गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर शनिवार को भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। 44 दिवसीय माघ मेले के पहले दिन पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर श्रद्धालु उमड़ पड़े। देश के कोने-कोने से आए संत, कल्पवासी और श्रद्धालु संगम की ओर बढ़ते नजर आए। शरीर पर शॉल, अलग-अलग वेशभूषा और चेहरे पर श्रद्धा की चमक आस्था की गवाही दे रही थी।
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पौष पूर्णिमा पर आस्था की डुबकी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
प्रयागराज में पौष पूर्णिमा स्नान के साथ ही शनिवार को त्रिवेणी तट पर माघ मेले का आगाज हो गया। मेले के प्रथम स्नान पर्व पर संगम नोज सहित 10 घाटों पर श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु उमड़ पड़े। इसी के साथ साधु-संतों, तीर्थपुरोहितों के शिविरों में कल्पवासी जप, तप, ध्यान में जुट गए।
मेला क्षेत्र स्थित लाल सड़क, काली सड़क, त्रिवेणी व अक्षयवट मार्ग से संगम की ओर जाने वाले रास्तों पर भोर में ही स्नानार्थियों का रेला चलने लगा। संगम नोज पर भी सूर्योदय के साथ ही पौष पूर्णिमा की डुबकी आरंभ हुई। संतों, भक्तों और कल्पवासियों ने संगम तट के 2.8 किमी लंबे घाटों पर देर रात तक डुबकी लगाई। विभिन्न घाटों पर भी डुबकी लगाने वालों की दिनभर भीड़ रही।
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माघ मेला क्षेत्र में पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर संगम में आस्था की डुबकी लगाते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
संगम की रेती पर गरीबों, बेसहारों को अन्न वस्त्र के दान के साथ ही महिलाएं कहीं समूहों में मां गंगा के गीत गाती रहीं तो कहीं हल्दी-चंदन के टीके लगाने वाले श्रद्धालुओं को घेरे रहे। पुरोहितों की चौकियों पर तिलक-त्रिपुंड लगता रहा। सुरक्षा कर्मियों की चौकसी के बीच जल पुलिस रिवर बैरिकेडिंग के अंदर ही स्नान करने के लिए सचेत करती रही।
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माघ मेला क्षेत्र में पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर संगम स्नान कर सूर्य को अर्ध्य देता श्रद्धालु
- फोटो : शिव त्रिपाठी
श्रद्धा और विश्वास का दिखा दम ठंड पर भारी पड़ी आस्था की डुबकी
गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर शनिवार को भक्ति का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। 44 दिवसीय माघ मेले के पहले दिन पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर श्रद्धालु उमड़ पड़े। देश के कोने-कोने से आए संत, कल्पवासी और श्रद्धालु संगम की ओर बढ़ते नजर आए। शरीर पर शॉल, अलग-अलग वेशभूषा और चेहरे पर श्रद्धा की चमक आस्था की गवाही दे रही थी।
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माघ मेला में पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर संगम में आस्था की डुबकी लगाने के बाद जटाओं को सूखाता साधु
- फोटो : शिव त्रिपाठी
कड़ाके की सर्दी भी श्रद्धालुओं के उत्साह को डिगा नहीं सकी। परिवार, गांव वालों और रिश्तेदारों के साथ श्रद्धालु पैदल ही संगम की ओर बढ़ते रहे। जैसे ही श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई, चेहरे पर थकान की जगह सुकून और आनंद साफ झलक उठा।
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माघ मेले में पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर संगम में आस्था की डुबकी लगाने के बाद सूर्य को अर्ध्य देता
- फोटो : शिव त्रिपाठी
गुजरात के बलसार के प्रितेश कुमार अपनी पत्नी पूजा पटेल, सास मीना बेन और ससुर नंटू भाई के साथ संगम स्नान के लिए पहुंचे। उन्होंने बताया कि पैदल चलने से थकान जरूर हुई लेकिन संगम में स्नान करते ही सारी थकान दूर हो गई।
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माघ मेला क्षेत्र में शनिवार की सुबह 4 बजे संगम स्नान को जुटी श्रद्धालुओं की भीड़
- फोटो : शिव त्रिपाठी
महाराष्ट्र के सोलापुर से 55 श्रद्धालुओं का एक दल संगम पहुंचा जिसमें 45 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल थे। करीब पांच किलोमीटर पैदल चलने के बाद भी उनके चेहरे पर आनंद साफ दिखाई दिया।
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माघ मेला क्षेत्र में पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर संगम स्नान कर शंखनाद करता श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के प्रवीण सरासे अपनी मां गुलाबी के साथ मेला क्षेत्र पहुंचे। पहले वह वाराणसी गए और वहां दर्शन के बाद सुबह सात बजे प्रयागराज पहुंचकर संगम स्नान किया। उन्होंने बताया कि लोगों ने भीड़ और लंबी पैदल यात्रा की बात कही थी लेकिन उन्हें बिना किसी परेशानी के संगम स्नान का सौभाग्य मिला और ऐसा लगा मानो जीवन धन्य हो गया हो।
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माघ मेला क्षेत्र में पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर संगम स्नान कर सूर्य को अर्ध्य देता श्रद्धालु
- फोटो : शिव त्रिपाठी
अमेठी के रामबरन विश्वकर्मा वर्ष 1983 से लगातार गंगा स्नान के लिए आते रहे हैं। इस बार उनके साथ गांव के अन्य लोग भी आए हैं। पौष पूर्णिमा पर स्नान कर उन्होंने गहरी आध्यात्मिक अनुभूति होने की बात कही। आगरा से आए जितेंद्र ने कहा कि त्रिवेणी के तट पर स्नान की इच्छा लंबे समय से थी जो आज पूरी हो गई।
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माघ मेला क्षेत्र में पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर संगम में कान्हा के साथ डुबकी लागते श्रद्धालु
- फोटो : शिव त्रिपाठी
भक्ति के इसी रंग में डूबे हजारों श्रद्धालु ठंड की परवाह किए बिना संगम में डुबकी लगाते रहे। प्रशासन के अनुसार, लाखों श्रद्धालु और कल्पवासी मेला क्षेत्र में पहुंच चुके हैं।
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Magh Mela 2026 : पौष पूर्णिमा पर संगम तट का विहंगम दृश्य।
- फोटो : अमर उजाला।
मोक्ष की कामना से कल्पवास शुरू
त्रिवेणी संगम पर दुग्धाभिषेक के साथ ही गंगा, यमुना, सरस्वती के नाम पर दीपदान कर श्रद्धालु फोटो खींचते रहे। पौष पूर्णिमा पर डुबकी लगाने साथ ही दान, ध्यान, व्रत, पूजन के साथ रेती पर लाखों श्रद्धालुओं ने मोक्ष की कामना से कल्पवास शुरू किया। कल्पवासियों ने गणेश पूजन कर तुसली का बिरवा रोपा और गंगा की मिट्टी में जौ भी बोया।
Magh Mela 2026 : पौष पूर्णिमा पर संगम तट का विहंगम दृश्य।
- फोटो : अमर उजाला।
नजर नहीं आईं शटल बसें, श्रद्धालु परेशान
मेला प्रशासन और रोडवेज ने सभी स्नान पर्वों पर विभिन्न स्थानों से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शटल बस चलाने का दावा किया था लेकिन पहले ही स्नान पर्व पर यह सुविधा झूसी में कहीं पर भी नजर नहीं आई। अंदावा और रहिमापुर तिराहे पर रोके गए हजारों श्रद्धालुओं से टेंपो और ई-रिक्शा चालकों ने मनमाना किराया वसूल किया। कहीं भी श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क चलने वाली रोडवेज की शटल बसें नहीं नजर आईं।