प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जोड़ी पर महिलाओं, दलितों, गरीबों और किसानों के भरोसे ने ताजनगरी में करिश्मा दोहराया है। सामाजिक सुरक्षा, मुफ्त राशन, पीएम आवास, स्वनिधि आदि सामाजिक योजनाओं का दलितों की राजधानी के वोटरों पर असर देखने को मिला जो ऐतिहासिक चुनाव परिणाम में बदल गया। आगरा के इतिहास में यह पहला मौका है, जब जिले की सभी 9 विधानसभा सीटों पर कोई दल लगातार जीता हो। कांग्रेस ने आजादी के बाद के पहले चुनाव में सभी सीटें जीती थीं, लेकिन भाजपा ने लगातार दूसरी बार सभी सीटों पर किया है। 70 साल में पहली ऐसा करने वाली भाजपा पहली पार्टी है।
राजनीति शास्त्र के विशेषज्ञों के मुताबिक आगरा दलितों की राजधानी रही है, जहां 2007 और 2012 के चुनाव में 6 और सात विधायक बसपा के चुने गए, लेकिन 2014 के चुनाव के बाद बसपा कमजोर हुई तो वोटर भाजपा की ओर खिसक गए। खासतौर पर युवा और महिला वोटरों ने भाजपा की ओर उम्मीदों से देखा। उनकी ये उम्मीदें कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के दौरान शुरू हुए मुफ्त राशन, पीएम आवास, स्वनिधि योजना और सरकारी योजनाओं से पूरी हुई। सभी नौ सीटों पर जिस तरह से बसपा के मत प्रतिशत में कमी आई, उसमें सरकारी योजनाओं ने अहम भूमिका निभाई।