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हाथी संरक्षण केंद्र में जर्मनी के राजदूत: उपचार के लिए आए हाथियों को देखकर भावुक हुए वाल्टर जे लिंडनर, 'रिफ्यूज टू राइड' कैंपेन को दिया समर्थन

Thu, 08 Jul 2021 05:16 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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हाथी संरक्षण केंद्र में पहुंचे जर्मनी के राजदूत नीली टीशर्ट में - फोटो : Wildlife SOS
भारत में जर्मनी के राजदूत वाल्टर जे. लिंडनर ने वन्यजीव संरक्षण के बारे में विस्तार से जानने के लिए मथुरा में वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा संचालित हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र का दौरा किया। सेंटर में आजीवन देखभाल और उपचार के लिए लाए हाथियों को देखा। उन्होंने एनजीओ के 'रिफ्यूज टू राइड' कैंपेन को भी अपना समर्थन दिया, जो भारत में हाथियों की दुर्दशा की ओर ध्यान आकर्षित करता है। वाल्टर जे. लिंडनर बुधवार को केंद्र पहुंचे। उन्होंने हाथियों को देखने में समय बिताया, जिन्हें अब सभी तरह के दुर्व्यवहार और क्रूरता से मुक्त जीवन जीने का दूसरा मौका मिला है। हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र में उन्होंने हाथियों के मैनेजमेंट के साथ-साथ वैज्ञानिक और मानवीय तकनीकों जैसे पॉजिटिव कंडीशनिंग और टारगेट ट्रेनिंग के बारे में भी सीखा। इसके बाद हाथियों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों और पशु चिकित्सकों की टीम के साथ एक सत्र भी हुआ, ताकि वे इन जानवरों के सेंटर में एक बेहतर, स्वस्थ भविष्य बनाने के उनके प्रयासों के बारे में जान सकें और भारत में हाथियों के संरक्षण में सामने आने वाले खतरों और चुनौतियों को समझ सकें। इन हाथियों का दिल दहला देने वाला अतीत सुन कर वह काफी निराश भी हुए।
 
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हाथी संरक्षण केंद्र में जर्मनी के राजदूत - फोटो : Wildlife SOS
वाइल्डलाइफ एसओएस और उत्तर प्रदेश वन विभाग द्वारा 2018 में स्थापित भारत के पहले और एकमात्र हाथी अस्पताल का भी दौरा किया। अस्पताल में, उन्होंने हाथियों में होने वाले गंभीर स्वास्थ्य मुद्दों को भी जाना और संस्था की पशु-चिकित्सकों की टीम द्वारा घायल, बीमार और वृद्ध हाथियों के इलाज के बारे में भी चर्चा की। बता दें कि जर्मन राजनयिक एक संगीतकार भी हैं, जिन्होंने पांच से अधिक रिकॉर्ड लांच किए हैं और पहले केन्या, सेशेल्स, वेनेजुएला, दक्षिण अफ्रीका में जर्मन राजदूत के रूप में काम कर चुके हैं।

 
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हाथियों की जानकारी लेते जर्मन राजदूत - फोटो : Wildlife SOS
वाल्टर जे. लिंडनर ने कहा, कि इन हाथियों को वाइल्डलाइफ एसओएस के कर्मचारियों द्वारा देखभाल और प्यार करते हुए देखना वास्तव में मेरे दिल को लुभा गया। मैं सभी को यहां आने और इन हाथियों को पुनः अपना जीवन शान से जीते देखने की सलाह दूंगा। इन हाथियों पर की जा रही क्रूरता को भारत और दुनिया भर में कहीं भी होने से हमें रोकने का प्रयास करना आवश्यक है। मुझे वाइल्डलाइफ एसओएस को अपना समर्थन देने में खुशी हो रही है।

 

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हाथियों के बारे में जानकारी प्राप्त करते जर्मन राजदूत - फोटो : Wildlife SOS
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, जर्मन राजदूत का हाथियों के संरक्षण के लिए अपना समर्थन देना वाइल्डलाइफ एसओएस के लिए सम्मान की बात है। वाइल्डलाइफ एसओएस में हमारा लक्ष्य हाथियों के संरक्षण के साथ-साथ लोगों में संरक्षण के प्रति शिक्षा बढ़ाना भी हैं। हम अपने प्रयासों के लिए निरंतर समर्थन की आशा करते हैं।
 
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हाथी संरक्षण केंद्र में हाथी - फोटो : अमर उजाला
वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एम.वी ने कहा कि वाइल्डलाइफ एसओएस में हम हाथियों को स्वतंत्रता, अच्छे स्वास्थ्य और एक बहतर जीवन देने की पूरी कोशिश करते हैं। पूरी दुनिया में भारत में एशियाई हाथियों की आबादी सबसे अधिक है और इनका संरक्षण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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