तिक पूर्णिमा की डुबकी लगाने के लिए भोर में ही श्रद्धालु पहुंचने लगे। ठंड केबावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने स्नान किया। इस दौरान त्रिवेणी संगम पर जगह-जगह महिलाएं टीके लगाकर अर्घ्य देती रहीं और अनुष्ठान किया जाता रहा। तीर्थपुरोहितों की चौकियां दीपदान की वजह से संगम से सौ मीटर दूर करा दी गई थीं। स्नान के बात लोग पुरोहितों की चौकियों पर मनौतियों के संकल्प करते रहे।



 
विज्ञापन

6 of 7
देव दीपावली 2020 - फोटो : prayagraj
इस दौरान किला घाट से लेकर संगम तक सक्युलेटिंग एरिया में वाहनों की कतारें लगी रहीं। संगम में स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने भरद्वाज मुनि आश्रम, मनकामेश्वर महादेव, अरैल में सोमेश्वर महादेव में भी हाजिरी लगाई और रुद्राभिषेक किया। कार्तिक पूर्णिमा पर शाम को चंद्रोदय के समय भगवान शिव की पूजा की गई। लोगों ने गंगाजल में खड़े होकर श्रीहरि के रूप में भगवान विष्णु का ध्यान किया। इस दौरान जगह-जगह जप और अन्न-वस्त्र दान की होड़ मची रही। मौसमी फलों के अलावा काली उड़द की दाल, कंबल, चावल का दान किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
देव दीपावली के अवसर पर सजाया गया नया यमुना पुल। - फोटो : prayagraj
कार्तिक पूर्णिमा पर सोमवार को साल का अंतिम चंद्रग्रहण दिन में करीब चार घंटे तक रहा। दिन में ग्रहण लगने की वजह से इस अनूठी खगोलीय घटना को लोग लेंस या दूरबीन लगाकर भी नहीं देख सके। हालांकि इस दौरान सनातनधर्मियों ने मोक्ष के लिए जजन किए। जगह -जगह अनुष्ठान और भजनों के साथ ही सुंदर कांड के पाठ किए जाते रहे। शाम को ग्रहण काल पूरा होने पर लोगों ने गंगा, यमुना के तटों पर डुबकी भी लगाई।




साल का आखिरी चंद्र ग्रहण सोमवार को कार्तिक पूर्णिमा पर दोपहर 1:02 बजे आरंभ हुआ। इस दौरान पूर्णिमा तिथि लग चुकी थी। ग्रहण का मध्य काल दोपहर 3 :12 बजे और मोक्ष शाम 5: 23 बजे हुआ। इसी के साथ हर हर महादेव के जयकारे लगने लगे। ग्रहण के बाद संगम समेत गंगा, यमुना का घाटों पर देव दीपावली का उत्सव आरंभ हुआ। इससे पहले सूतक काल भोर 4:02 बजे  से आरंभ होने से सनातनधर्मियों ने मंदिरों के कपाट बंद कर दिए थे। ग्रहण काल के दौरान मोक्ष के लिए जगह-जगह सुंदर कांड के पाठ और कीर्तन किए जाते रहे। यह ग्रहण दिन में पड़ने की वजह से इसे देखा नहीं जा सका।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें