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विश्व वन्यजीव दिवस: चुरमुरा में हाथी, कीठम में भालुओं को मिली शरण, घड़ियालों के 'घर' में आबाद हैं काले हिरन, देखें तस्वीरें

Wed, 03 Mar 2021 11:35 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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काले हिरन - फोटो : अमर उजाला
लुप्त हो रहे वन्य व जलीय जीवों के लिए सुरक्षित ठिकाना बनी चंबल सेंक्चुरी में अब तेंदुओं का कुनबा बढ़ रहा है। पिछले एक साल में 24 तेंदुए अपने शावकों के साथ देखे जा चुके हैं। सिर्फ तेंदुए ही नहीं, यह काले और चितकबरे हिरनों से भी आबाद है। सेही, बिज्जू, लोमड़ी, सियार की तो यहां भरमार है। तीन मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस मनाया जाता है। चंबल का इलाका वन्य जीवों को रास आ रहा है। कुछ समय पहले तक  बबूल के कांटों के कारण तेंदुए दुर्लभ हो गए थे लेकिन पिछले एक साल में इनकी संख्या बढ़ी है। इसके साथ ही इनके हमले भी बढ़े हैं। इन्हें गांवों में आने से रोकने के लिए वन विभाग काम कर रहा है। बाह रेंज और भी वन्य जीवों से आबाद हैं। राजस्थान की सीमा पर हिरन और सांभर के झुंड पर्यटकों को रोमांचित कर देते हैं। वन विभाग के मुताबिक इनकी आबादी करीब 500 है।
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तेंदुआ - फोटो : अमर उजाला
वन विभाग के संरक्षण के प्रयास और चंबल के लोगों की जागरूकता से संकट ग्रस्त तेंदुए, हिरन, सांभर, कछुए, डॉल्फिन और घड़ियाल का कुनबा तेजी से बढ़ा है। चंबल को इको टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है।  -  आरके सिंह राठौड़, रेंजर,चंबल सेंक्च्युरी बाह
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भालू संरक्षण केंद्र में दावत का मजा लेता भालू - फोटो : वाइल्डलाइफ एसओएस
वन विभाग ने सूर सरोवर पक्षी विहार के जंगल में वाइल्ड लाइफ एसओएस के साथ आगरा भालू संरक्षण केंद्र बनाया, जिसमें अब 130 स्लॉथ भालू हैं। 11 साल पहले बनाए गए इस केंद्र में कौरई और देश के अन्य शहरों में कलंदरों से छुड़वाकर भालुओं को लाया गया। आगरा का पर्यावरण और जंगल हाथियों के मुताबिक नहीं है, लेकिन वाइल्ड लाइफ एसओएस ने चुरमुरा में हाथियों के लिए अस्पताल शुरू किया। अब यहां 23 हाथी हैं, जो महावतों से छुड़वाकर या सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद यहां इलाज के लिए लाए गए हैं।

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चंबल नदी में घड़ियाल - फोटो : अमर उजाला
चंबल में 37 साल में चार गुना हो पाए घड़ियाल
चंबल नदी का 165 किमी लंबा तट उत्तर प्रदेश में है, जहां 37 साल में घड़ियालों की संख्या चार गुना हो गई। चंबल का साफ पानी घड़ियालों के साथ मगरमच्छ और डॉल्फिनों को रास आया। वर्ष 1984 में घड़ियाल विलुप्त होने के कगार पर थे। तब उनकी संख्या महज 451 रह गई थी, लेकिन कुकरैल और देवरी में हैचिंग सेंटर के बाद इनकी संख्या अब 1910 हो  चुकी है। बीते साल 1701 घड़ियाल चंबल नदी में थे। इसी तरह मगरमच्छों की संख्या 576 से बढ़कर 598 और डॉल्फिन की संख्या 142 से बढ़कर 157 हो गई है। वर्ष 2007 के बाद कुकरैल में हैचिंग बंद कर दी गई। अब प्राकृतिक तरीके से घड़ियालों की संख्या बढ़ रही है।
 
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घड़ियाल की पीठ पर बैठै छोटे बच्चे - फोटो : अमर उजाला
चंबल, सूर सरोवर में बढ़ रहे वन्य जीव व पक्षी
चंबल नदी में अब प्राकृतिक तरीके से घड़ियालों, मगरमच्छ और डॉल्फिन की संख्या बढ़ रही है। यह बेहद उत्साहजनक है। न केवल चंबल, बल्कि सूर सरोवर पक्षी विहार और अन्य सेंक्चुरी में पक्षियों, जीवों की संख्या बढ़ रही है। -दिवाकर श्रीवास्तव, डीएफओ, नेशनल चंबल सेंक्चुरी प्रोजेक्ट
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