अपनों और समाज से तिरस्कृत विधवा और निराश्रित माताओं से जब देश के महामहिम मिले तो उनकी बूढ़ी पथराई आंखें नम हो गईं। राष्ट्रपति ने माताओं को दुलारा, पुचकारा और पास बैठाकर उनकी पीढ़ा सुनी। देश के प्रथम नागरिक को अपने इतने करीब देखकर माताओं की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दोपहर लगभग 12:15 बजे कृष्णा कुटीर आश्रय सदन में जैसे ही राष्ट्रपति का आगमन हुआ, आश्रय सदन का वातावरण बदल ही गया। राष्ट्रपति ने पहले मंदिर में दर्शन किए। माताओं ने स्वागत गीत गाते हुए टीका लगाकर और आरती कर महामहिम का स्वागत सत्कार किया। राष्ट्रपति ने वृद्ध माताओं के राधे राधे का जवाब भी राधे-राधे कहकर दिया। अपनों और समाज से दूर वृंदावन की पावन धरा पर भक्ति और मोक्ष की कामना लिए जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंचीं माताओं के लिए यह पल एक स्वप्न जैसा रहा। माताओं ने महामहिम को अपने द्वारा बनाए उत्पाद अगरबत्ती, पोशाक, अचार व कंठी माला भेंट की तो राष्ट्रपति ने भी महिलाओं को साड़ी व हेल्थ किट प्रदान की।