दुनिया के सातवें अजूबे ताजमहल में बीते साल भारी बारिश से मुख्य गुंबद के रिसने पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। गुंबद पर पाड़ लगाकर कलश के नीचे लगे पत्थरों की मरम्मत की जाएगी, जहां से पानी रिसकर नीचे आया। 84 साल पहले 1941 में गुंबद के रिसने पर संरक्षण किया गया था। हालांकि ताज में मुख्य गुंबद के रिसाव का इतिहास 373 साल पुराना है। वर्ष 1652 में शहजादा औरंगजेब ने बादशाह शाहजहां को ताजमहल का गुंबद रिसने की पहली रिपोर्ट भेजी थी।
सितंबर, 2024 में भारी बारिश के कारण ताज के मुख्य गुंबद पर लगे कलश के पास से पानी का रिसाव हो गया था। एएसआई ने लिडार और थर्मल स्कैनिंग के जरिए पाया कि कलश के पास जोड़ और दरार से रिसाव हुआ है। ड्रोन से वह जगह देखी गई, जहां से पानी नीचे आया। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मुख्य गुंबद की मरम्मत और कलश के पास पहुंचने के लिए पाड़ लगाई है, जिसके बाद मरम्मत का काम शुरू किया गया है। इस पर 76 लाख रुपये खर्च होंगे।
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