कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉक डाउन ने तमाम ऐसे वकीलों के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न कर दिया, जो दूर-दराज के जिलों से आकर प्रयागराज में वकालत कर रहे हैं। उन युवा अधिवक्ताओं की समस्या ज्यादा बड़ी है, जिनके पैर अभी वकालत के पेशे में पूरी तरह से जमे नहीं है। कहने को तो हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पास करोड़ों रुपये का बजट है, मगर हालात कुछ ऐसे हैं कि इसे खर्च करने वाला कोई नहीं। यह समस्या ऐसे समय सामने आ खड़ी हुई है, जब बार एसोसिएशन की कोई निर्वाचित कार्यकारिणी प्रभाव में नहीं है।
पुरानी कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लिहाजा उसे फंड खर्च करने का अधिकार नहीं है। नए चुनाव की मतगणना पूरी न होने होने से नई कार्यकारिणी अधर में है। जब तक मतगणना पूरी होकर परिणाम घोषित नहीं होता, नई कार्यकारिणी भी कुछ कुछ करने की स्थिति में नहीं होगी। बार का चार्ज एल्डर कमेटी के पास है, जिसके अधिकार सीमित हैं, ऐसे में पूर्व और निर्वाचित पदाधिकारी चाहते हुए भी वकीलों के लिए कुछ नहीं कर पा रहे। वकीलों की ओर से इस बात की लगातार मांग की जा रही है कि युवाओं की मदद की जानी चाहिए।