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कालिंदी के कूल कराह रहे: जहां तैरनी थीं नाव, वहां दौड़ रहीं कारें

Tue, 24 May 2022 09:51 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

यमुना का हाल बेहाल है। पोइया घाट से लेकर यमुना किनारा तक नदी मैदान में तब्दील हो गई है। दिनभर यहां रेत के गुबार उड़ते देखे जा सकते हैं। 
 
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यमुना की तलहटी पर दौड़ती कार - फोटो : अमर उजाला
आगरा  की कालिंदी में जहां नाव तैरनी चाहिए वहां अब कारें दौड़ रहीं हैं। जो नदी कल-कल करते बहती थी, वो सूख गई है। पोइया घाट से यमुना किनारा तक यमुना की तलहटी पर रेत के गुबार उड़ रहे हैं। पानी वाला स्थान मैदान में तब्दील हो गया है। वहीं गोकुल बैराज से 1120 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है जबकि नदी की जलधारण क्षमता एक लाख क्यूसेक से अधिक है। लिहाजा नालों का गंदा पानी भी छोड़ दिया जा रहा है, जो यमुना भक्तों के लिए पीड़ादायक है। सदानीरा गंगा की बहन यमुना के दिन नहीं बहुरे। गंगाजल आने के बाद तो दुर्दशा और बढ़ गई। जिस नदी पर पूरे शहर की प्यास बुझाने का दारोमदार था, उसका अब वॉटर वर्क्स पर जलस्तर तक नहीं मापा जा रहा। जलकल मुख्यालय के अधिशासी अभियंता एसके श्रीवास्तव ने बताया कि जब से गंगाजल आया है, यमुना जल का प्रयोग नहीं होता। इस वजह से वॉटर वर्क्स पर जलस्तर नहीं मापा जा रहा। कैलाश मंदिर स्थित एक प्लांट से यमुना जल को शोधित कर सप्लाई किया जा रहा है। सोमवार को यहां यमुना का जलस्तर 153 मीटर था। आठ दिन पहले यह 153.8 मीटर था। 

 


 
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यमुना की तलहटी पर दौड़ती कार - फोटो : अमर उजाला

क्षमता से कम मिल रहा पानी 

सिंचाई विभाग के अनुसार गोकुल बैराज से यमुना में 900 क्यूसेक जल आवंटन के सापेक्ष 1120 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। ओखला बैराज से 350 क्यूसेक, 150 क्यूसेक हरनाल एस्केप से। इस तरह 1620 क्यूसेक पानी यमुना में आ रहा है। नदी के लिए यह ऊंट के मुंह में जीरा जैसा है क्योंकि यमुना की क्षमता एक लाख क्यूसेक से अधिक है। एक किनारे से दूसरे किनारे तक नदी 250 से 400 मीटर तक चौड़ी है। ये हाल तब है जब 2017 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने पर योगी आदित्यनाथ आगरा आगमन पर यमुना किनारा जाकर नदी का जायजा लिया था। पांच साल बाद भी हालात नहीं सुधर सके हैं।
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रबर डैम - फोटो : अमर उजाला।

जल्द बने रबर डैम 

रिवर कनेक्ट संयोजक ब्रज खंडेलवाल ने कहा कि पांच साल से रबर डैम का इंतजार है। 30 साल से बैराज नहीं बना। रबर डैम की अनुमति मिल गई है। जल्द से जल्द कार्य शुरू होना चाहिए। ताकि यमुना में पानी बना रहे।

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बालू और रेत से स्नान कर यमुना भक्तों ने प्रदर्शन किया।(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

रेत से करेंगे स्नान

मथुराधीश मंदिर के महंत जुगल श्रोतिया ने  कहा कि यमुना में आठ महीने पानी नहीं रहता। तलहटी से रेत उड़ने लगा है। बरसात के दिनों में जब बाढ़ आती हैं, तभी यमुना में पानी दिखता है। यमुना में पानी नहीं छोड़ा तो हम रेत से स्नान करेंगे।
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यमुना में गिरता नाले का गंदा पानी - फोटो : अमर उजाला

जीवनदायिनी है नदी

यमुना प्रेमी डॉ. हरेंद्र गुप्ता ने कहा कि यमुना जीवनदायिनी नदी है। गंगा मोक्षदायिनी है। यमुना के निर्मल स्वरूप के लिए आंखें तरस गईं। पांच साल से नियमित आरती कर रहे हैं, लेकिन शासन व प्रशासन नदी के संरक्षण के लिए गंभीर नहीं।  
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यमुना में जाता नाले का पानी - फोटो : अमर उजाला

तीन हजार करोड़ खर्च हो चुके, हालत बदतर

यमुना को दूषित होने से बचाने, अविरल जलधारा एवं अन्य कार्यों पर पिछले 20 साल में तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। फिर भी हालत बदतर होती जा रही है। जल निगम की एक अलग इकाई बनी है। जिसका काम ही यमुना प्रदूषण नियंत्रण करना है। एसटीपी, सीवर लाइन व अन्य कार्यों पर तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बाद यमुना में गंदगी बह रही है। नाले बंद होने के बाद भी यमुना को दूषित कर रहे हैं।
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पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के फेसबुक पेज से शेयर की गई तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
वहीं अमर उजाला में प्रकाशित यमुना की बदहाली पर इस खबर की तस्वीर समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के फेसबुक पेज से भी शेयर की गई है। वहीं ये तस्वीर ट्वीट भी  की है।

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