आगरा में संगमरमरी ताजमहल सहित मुगलकालीन इमारतें और बाग-बगीचों के अलावा और भी कुछ है, जिसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। जहां हजारों किमी दूर से आकर 'विदेशी मेहमान' अठखेलियां करते हैं। इस अनूठे प्राकृतिक स्थल का नाम है कीठम झील, जो सौंदर्य और साहित्य का अद्भुत संगम है। यहां चारों ओर हरियाली है, पक्षियों की चहचाहट और विशाल सरोवर है। इस झील को सूर सरोवर पक्षी विहार के नाम से भी जाना जाता है।
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सूर सरोवर पक्षी विहार आगरा
- फोटो : अमर उजाला
कीठम झील आगरा से करीब 22 किलोमीटर दूर रुनकता नाम के कस्बा के पास है। इस गांव को महान कवि सूरदास की जन्मस्थली माना जाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर दो पर आगरा से दिल्ली जाते समय सिकंदरा से आगे यह गांव है। इस हाईवे पर दाईं तरफ ठीक झील को जाने वाला प्रवेश द्वार आता है। झील में विदेशी प्रवासी पक्षी अठखेलियां करते अक्सर नजर आते हैं।
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सूर सरोवर में प्रवासी पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
कीठम झील के पास बना सूर सरोवर पक्षी अभ्यारण्य में स्थानीय व प्रवासी पक्षियों की 100 से ज्यादा प्रजातियां हैं। स्पूनबिल, साइबेरियन सारस, सरने सारस, ब्राहमनी बत्तख, बार-हेडेड गीसे और गडवॉल्स व शोवेलर्स यहां पाई जानी वाली पक्षियों की कुछ प्रमुख प्रजातियां है। उत्तर प्रदेश वन विभाग ने 27 मार्च 1991 को इस पूरे क्षेत्र को राष्ट्रीय पक्षी अभ्यारण्य का नाम दिया।
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कीठम झील
- फोटो : अमर उजाला
कीठम झील में बोटिंग का आनंद भी ले सकते हैं। फिलहाल यहां चल रहे जीर्णोद्धार के कार्य की वजह से बोटिंग बंद की हुई है। झील में बोटिंग करने के लिए पेडल बोट उपलब्ध होती है। बोटिंग के लिए भी टिकट बाहर के टिकट विंडो से लानी पड़ती है। यहां से थोड़ा और आगे चलने पर दाहिने तरफ एक छोटा पार्क और उसी में एक कैंटीन भी है।
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विदेशी और देसी पक्षियों की जुगलबंदी
- फोटो : अमर उजाला
कीठम झील के प्रवेश द्वार पर एक टिकट काउंटर भी है, जहां से झील क्षेत्र में प्रवेश शुल्क प्रति व्यक्ति रुपये 30/- अदा करके ही इस परिसर में प्रवेश किया जा सकता है। उसके अलावा कार और बाइक अंदर ले जाने शुल्क अलग से देना होता है। इस अभयारण्य तक कीठम रेलवे स्टेशन से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
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सूरकुटी में महाकवि सूरदास की प्रतिमा
- फोटो : अमर उजाला
कीठम झील से करीब आधा किमी दूर यमुना नदी के किनारे एक आश्रम है। इस जगह का नाम सूर कुटी है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग दो से करीब ढ़ाई किलीमीटर दूर है। यहां पर कवि सूरदास की याद में समर्पित एक विद्यालय है, जिसमें छात्रावास, एक सूर श्याम मंदिर, महाकवि सूरदास स्मारक और एक आश्रम है। यहां पर यमुना किनारे घूमने का भी अपना अलग आनंद है।
कीठम के भालू संरक्षण गृह में तरबूज का आनंद लेते भालू
- फोटो : अमर उजाला
झील के किनारे-किनारे कुछ दूर चलने के बाद भालू सरंक्षण गृह है। यहां पर काले भालुओं को एक बड़े से खुले वातावरण में एक बड़े से बाड़े में रखा गया है। बाड़े के चारो तरफ एक ऊंची दीवार और उसके ऊपर कंटीली विद्युत प्रवाह करती लोहे की तार लगी हुई है। यहां पर आने वाले पर्यटकों को वॉच टावर से इस केंद्र में रहने वाले भालुओं को दिखाया जाता है।