बढ़ते प्रदूषण ने यमुना का पानी बेहद खराब कर दिया है। कालिंदी का पानी नहाने और मछली पालन तो दूर की बात, सिंचाई के लायक भी नहीं है। शहर में प्रवेश करने के दौरान कैलाश घाट पर मानक से 6 गुना ज्यादा प्रदूषण है तो वहीं ताजमहल के डाउन स्ट्रीम तक पहुंचते-पहुंचते यमुना में 32 गुना ज्यादा प्रदूषण पाया गया है।
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यमुना (फाइल फोटो)
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा यमुना नदी में जल गुणवत्ता की 2018 की सालाना रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है। अगस्त में बाढ़ के दौरान भी पानी की गुणवत्ता मानकों से खराब ही रही है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा, यमुना, हिंडन, सरयू समेत प्रदेश की सभी नदियों की जल गुणवत्ता की रिपोर्ट जारी की है। यमुना नदी की जल गुणवत्ता आगरा में ताजमहल और मथुरा में शाहपुर में सबसे ज्यादा खराब है।
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यमुना (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
कैलाशघाट में प्रवेश के समय नदी की जो स्थिति है, वह ताजमहल तक जाते जाते और खराब हो जाती है। अकेले टोटल कॉलीफार्म में ही देखें तो यह 5 गुना तक ज्यादा बदतर हो जाती है। अगस्त और सितंबर में ही केवल दो माह पानी की गुणवत्ता में कुछ सुधार पाया गया है, लेकिन यह भी मानक के मुताबिक नहीं है। नहाने, सिंचाई लायक तो यह तब भी नहीं होती।
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उफान पर बह रही यमुना (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
बोर्ड ने नोएडा से प्रयागराज तक 20 जगह सैंपलिंग की है। इनमें नोएडा में ओखला बैराज, तिलावड़ा गांव, वृंदावन में अपस्ट्रीम, केसी घाट, डाउन स्ट्रीम, मथुरा में अपस्ट्रीम, शाहपुर, विश्राम घाट, डाउनस्ट्रीम, आगरा में कैलाश घाट, वाटरवर्क्स और ताजमहल तथा फिरोजाबाद में अपस्ट्रीम, डाउनस्ट्रीम, इटावा में भी अपस्ट्रीम, डाउनस्ट्रीम, प्रयागराज में चार जगह वाटर इनटेक, बलुआ घाट, छाछर नाला, इमरजेंसी आउटफॉल में सैंपल लिए गए।
ओखला बैराज से लेकर प्रयागराज में संगम तक यमुना नदी की हालत सबसे ज्यादा ताजमहल के पीछे और मथुरा में शाहपुर में खराब है, जबकि पूरी दुनिया में यही दो जगह ऐसी है, जहां सबसे ज्यादा विदेशी और देशी पर्यटक नदी के किनारे पहुंचते हैं। हालत ये है कि यहां नदी जल के नाम पर सीवर ही बह रहा है। इटावा में चंबल नदी के मिलने के बाद यमुना जल की गुणवत्ता में सुधार नजर आता है।टोटल कॉलीफार्म की संख्या 50 एमपीएन प्रति 100 मिली. होनी चाहिए, जबकि घुलनशील आक्सीजन (डीओ) 6 मिग्रा. से ज्यादा तथा बायो केमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) 2 मिग्रा से कम होनी चाहिए।
नहाने का पानी
टोटल कॉलीफार्म की संख्या 500 एमपीएन, घुलनशील आक्सीजन (डीओ) की मात्रा 5 मिग्रा से ज्यादा और बीओडी 3 मिग्रा से कम होनी चाहिए
ट्रीटमेंट के बाद पीने का पानी
टोटल कॉलीफार्म 5000 एमपीएन से कम, डीओ 4 मिग्री से ज्यादा और बीओडी 3 मिग्रा से कम होनी चाहिए
मछली पालन, जंगली जानवरों के लिए
घुलनशील आक्सीजन (डीओ) की मात्रा 4 मिग्रा और अमोनिया फ्री 1.2 मिग्रा होनी चाहिए