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उपद्रव की कहानी बताते भर आईं सिपाही की आंखें, बोले- सामने थी मौत, हाजी कदीर बने 'फरिश्ता'

Sat, 28 Dec 2019 10:20 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
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हाजी कदीर के साथ सिपाही का परिवार - फोटो : अमर उजाला
फिरोजाबाद में पिछले शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद हुए उपद्रव में थाना उत्तर में तैनात सिपाही अजय उपद्रवियों के बीच फंस गए थे। बलवाइयों ने उन्हें बुरी तरह पीटकर घायल कर दिया था। इस बीच एक शख्स उनके लिए फरिश्ता बनकर आया। बृहस्पतिवार को इलाज के बाद घर में अजय ने पूरा घटनाक्रम बताया। पढिए पूरी रिपोर्ट...
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अजय कुमार पुत्र जयपाल सिंह - फोटो : अमर उजाला
भीड़ के बीच मौत मुझे सामने दिखाई दे रही थी, मुझे नहीं पता कि हाजी कदीर कहां से फरिश्ता बन कर आए। कई पत्थर लगने के बाद भी मुझे बचा कर अपने मैरिज होम ले गए। घर में पानी पिलाया, भीड़ से बचाने को वर्दी उतरवाई और पठानी सूट पहनाकर मुझे थाना रसूलपुर तक छोड़ा। मैं और मेरा परिवार तो हाजी कदीर का अहसान कभी चुका नहीं पाएंगे। मेरी बाइक उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दी, हाथ में फैक्चर है। मैं ऑपरेशन कराके आया हूं। यह बोलते- बोलते घायल सिपाही अजय की आंखें भर आईं।
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शुक्रवार को हुए उपद्रव की फोटो - फोटो : अमर उजाला
मथुरा जनपद के थाना फरह के भीमनगर निवासी अजय कुमार पुत्र जयपाल सिंह पिछले आठ साल से जनपद में तैनात हैं। उनके पिता भी पुलिस विभाग में उप निरीक्षक पद से रिटायर्ड हैं। पत्नी बेबी, बेटी अवनी, तीन बेटे स्वजल, यश एवं निखिल व मां हरदेवी के साथ पुलिस लाइन में आवंटित क्वाटर में रहते हैं। गुरुवार को रात की ड्यूटी की थी। 

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थाना उत्तर में तैनात कांस्टेबल अजय - फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद उपद्रव की खबर मिली तो तत्काल ड्यूटी पर पहुंचने का आदेश मिला। इस पर वर्दी पहनकर अपनी बाइक से चल गए। नैनी ग्लास चौराहे से आगे बढ़ते ही कुछ युवा तेजी से बाइक की ओर दौड़े। किसी ने पत्थर भी फेंका तो किसी ने डंडे मारे। बाइक छीन ली। वह गिड़गिड़ाते रहे पर किसी ने एक नहीं सुनी। तभी कोठी नवीगंज निवासी हाजी कदीर एक युवक के साथ बाइक लेकर पहुंचे। बकौल अजय उन्होंनें मुझे भीड़ बचाया खुद भी पत्थर खाए और मुझे अपने मैरिज होम तक ले गए। तब तक भीड़ ने बाइक को आग के हवाले कर दिया।
 
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थाने में सिपाही की वर्दी देने पहुंचे हाजी कदीर - फोटो : अमर उजाला
अजय कुमार बोले मेरे लिए तो हाजी कदीर भगवान से कम नहीं। मेरी तो जान इन्हीं की बजह से बच गई। यदि वह नहीं होते तो मेरी जान नहीं बचती। बुजुर्ग मां हरदेवी ने हाजी कदीर को शुक्रिया भी अदा करने के साथ मिठाई खिलाई। बच्चों ने पैर छू कर आशीर्वाद लिया। घायल सिपाही अजय की मां हरदेवी ने बताया कि पिता जय पाल सिंह पुलिस विभाग में उप निरीक्षक पद से रिटायर हुए हैं। वह छोटे बेटे सुंदर सिंह के साथ रहकर खेती करते हैं।
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