लॉकडाउन पर्यावरण के लिए टॉनिक साबित हुआ। आबोहवा की बिगड़ी सेहत सुधर गई। स्मॉग से गैस चैंबर तक बन चुके आगरा में हवा इतनी साफ हुई कि महीने भर तक वायु गुणवत्ता सूचकांक ( एक्यूआई ) 100 के नीचे रहा। यमुना को भी प्रदूषण से मुक्ति मिली। हवा-पानी साफ हुए तो ताजमहल खिल उठा। अगली स्लाइड्स में देखिए लॉकडाउन के दौरान की तस्वीरें...
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 7
सिकंदरा स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
न स्मारक पर धूल कण जमे, न यमुना की गंदगी से आने वाले कीटों ने संगमरमर पर हमला किया। इस बीच ताजमहल का मडपैक हो जाने से सौन्दर्य पर निखार आ गया। सिर्फ ताज ही नहीं, एत्माद्दौला, सिकंदरा, सीकरी सहित सभी स्मारकों की चमक बढ़ गई। लॉकडाउन में निर्माण कार्य बंद रहने से हाईवे पर धूल का उड़ना बंद रहा। इससे स्मारकों में हरियाली चमक उठी। धूल पेड़-पौधों पर जम जाती थी।
विज्ञापन
3 of 7
चंबल नदी में घड़ियाल
- फोटो : अमर उजाला
जैव विविधता पर काम कर रहे पर्यावरविद डॉ. केपी सिंह ने बताया कि लॉकडाउन ने प्रकति के लिए बूस्टर का काम किया है। रंग-बिरंगी तितलियां घरों के आसपास के पेड़ पौधे पर मंडराते हुए बहुत दिनों बाद दिखीं। जिन गौरया, कौए, तोते और अन्य पक्षियों ने शहरों से दूरी बना ली थी, वे लौटने लगे। लॉकडाउन ने एक तरह से हमें यह बताया है कि प्रकृति हमसे क्या चाहती है, ध्वनि और वायु प्रदूषण हमसे प्रकृति के सुंदर नजारे छीन रहा है।
4 of 7
यमुनापार क्षेत्र में पहुंचा गंगाजल (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
आगरा के लोगों ने पहली बार देखा कि गंगाजल जैसा हरिद्वार में है, वैसा घर तक आया। वजह रही गंगा में फैक्टिरयों से रसायनों का न गिरना। आगरा में गंगाजल की पाइप लाइन बुलंदशहर से आ रही है। हवा और पानी साफ होने का फायदा सेहत को भी मिला।
विज्ञापन
5 of 7
जामा मस्जिद आगरा
- फोटो : अमर उजाला
एसएन मेडिकल कॉलेज में क्षय रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जीबी सिंह ने बताया कि धूल कणों से सांस रोगियों को परेशानी होती है। ये कम हुए हैं तो राहत है। हालांकि उनकी सलाह है कि कोरोना से बचने के लिए मरीज दवा लेना बंद न करें। उन्होंने बताया कि अगर लंबे समय तक धूल कण कम रहें तो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हैं।
विज्ञापन
6 of 7
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
हानिकारक कणों में कमी आई
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भुवन प्रकाश यादव ने बताया कि लॉकडाउन में कारखाने बंद रहे। इससे दो फायदे हुए। एक तो हवा में इनसे निकलने वाले हानिकारण कण नहीं पहुंचे। दूसरे यमुना में रसायन नहीं गिरे। इसी कारण हवा और पानी साफ हुए। दोनों की रीडिंग में सुधार आया।
इन दिनों ताज का सौंदर्य अनुपम
पुरातत्तव विशेषज्ञ डॉ आरके दीक्षित ने बताया कि ताजमहल को दो चीजें से बहुत नुकसान पहुंचता है। एक तो इस पर धूल कण जम जाते हैं। दूसरा यमुना की गंदगी में पलने वाले कीड़े हमला करते हैं। लॉकडाउन में ताज दोनों से बचा रहा। इस कारण इसका सौंदर्य अनुपम हो गया। यह वास्तव में ऐसा ही है, जैसा लॉकडाउन में नजर आ रहा है।