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कुंभ 2019: मकर संक्रांति से पहले संगम तट की बदली छटा, नागा साधुओं ने रमाई धूनी, देखें तस्वीरें

Sat, 12 Jan 2019 09:34 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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मकर संक्रांति पर होने वाले प्रथम शाही स्नान से पहले अखाड़ों, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक संस्थाओं, पुरोहितों और कल्पवासियों के शिविरों से संगम की रेती सज गई है। गंगा तीरे शनिवार को कहीं शंख, डमरू, घंट-घड़ियाल की गूंज सुनाई देने लगी तो कहीं यज्ञशालाओं में वेदपाठी बटुकों के सस्वर मंत्रोच्चार गूंजने लगे।
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इन सबके बीच आकर्षण का केंद्र नागा संन्यासियों के कतारबद्ध धूने भी लग गए। भस्म-भभूत पोतकर आसन लगाए नागाओं के आशीर्वाद के लिए भीड़ लगने से नजारा बदल गया। हरिद्वार से आए दिगंबर अखिलेश पुरी महाराज ने निरंजनी अखाड़े के पास कॉटेज के सामने अपना धूना लगाया है। वहां शाम को आशीर्वाद लेने वालों की भीड़ लगी रही। बाबा भजन गा रहे थे- गगन मंडल तले अमृत का कुआं तहां ब्रह्म का वासा/ सगुरा होवै भरि भरि पीवै निगुड़ा मरत पियासा...। । 
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उनका कहना था कि यह अमृत से सिंचित भूमि है।  दुनिया के इस सबसे बड़े संत समागम में इस पावन भूमि पर महीने भर जगत के कल्याण की कामना से साधना होगी। संगम में डुबकी लगाने से तन तो पवित्र होगा ही मन भी निर्मल हो जाएगा। दिगंबर राघवानंद महाराज, दिगंबर दर्शनपुरी महाराज, दिगंबर खेमराज पुरी महाराज के अलावा ऐसे अनेक नागा संन्यासियों के धूने पर भक्त खिंचे चले आ रहे हैं। उसके ठीक सामने स्वामी बालकानंद गिरि महाराज के शिविर में यज्ञ शुरू हो गया।

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बाबा लाल दयाल नगर पंजाब वाले महामंडेश्वर गंगा दास जी महाराज के शिविर में अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ-अनुष्ठान आरंभ कर दिया। महामंडेश्वर सांवरिया बाबा के खालसा में भी सत्संग की गूंज शुरू हो गई। अग्नि अखाड़े के संरक्षक महंत मेघानंद महाराज के भव्य शिविर में तो चंडीगढ़-पंजाब की झलक देखते बन रही है।
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काशी अन्नपूर्णा अन्न धन आश्रम मठ के शिविर में शाम को वेदपाठी बटुकों ने घंट-घड़ियाल के साथ आरती की। यहां वेद की ऋचाओं की सस्वर गूंज से वातावरण बदल गया है। खाक चौक में तीन सौ से अधिक महामंडलेश्वरों, आचार्यों, महंतों के शिविरों में जप, तप, ध्यान की अलख जग गई है तो प्रथम शाही स्नान से पहले बड़ी संख्या में कल्पवासी शिविरों में पहुंच गए हैं। संगम की रेती पर बसी निराली दुनिया की छटा देखते ही बन रही है।
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