अलीगढ़ की खैर कोतवाली में महिला के जिंदा जलने और बाद में अस्पताल में मौत हो जाने के मामले में पुलिस घिरती नजर आ रही है। इस पूरे प्रकरण में पुलिस की कदम कदम पर लापरवाही दिखी है। जब पुलिस कप्तान थाने पर पहुंचे तो लोगों ने पुलिस पर भी खूब आरोप लगाए। हेमलता पिछले कई दिनों से कोतवाली के चक्कर लगा रही थी। वह अपने विपक्षियों पर कार्रवाई की मांग कर रही थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी।
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Woman burnt alive in police station
- फोटो : अमर उजाला
तीन बेटों के साथ रहती थी हेमलता
मृतका हेमलता का मायका इगलास थाने के गांव मोहकमपुर में है। उसके पति राजकुमार लंबे समय से अपनी ननिहाल दरकन नगलिया में अपने मामा नेत्रपाल सिंह के मकान में रहते थे। वर्ष 2019 में पति राजकुमार की मृत्यु हो जाने के बाद हेमलता अपने तीन पुत्र गौरव, कौशल, राहुल व पुत्री गीता के साथ गांव में ही रहती थी। दो पुत्र गौरव व कौशल व पुत्री गीता की शादी उसने कर दी थी। पति की मृत्यु के बाद से पति का ममेरा भाई मकान को खाली कराने के लिए दबाव बना रहा था, विभिन्न तरीकों से परेशान कर रहा था।
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11 जून को मृतक ने परेशान होकर चंद्रभान, मुकेश, नेत्रपाल, चंचल आदि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें खैर पुलिस ने चार्जशीट लगा दी थी। नौ जुलाई को हेमलता गांव आई तो देखा कि घर में रखे करीब 12 क्विंटल गेहूं नहीं है। आरोप है कि चंद्रभान से शिकायत की तो उसने मारपीट कर निर्वस्त्र कर दिया था। जिसकी शिकायत करने मृतका लगातार कोतवाली आ रही थी। मकान खाली करने के लिए चंद्रभान पांच लाख रुपये दे रहा था, आरोप है कि महिला दस लाख रुपये मांग रही थी।
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खैर पुलिस मामले को गंभीरता से लेती तो नहीं होती घटना
मृतका हेमलता बीते तीन दिन से लगातार खैर कोतवाली आ रही थी। महिला का आरोप था कि खैर पुलिस चंद्रभान से सांठगांठ कर मकान खाली कराने पर तुली हुई है। मंगलवार को वह अपने पुत्र गौरव के साथ खैर कोतवाली आई थी। इंस्पेक्टर खैर के कार्यालय में चंद्रभान, महिला व उसका पुत्र गौरव, एसआई रणवीर सिंह आपस में बातचीत कर रहे थे।
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महिला ने खैर पुलिस पर चंद्रभान का पक्ष लेने पर नाराजगी व्यक्त की तथा पुलिस को कोसते हुए वापस जाने लगी। कोतवाली परिसर में महिला के द्वारा चीखने चिल्लाने पर एसआई व महिला दरोगा समझाने गए तो उसने कहा कि अगर न्याय नहीं मिला तो वह जहर खा लेगी अन्यथा आग लगाकर अपनी जान दे देगी।
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इसके बाद उसने पेट्रोल डाल लिया। देखते ही देखते महिला लपटों में घिर गई। किसी तरह पुलिसवालों ने आग बुझाई और अस्पताल में भर्ती कराया। खैर सीएचसी से अलीगढ़ रेफर होने के बाद खैर पुलिस ने महिला के पुत्र गौरव को बिठा लिया।
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आक्रोशित महिला पक्ष के लोगों ने हंगामा किया। मामले की गंभीरता को समझते हुए पुलिस ने महिला के पुत्र गौरव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। मृतका के भाई बृजमोहन ने बताया कि अगर खैर पुलिस ने मदद की होती तो आज उसकी बहन की मौत न होती।
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एसएसपी के सामने पुलिस पर लगे आरोप...बोले परिजन, पैसे मांगते थे दरोगा
हेमलता द्वारा कोतवाली में आग लगाए जाने के बाद एसएसपी संजीव सुमन कोतवाली पहुंचे तथा महिला के मायके पक्ष के लोगों से बात की। मायके पक्ष ने आरोप लगाया कि हल्के के दरोगा मदद के नाम पर रुपये मांग रहे थे। शिकायत के बाद भी गांव दरकन नगलिया में जाकर बहन की मदद न कर चंद्रभान का पक्ष ले रहे थे।
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मृतका को कई बार फटकारा गया था। मृतका के भाई चंद्रमोहन ने खैर पुलिस पर रुपये लेकर चंद्रभान का पक्ष लेने तथा बहन की मदद न करने का आरोप लगाया जिस पर एसएसपी ने दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
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इस तरह घिर रही पुलिस
महिला ने विपक्षियों पर मारपीट और गेहूं चोरी का आरोप लगाया...पुलिस ने दर्ज नहीं किया
महिला द्वारा 11 जून को दर्ज कराए गए मुकदमे का भी अल्पीकरण किया गया
पुलिस महिला को थाने बुलाती रही लेकिन कोई समाधान न हो सका