फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तस्वीरें: बिटिया के गांव जाने वाले रास्तों पर सख्त पहरा, परिवार 'नजरबंद', लोगों को पुलिस ने कई बार खदेड़ा

Fri, 02 Oct 2020 08:24 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
विज्ञापन
1 of 5
Hathras Gang Rape Case - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में बिटिया के गांव जाने वाले सभी रास्तों पर गुरुवार को पहले दिनों की अपेक्षा और ज्यादा कड़ा पहरा रहा। बिटिया का परिवार जहां पूरे दिन पुलिस फोर्स की निगरानी में नजरबंद रहा तो गांव के लोग भी बमुश्किल गांव से बाहर जा सके। यहां तक कि मीडिया को भी गांव में अंदर नहीं घुसने दिया गया। 
 
विज्ञापन

2 of 5
बल प्रयोग करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात रही। गांव जाने वाले रास्ते पर मौजूद लोगों को पुलिस ने कई बार खदेड़ा। निषेधाज्ञा का हवाला देकर भीड़ को भी एकत्रित नहीं होने दिया गया। शासन के आदेश पर बिटिया की मौत के प्रकरण में एसआईटी ने जांच शुरू कर दी है। एसआईटी ने बिटिया के गांव के कई चक्कर लगाए। पुलिस-प्रशासन ने वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। 
 
विज्ञापन

3 of 5
सपाइयों को गांव में नहीं घुसने दिया - फोटो : अमर उजाला
गांव से पहले ही काफी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। आने वाले दिनों के मुकाबले सुरक्षा और ज्यादा सख्त रही। बिटिया के परिजन एक तरह से घर में नजरबंद रहे और सुरक्षा कर्मियों के साये में रहे। एसआईटी ने इनसे कई घंटे पूछताछ की। 
 

4 of 5
पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं में टकराव - फोटो : अमर उजाला
पूरे गांव में भी चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात रही। यही स्थिति गांव में जाने वाले सभी रास्तों पर रही। मीडिया को भी पुलिस ने गांव में घुसने नहीं दिया। मीडियाकर्मियों से तीखी नोकझोंक भी हुई। जब-जब भीड़ एकत्रित हुई तो पुलिस ने उसे लठियाकर खदेड़ दिया।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
Hathras Gang Rape Case - फोटो : अमर उजाला
निर्भया की अधिवक्ता सीमा भी नहीं जा सकीं बिटिया के गांव
दिल्ली के बहुचर्चित निर्भया कांड की अधिवक्ता सीमा कुशवाहा भी बृहस्पतिवार को चंदपा आईं। वह भी बिटिया के गांव जाना चाहती थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें भी नहीं जाने दिया और एसआईटी जांच का हवाला दिया। वह लौटकर थाने आ गईं। उनकी डीएम, एसपी से काफी देर तक बातचीत हुई। उन्होंने यह भी कहा कि वह पीड़ित परिवार से मिलना चाहती हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने उन्हें गांव नहीं जाने दिया।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें