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अलीगढ़: 10 मार्च से ही टूटने लगी थी तारिक की सांसें, बेटे का जनाजा उठते ही फूट-फूटकर रो पड़े पिता

Sat, 14 Mar 2020 03:43 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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तारिक (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
अलीगढ़ में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हुए उपद्रव के दौरान सांप्रदायिक टकराव में गोली लगने से घायल मो. तारिक की शुक्रवार की रात 9:05 बजे मौत हो गई। उसका 20 दिन से जेएन मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा था। तारिक के परिचित बताते हैं कि जब वह घायल हुआ था तो उसका हौसला देखकर किसी ने नहीं सोचा था कि एक गोली उसकी जान ले लेगी। 
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तारिक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाते परिजन - फोटो : अमर उजाला
उपद्रव के दौरान जख्मी तारिक को उसके दो भाई बाइक पर बीच में बैठाकर अस्पताल ले जा रहे थे। जब वे ऊपरकोट कोतवाली के सामने से गुजरे तो वहां मौजूद एसएसपी सहित जिले भर के पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें रोका और उसे पुलिस वाहन से अस्पताल पहुंचाने के निर्देश दिए।
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तारिक की मौत के बाद का माहौल - फोटो : अमर उजाला
तारिक 23 फरवरी से ही अस्पताल में भर्ती था। डॉक्टर बताते हैं कि तारिक की सांसें 10 मार्च से ही टूटने लगी थीं। हर लम्हा उसकी जिंदगी पर भारी पड़ रहा था। 10 मार्च को हालत नाजुक होने पर उसे वेंटीलेटर पर लाया गया था, जहां उसकी सांसें कमजोर होने लगी थीं। अलबत्ता, पिता मुनव्वर खान अपने परिजनों, रिश्तेदारों को बेटे की तबीयत में सुधार होने का दिलासा देते रहे। 

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तारिक (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
मगर, बेटे की सांसें थमने और आंखें बंद होने के बाद वो टूट गए। इसके बावजूद तारिक के पिता ने शहर में अमन-चैन बनाए रखने की अपील की। मौत के बाद जब पिता मुनव्वर खान ने बेटे को कंधा दिया तो वह फूट-फूटकर रोने लगे। उनके परिवार में यह दूसरी सबसे बड़ी घटना है। दो साल पहले मुनव्वर के बेटे आमिर अपनी मां व पत्नी के साथ बाइक से डिबाई (बुलंदशहर) जा रहे थे, इस दौरान दो लोगों की मौत हो गई थी। अब बेटा तारिक भी दुनिया छोड़ गया।
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तारिक की मौत के बाद का अलीगढ़ का माहौल - फोटो : अमर उजाला
मुनव्वर खान ने अपने बेटे तारिक को आखिरी बार शुक्रवार सुबह को देखा था। बकौल मुनव्वर, ‘उसकी सांसें चल रही थीं। मगर दोपहर बाद अपने बेटे को नहीं देखा था, क्योंकि बेटे के स्वास्थ्य संबंधी दूसरे कामों में व्यस्त हो गया था’।
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