prakashotsav
आरंभ में आदरपूर्वक ‘कहो सतनाम, सतनाम, सतनाम जी, जपो वाहेगुरु, वाहेगुरु, वाहेगुरु जी’ के जयघोष के साथ सिर पर रखकर गुरुग्रंथ साहिब को फूलों से सजी गाड़ी तक लाया गया। यात्रा रवाना हुई तो सेवादारों ने सड़क को झाडू से बुहारा, पानी का छींटा दिया और फूलों की पंखुड़ियों बिखेरी।