पिछले सप्ताह हुई बारिश के बाद आगरा में सांप निकलने के कई मामले सामने आए हैं। वाइल्डलाइफ एसओएस के इमरजेंसी हेल्पलाइन पर लगातार सांपों के निकलने की सूचनाएं मिल रही हैं। दरवाजे की चौखट में फंसा कोबरा, शौचालय में फ्लश टैंक के ऊपर बैठा चेकर्ड कीलबैक सांप, या फिर एक गिट्टी के प्लांट में दो रैट स्नेक, ये वाइल्डलाइफ एसओएस टीम द्वारा सोमवार और मंगलवार में किए गए रेस्क्यू हैं। मंगलवार की सुबह दयालबाग स्थित राधे ग्रीन्स कॉलोनी में रहने वाला एक परिवार घर में कोबरा मिलने के बाद दहशत में आ गया। अत्याधिक विषैला सांप दरवाजे की चौखट के बीच फंस गया था। इसकी सूचना मिलने पर वाइल्डलाइफ एसओएस की बचाव टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने सावधानीपूर्वक विषैले सांप को पकड़ा। इसके तुरंत बाद टीम आगरा के रामबाग में एक घर के अंदर पनाह ले रहे रैट स्नेक की मदद के लिए दौड़ी।
वाइल्डलाइफ एसओएस टीम के सदस्य ने पकड़ा कोबरा
- फोटो : अमर उजाला
एक अन्य घटना में ग्वालियर रोड स्थित सरस्वती विहार में शौचालय के फ्लश टैंक पर चेकर्ड कीलबैक सांप बैठा मिला। वाइल्डलाइफ एसओएस टीम ने सावधानी से सांप को पकड़ा और कपड़े के बैग में ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद जंगल में छोड़ दिया।
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वाइल्डलाइफ एसओएस टीम के सदस्य ने पकड़ा सांप
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वाइल्डलाइफ एसओएस टीम ने अर्तोनी स्थित परफेक्ट फुटवियर कंपनी के स्टाफ किचन से कोबरा और मथुरा के चुरमुरा में गिट्टी के प्लांट से दो रैट स्नेक को भी पकड़ा। सिकंदरा में ओ.पी चेन्स ग्रुप के एंथम से एक रैट स्नेक को भी रेस्क्यू किया।
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फ्लैश टैंक में फंसा काला सांप
- फोटो : अमर उजाला
वाइल्डलाइफ एसओएस के सीईओ और सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि हमारी जैसी संस्था अलग-अलग समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखने का काम करती है, और इसका अधिकांश हिस्सा सामुदायिक भागीदारी पर निर्भर है। सहायता के समय वाइल्डलाइफ एसओएस को कॉल करने के लिए हम लोगों के बहुत आभारी हैं, जिससे हम जानवर और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें।
वाइल्डलाइफ एसओएस टीम के सदस्य ने पकड़ा सांप
- फोटो : अमर उजाला
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एम.वी ने कहा, 'हमें प्राप्त होने वाली कॉल्स में से सबसे अधिक सांपों से जुड़ी होती हैं। ये बचाव अभियान अत्यधिक संवेदनशील होते हैं और कभी-कभी जोखिम भरे भी होते हैं, इसलिए सार्वजनिक सुरक्षा और वन्यजीवों की सुरक्षा के हित में इस तरह के संवेदनशील अभियान चलाने के लिए प्रशिक्षित बचाव दल की आवश्यकता होती है।'