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महाशिवरात्रिः संगम में पुण्य की आखिरी डुबकी के लिए पहुंचने लगे श्रद्धालु, 60 वर्ष बाद अद्भुत संयोग

Fri, 21 Feb 2020 04:59 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
माघ मेला के आखिरी स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर पुण्य की डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालु संगम पहुंचने लगे हैं। हालांकि चतुर्दशी तिथि शुक्रवार की शाम 5:22 बजे लगेगी, लेकिन इससे पहले सूर्योदय के साथ ही स्नान आरंभ हो जाएगा। इस बार दर्जन भर घाटों पर महाशिवरात्रि स्नान के प्रबंध किए गए हैं। माघ मेला प्रशासन ने 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के इस पर्व पर डुबकी लगाने का अनुमान व्यक्त किया है। महाशिवरात्रि पर 5.50 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई संगम में डुबकी
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महाशिवरात्रि पर संगम में डुबकी शुक्रवार की सुबह से ही लगने लगेगी। इसके संगम नोज से लेकर दारागंज समेत 10 घाटों पर स्नान की व्यवस्था की गई है। इन स्नान घाटों पर मजिस्ट्रेट तैनात रहेंगे। साथ ही भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस, पीएसी और आरएएफ के जवान भी लगाए गए हैं। संगम नोज समेत अन्य घाटों की मरम्मत कराने के साथ ही सर्क्युलेटिंग एरिया को भी खाली करा दिया गया है। आखिरी स्नान पर्व के मद्देनजर पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करा दी गई है। पीडब्ल्यूडी की ओर से गंगा पर बने सभी पांच पांटून पुलों और चकर्ड प्लेट मार्गों की मरम्मत कराने के साथ ही बिजली, पानी और सफाई के इंतजाम दुरुस्त कराए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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60 साल बाद शिवरात्रि पर कालसर्प योग

फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि शुक्रवार की शाम को आरंभ होगी। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन माता पार्वती का भगवान शिव के साथ विवाह हुआ था। इस पर्व पर 60 वर्ष बाद कालसर्प योग बन रहा है। ऐसे में राहु, केतु दोष से भी मुक्ति मिलेगी। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा। इस दिन शनि और चंद्र मकर राशि में होंगे। जबकि गुरु धनु राशि में, बुध कुंभ राशि में और शुक्र मीन राशि में रहेंगे। तीनों ही ग्रह इन राशियों में पहुंचकर महापराक्रमी हो जाएंगे। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग होने से सभी शुभ कार्य हो सकेंगे।

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महाशिवरात्रि पूजा मुहूर्त

-शाम 6:02 बजे से 6:50 बजे तक
महानिशा पूजा:
रात 11:45   से 12:00 बजे तक
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महाशिवरात्रि व्रत का विधान
महा शिवरात्रि व्रत करने वालों को त्रयोदशी तिथि को एक पहर ही भोजन करना चाहिए। फिर शिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में व्रत का संकल्प लेना चाहिए। शिवरात्रि की पूजा शाम के समय या फिर मध्यरात्रि में करने का विधान है। शिवरात्रि पूजा रात्रि के समय एक बार या फिर चार बार की जा सकती है। स्कंदपुराण के अनुसार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का अभिषेक और पूजा करने से हर कठिनाइयों को पार करने की शक्ति मिलती है।


फूलों से सजे शिवालय, सुख-समृद्धि के लिए मंदिरों में होगा रुद्राभिषेक

महाशिवरात्रि पर तीर्थराज प्रयाग के शिवालयों में उत्सवमय माहौल रहेगा। मंदिरों को रंग-बिरंगे फूलों, झालरों से सजा दिया गया है। तरह-तरह की झांकियों के दर्शन के साथ ही शुक्रवार को सुबह से शाम तक देवाधिदेव महादेव का जलाभिषेक होगा। रुद्राभिषेक, दुग्धाभिषेक भोर से ही आरंभ हो जाएगा। महाशिवरात्रि पर मनकामेश्वर महादेव, महर्षि भरद्वाज आश्रम स्थित दूधेश्वर, भरद्वाजेश्वर महादेव, अरैल में सोमेश्वर महादेव, पड़िला महादेव, हनुमत निकेतन स्थित शिवालय में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी।
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