मैनपुरी में एकतरफा प्यार ने छात्रा की जान ले ली। सिरफिरे आशिक की गोली लगने से घायल दिव्यांशी ने 13वें दिन इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। आशिक दिव्यांशी की शादी तय होने से बौखला गया था।
मैनपुरी शहर के मोहल्ला चौथियाना स्थित रानी मंदिर के गर्भगृह में जलाभिषेक के दौरान 26 जुलाई को एकतरफा प्यार में सिरफिरे राहुल दिवाकर की तीन गोलियों का शिकार हुई बीएससी की छात्रा दिव्यांशी आखिरकार 13वें दिन जिंदगी की जंग हार गई। मेडिकल कॉलेज सैफई में बृहस्पतिवार रात 10:30 बजे अंतिम सांस ली। मौत से पीड़ित परिवार और पूरे मोहल्ले में मातम छा गया।
पुलिस राहुल दिवाकर के खिलाफ दर्ज मुकदमे में हत्या की धारा बढ़ाने में लग गई है। मोहल्ला चौथियाना स्थित रानी मंदिर में शिव परिवार स्थापित है। मंदिर से महज 50 मीटर दूर रहने वाली दिव्यांशी पुत्री सुशील कुमार 26 जुलाई की सुबह 8.30 बजे करीब पूजा करने गई थी।
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गोली लगने से घायल छात्रा का फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आंतों को चीरते हुए रीढ़ की हड्डी में फंस गई थी गोली
छात्रा गर्भगृह में जलाभिषेक कर रही थी। तभी वहां रानी मंदिर वाली गली निवासी राहुल दिवाकर पहुंच गया और उसने गर्भगृह का गेट बंद कर दिव्यांशी पर एक के बाद तीन गोलियां चला दी थीं। एक गोली सिर को रगड़ते हुए, दूसरी कंधे में और तीसरी पेट में लगी थी, जो कि आंतों को चीरते हुए रीढ़ की हड्डी में फंस गई थी।
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गोली लगने से घायल छात्रा, पुलिस की गोली लगने से आरोपी घायल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राहुल को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर चुकी है पुलिस
घटना वाले दिन ही करीब 11.30 बजे करहल रोड पर नगला जुला के पास नाकाबंदी में राहुल दिवाकर को पुलिस ने घेर लिया था। राहुल ने पुलिस पर फायरिंग कर दी थी। जवाबी फायरिंग में उसके पैर में गोली लगी थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
इसके बाद राहुल के भाई को भी वारदात में साजिशकर्ता बताते हुए जेल भेज दिया था। हालांकि दिव्यांशी के परिवार को अब भी आरोपी राहुल के पिता, जो कि हत्याकांड में निरुद्ध रहा है, उससे अपनी जान को खतरा है। उसके बारे में पुलिस को परिवार बता चुका है।
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इसी मंदिर में छात्रा को मारी गोली
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एकतरफा प्यार करता था, शादी होने की बात से बौखला गया था
राहुल दिवाकर, दिव्यांशी से एकतरफा प्यार करता था और दिव्यांशी के शादी तय होने की खबर सुनकर वह बौखला गया था। 26 जुलाई को खौफनाक वारदात को अंजाम देने के बाद राहुल ने दिव्यांशी को मरा हुआ समझकर वहां से भाग गया था।
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मंदिर में छात्रा को मारी गोली, जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दूसरे ऑपरेशन से पहले ही तोड़ दिया दम
घटना के बाद से दिव्यांशी मेडिकल कॉलेज सैफई में भर्ती थी। जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही थीं। डॉक्टरों ने एक ऑपरेशन के बाद उनकी आंतों में फंसी गोली निकालने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी।
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सिरफिरा हमलावर
- फोटो : अमर उजाला
आंत में छेद होने के कारण रिसाव शुरू हो गया था, जिससे उनकी हालत और गंभीर हो गई। डॉक्टरों द्वारा दूसरा ऑपरेशन करने की तैयारी थी। चिकित्सक सीनियर से सलाह मशविरा कर रहे थे। शनिवार को चिकित्सक ऑपरेशन करने वाले थे। मगर, इससे पहले ही दिव्यांशी ने दम तोड़ दिया।
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मंदिर के बाहर खड़ी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
मां हुई बदहवास, मोहल्ला मौत के गम में डूबा
सैफई मेडिकल कॉलेज में बृहस्पतिवार रात करीब 10:30 बजे दर्द भरी सिसकियों के साथ दिव्यांशी ने आखिरी सांस ली। वहां मौजूद मां पूनम राठौर बेटी की मौत की खबर सुनते ही बदहवास हो गईं। मौत की खबर जब मोहल्ला चौथियाना पहुंची तो लोग गमगीन हो गए। छात्रा की मौत की सूचना के बाद छात्रा के घर के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई।
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मंदिर का गर्भगृह
- फोटो : अमर उजाला
सीओ सिटी संतोष कुमार सिंह, इंस्पेक्टर कोतवाली फतेह बहादुर सिंह ने छात्रा के परिजन से बात की। शुक्रवार सुबह से ही सांत्वना देने के लिए लोग वहां पहुंचे। शाम को दिव्यांशी का शव घर पहुंचा तो चीख पुकार मच गई। गमगीन माहौल के बीच शव का अंतिम संस्कार किया गया। छात्रा की मौत से हर कोई गमगीन नजर आया।
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दिव्यांशी का भाई
- फोटो : अमर उजाला
पढ़ना चाहती थी दिव्यांशी
दिव्यांशी चार बहनों में तीसरे नंबर की थी, वह पढ़ने में बेहद होशियार थी। वह पढ़ लिख कर कुछ करना चाहती थी। पिता की बचपन में ही मौत हो चुकी थी। दिल्ली में रह रहे चाचा और विधवा मां ही सहारा थे। मां और चाचा दिव्यांशी को पढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे। मगर, पांच साल पहले छात्रा की जिंदगी में सनकी राहुल दिवाकर आया, वह छात्रा को परेशान करने लगा।
दो साल पहले फायरिंग की घटना को भी अंजाम दिया। मगर, इस घटना के बाद समझौता करा दिया गया। तब दिव्यांशी अपने चाचा के पास दिल्ली चली गई थी। मगर आगे बढ़ने और पढ़ने की चाह में वह घर वापस आई और प्राइवेट बीएससी की पढाई करने लगी। मगर, उसे क्या पता था कि इस बार राहुल उसकी जिंदगी ही छीन लेगा। उसकी मौत के साथ ही सारे सपने और पढ़ लिख कर कुछ बनने ख्वाहिश भी दम तोड़ गई।