कोरोना संक्रमण में ठीक दो साल पहले 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और फिर अगले दिन 23 मार्च से लॉकडाउन शुरू हो गया था। इन दो वर्षों में लॉकडाउन ने ताजनगरी के चार लाख लोगों को रोजगार देने वाले जूता उद्योग और 3.50 लाख लोगों की रोजीरोटी चलाने वाले पर्यटन उद्योग की कमर तोड़कर रख दी। हर दिन कमाने, खाने वाले लोग दाने-दाने को मोहताज हो गए। अब दो साल बाद जूता उद्योग तो धीमे धीमे पटरी पर लौट आया है, लेकिन पर्यटन उद्योग अब भी सहमा है। हर बार कोरोना संक्रमण बढ़ने पर ताजमहल की बंदी पर्यटन को उड़ान नहीं भरने दे रही। आगरा-मुंबई की फ्लाइट बंद होने का भी असर पड़ा है।
ताजनगरी के 7.50 लाख लोगों का रोजगार जूता और पर्यटन उद्योग से जुड़ा हुआ है। लॉकडाउन की कड़वी यादों को 23 मार्च की तारीख ने कुरेद दिया। पांच हजार करोड़ रुपये का निर्यात करने वाले आगरा की फैक्टरियां बंद हो गई और ताजमहल पर ताला लग गया था। 188 दिन तक ताजमहल पर लॉकडाउन रहा। पूरा पर्यटन उद्योग ठप हो गया। शहर के 650 से ज्यादा होटल, 600 से ज्यादा रेस्टोरेंट, 35 हजार लोगों का हैंडीक्राफ्ट, एंपोरियम सब बंद हो गए थे।
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ताजमहल के टर्न स्टाइल गेट पर खड़ीं महिला कर्मचारी (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
17 मार्च 2020 को ताजमहल के दरवाजे पर्यटकों के लिए बंद हो गए जो 21 सितंबर को जाकर खुले। इसके बाद सैलानियों की संख्या ढाई हजार तक सीमित कर दी गई जो बाद में बढ़ी पर फिर से बीते साल अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर आ गई। विदेशी उड़ानें बंद थी तो पूरा दारोमदार भारतीय पर्यटकों पर आ गया, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में फिर से ताज के दरवाजे बंद हो गए तो फैक्ट्ररियों में उत्पादन कम हो गया। 16 अप्रैल 2021 से 16 जून तक ताज के दरवाजे फिर बंद हुए तो पर्यटन उद्योग की रही सही उम्मीदें भी दम तोड़ गईं। लॉकडाउन के इन दो सालों में ताज पर्यटकों के लिए 248 दिनों तक बंद रहा।
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फुटवियर शॉप
- फोटो : अमर उजाला
अमेरिकी बाजार ने दिया जूता उद्योग को दम
देश की 65 फीसदी जरूरतें और निर्यात में 27 फीसदी की हिस्सेदारी लिए जूता उद्योग ने दो साल बाद रफ्तार पकड़ ली है। लॉकडाउन के बाद दो तिमाही तक जूता उद्योग बुरी तरह से पिछड़ गया। दुनिया भर के बाजारों से ऑर्डर न मिलने से जूता निर्यातक और इससे जुड़े चार लाख लोग परेशान रहे, पर नए बाजारों की तलाश और चीन के विकल्प के रूप में भारतीय निर्यातकों ने जगह जमाई, जिस वजह से लेदर उद्योग फिर से निर्यात के उसी आंकड़े को छूने के कगार पर है जो लॉकडाउन से पहले 2019 में था। तब आगरा से जूता निर्यात 3378 करोड़ रुपये का था जो इस साल 3600 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
80 लाख से 8 लाख रह गए पर्यटक
इन दो वर्षों ने पर्यटन की तस्वीर बिगाड़ दी। लॉकडाउन से पहले ताजमहल के दीदार के लिए 80 लाख भारतीय और 8 लाख से ज्यादा विदेशी पर्यटक आते थे, जिनसे सालाना 2500 करोड़ रुपये का कारोबार हो रहा था। लॉकडाउन के बाद पहले साल भारतीय पर्यटकों की संख्या 8 लाख भी नहीं रही। विदेशी पर्यटक 8 लाख से घटकर 30 हजार तक रह गए। पहले लॉकडाउन के बाद ताज में 21 सितंबर को केवल 2300 सैलानी आए, जबकि उससे पहले ताज पर हर दिन 25 हजार सैलानी पहुंचते थे।
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ताजमहल के पार्श्व में बहती यमुना
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नई उम्मीदें, नया सवेरा, यह साल बेहतर
जनवरी में कोरोना की तीसरी लहर के कारण ताज पर पर्यटकों की संख्या एकाएक गिरी, पर मार्च में पर्यटन उद्योग संभल गया। होली पर ताज महल के दीदार के लिए 35 हजार से ज्यादा सैलानी आए। दो साल पहले की तरह ताज पर रौनक दिखने लगी, पर उम्मीदें 27 मार्च से जुड़ी है, जब विदेशी उड़ानें शुरू हो जाएंगी। विदेशी पर्यटकों के आने पर ही एंपोरियम, पंच सितारा होटलों और ट्रेवल ट्रेड में रौनक लौट सकेगी।
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एंपोरियम में रखे संगमरमर के ताजमहल
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एंपोरियम विदेशी पर्यटकों पर निर्भर
आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर के अध्यक्ष प्रहलाद अग्रवाल ने कहा कि हमारी उम्मीदें 27 मार्च से शुरू हो रहीं विदेशी उड़ानों पर है, जब विदेशी पर्यटक ताजमहल देखने आएंगे, पर चिंता यूक्रेन रूस युद्ध से बढ़ रही है। एंपोरियम विदेशी पर्यटकों पर निर्भर हैं। विदेशी उड़ानें शुरू होने पर 2019 की स्थिति आने में समय लगेगा।
कारीगरों ने बदला रोजगार
फेडरेशन ऑफ ट्रेवल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव तिवारी ने कहा कि लॉकडाउन के बाद से पर्यटन उद्योग उबर नहीं पाया। भारतीय पर्यटकों ने खर्चे निकाल दिए, पर उद्योग तब पनपेगा, जब विदेशी पर्यटक आएंगे। हैंडीक्राफ्ट दो साल से ठप है। कारीगरों ने अपना रोजगार बदल लिया।
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान ने बताया कि लॉकडाउन ने कमर तोड़कर रख दी थी, लेकिन दिवाली के बाद भारतीय सैलानियों ने कुछ हद तक संभाला है। टैक्सी, गाइड, फोटोग्राफर, रेहड़ी पटरी वालों का काम शुरू हुआ है, पर पिछले साल की तरह स्थिति नहीं है।