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पहलः एक ऐसा गांव जहां घुमंतू गोवंश के लिए ग्रामीणों ने बनाई गोशाला, चारे-पानी की है पूरी व्यवस्था

Sat, 21 Dec 2019 12:09 AM IST
Abhishek Saxena धर्मेंद्र यादव, अमर उजाला, आगरा
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किरावली में गोशाला में घुमंतू जानवरों को गुड़ खिलाते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
देहात में घुमंतू गोवंश किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गया है। किसान रातों को खेतों की पहरेदारी करते हैं, उन्हें भगाते हैं। स्कूलों में बंद करने और पेड़ों से बांधने की घटनाएं भी सामने आती रहती हैं। वहीं किरावली तहसील के गांव इकराम नगर के किसानों ने एक अच्छी पहल की है। उन्होंने पंचायतघर की जमीन पर घुमंतू गोवंश के लिए गोशाला ही बना दी। उनके लिए चारे और पानी की व्यवस्था पूरे गांव के लोग कर रहे हैं।
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गोशाला में बैठे ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
इकराम नगर के रिटायर्ड फौजी हरदयाल पहलवान ने बताया कि इलाके में मुख्यत: गेहूं, आलू, सरसों की खेती होती है। राजस्थान की दूरी भी ज्यादा नहीं है। यहां घुमंतू गोवंश रोजाना फसलों को नष्ट कर रहे थे। एक खेत से हांको तो दूसरे खेत में नुकसान पहुंचाते। ऐसे में इन घुमंतू पशुओं के साथ क्रूरता भी हो रही थी। इसे देखते हुए ग्रामीणों ने इकराम नगर में पंचायतघर की हरी भरी जमीन को कंटीले तारों की बाड़ से चारों तरफ से कवर किया। इसके बाद घुमंतू पशुओं को घेरकर इसमें बंद किया जाने लगा। यह काम लगभग एक माह से चल रहा था। अब इस करीब 200 बीघा जमीन में 150 से अधिक घुमंतू गोवंश पहुंचाए जा चुके हैं। 
 
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गोशाला में बंधे घुमंतू पशु - फोटो : अमर उजाला
इनमें सांड़, गाय और बछड़े सभी हैं। इन्हें हरा चारा और भूसा देने के लिए सभी ग्रामीणों ने चंदा किया। चंदा करने के बाद अब सभी सामूहिक रूप से इनकी देखभाल का जिम्मा उठाते हैं। इस गोशाला में पानी के लिए सबमर्सिबल पंप से तालाब व गड्ढों में पानी भरा जाता है। पशुओं के लिए लड़ामनी भी बनवा दी गई है। उदारमना लोग भी यहां आकर गायों को खानपान का सामान डाल जाते हैं। इस तरह घुमंतू पशुओं की समस्या का बहुत हद तक निदान कर लिया गया है। 

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घुमंतू पशु - फोटो : अमर उजाला
गोशाला की देखभाल के लिए दो कर्मचारियों को 10-10 हजार रुपये के वेतन पर रखा गया है। इनके रहने की व्यवस्था भी यहीं की गई है। गांव के प्रीतम सिंह चाहर, चौधरी बनै सिंह, विशंभर प्रधान, तेजा प्रधान, छीतर सिंह प्रधान, भूपेंद्र सिंह, दीपक, अमित, पप्पू प्रधान, सुरेंद्र भगत, लीलाधर मुखिया, पुरुषोत्तम सिंह नियमित देखभाल करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गोशाला चलाने में इतना खर्च नहीं आ रहा है जितना कि यह पशु फसलों को नुकसान पहुंचा रहे थे। ऐसे में अब आसपास के गांवों के लोग भी घुमंतू पशुओं को लेकर यहां आने लगे हैं। 
 
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गोशाला में घुमंतू पशुओं के लिए रखा चारा - फोटो : अमर उजाला
किसान नेता श्याम सिंह चाहर, सोमवीर यादव ने बताया कि जिले में सबसे ज्यादा परेशानी छोटे किसानों को उठानी पड़ रही है। उनकी चार-पांच बीघा फसल को जानवर नष्ट कर देते हैं। ऐसे में यह किसान बर्बाद हो जाते हैं। उनके पास इतने साधन नहीं हैं कि वह रखवाली के लिए इंतजाम कर सकें। यह समस्या विकराल हो चुकी है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
32 हजार गोवंश छुट्टा घूम रहे
सवाल:
कमिश्नर लगातार घुमंतू गोवंश को पकड़ने के निर्देश दे रहे हैं, लेकिन शहर से लेकर देहात तक यह विकराल समस्या बने हुए हैं?
जवाब: पशु गणना के मुताबिक, 32 हजार गोवंश लावारिस घूम रहे हैं। तकरीबन पांच हजार को विभाग की गोशालाओं में रखा गया है। ऐसे में इन पशुओं को रखने के लिए प्रबंधन का अभाव है। पकड़ भी लिए जाएं तो रखेंगे कहां?
सवाल: अगर ग्रामीण अपनी गोशालाएं खोलें तो क्या राहत मिल सकेगी?
जवाब: ऐसे में ग्रामीणों की गोशाला को विभाग चिकित्सा आदि की सुविधाएं दे सकता है। - डॉ. दौनेरिया, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी
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