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होलिकाओं के साथ तन-मन के विकारों का दहन, रंग पर्व होली आज

Mon, 09 Mar 2020 10:46 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
अहंकूटाम भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै: । अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्...। 
इन्हीं मंत्रों के साथ गणपति के बाद सूर्य-चंद्रमा की पूजा की गई। इसी के साथ हवन कर दुख-दारिद्रय और तन-मन के विकारों की आहुति देते हुए होलिकाओं को आग के हवाले कर दिया गया।

जौ-गेहूं, अलसी की बालियों के साथ किसी ने पांच तो किसी ने 11 बार परिक्रमा कर बुराई की प्रतीक होलिकाओं को जलाया। माना जाता है कि होलिका दहन के समय जौ की बाली सेंककर घर ले आने से धन-धान्य में वृद्धि होती है। मंगलवार को धूरंडी के बाद संगमनगरी रंग भरी पिचकारियों से सराबोर होगी।
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
पुण्यदायिनी पाल्गुनी पूर्णिमा में जिले में वसंत पंचमी के दिन 3970 जगहों पर स्थापित की गई होलिकाओं को शाम को सविधि पूजन के बाद जलाया गया। सिविल लाइंस के अलावा मम्फोर्डगंज, पुराने शहर चौक-कटरा, मुट्ठीगंज-दारागंज, बहादुरगंज,कीडगंज, अतरसुइया समेत शहर के तिराहों, चौराहों पर एक हजार से अधिक स्थानों पर बुराई की प्रतीक होलिकाओं का दहन किया गया। होलिका दहन केबाद लोगों ने ढोल-मंजीरे पर फाग गीत गाए।
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
अशोकनगर, राजापुर के आवा नेवादा व अन्य कई कॉलोनियों में दोपहर बाद होलिकाएं स्थापित की गईं और उन्हें शाम को जलाकर परिक्रमा की गई। ज्यादातर जगहों पर घास-फूस, लकड़ियों, कंडों तथा गोबर के उपलों के ढेर होलिका के रूप मेंजालए गए। कुछ स्थानों पर होलिका की प्रतिमाएं भी लगाई गई थीं।

प्रतिमाओं की गोद में भक्त प्रह्लाद दर्शन दे रहे थे। ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय के अनुसार भागवत पुराण के अनुसार हिरण्याकश्यप की बहन ढुंढा राक्षसी थी को आग में न जलने का वरदान था।  अपने भाई हिरण्याकश्यप के निर्देश पर ढुंढा अपने भतीजे भक्त प्रह्लाद को लेकर अग्निकुंड में बैठ गई थी, लेकिन अपनी भक्ति और तप के बल पर भक्त प्रह्लाद बच गए और ढुंढा राक्षसी आग की लपटों में जलकर स्वाहा हो गई। तभी से बुराई की प्रतीक होलिका के दहन की परंपरा है।
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कोरोना वायरस से बचने के लिए होलिकाओं में जावित्री-जायफल की आहुति

होलिका दहन में भी कोरोना वायरस छाया रहा। कोरोना से बचने के लिए लोगों ने ज्योतिषियों की सलाह पर होलिका में नवग्रह की समिधा के साथ ही जावित्री, जायफल और लौंग बी जलाया। इसके अलावा नवग्रहों के नाम पर भी अलग-अलग लकड़ियां होकिाओं में समर्पित की गईं, ताकि उनके औषधीय धुएं और ताप से कोरोना वायरस का प्रभाव वातावरण में फटकने न पाए। सिविल लाइंस के ज्योतिषाचार्य आशुतोष वार्ष्णेय ने बताया कि तमाम लोगों ने कोरोना वायरस के बचने के लिए होलिका में जावित्री, जायफल और नवग्रह की लकड़ियां जलाईं। 
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