फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चंबल में कछुओं के लिए अच्छा रहा लॉकडाउन, लुप्त प्रजातियों का संरक्षण, बढ़ेगा कुनबा

Sun, 24 May 2020 12:42 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
1 of 5
चंबल में कछुआ - फोटो : अमर उजाला
विश्व कछुआ दिवस पर बाह से इटावा रेंज में कछुओं की हैचिंग के लिए निकले वन विभाग के अमले को लॉकडाउन में सभी नेस्ट सुरक्षित मिले हैं। एमपी के भिंड, मुरैना और राजस्थान के धौलपुर रेंज में भी ऐसा ही है। लोगों को आवागमन कम होने से कछुओं का कुनबा बढ़ने को लेकर महकमा उत्साहित है। 
 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
चंबल में कछुआ - फोटो : अमर उजाला
चंबल नदी में आईयूसीएन (इंटर नेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर) की रेड लिस्ट में शामिल कछुओं की आठ प्रजातियां साल, धोढ़, धमोका, पचेड़ा, कटहवा, सुंदरी, बटागुर, चित्रा इंडिका संरक्षित हो रही हैं। वन विभाग के अलावा टीएसए (टर्टल सर्वाइवल एलायंस) इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। मार्च में कछुओं ने चंबल नदी के किनारे अंडे दिए थे।  एक नेस्ट में 8 से 30 अंडे तक होते हैं। मई में हैचिंग पीरियड शुरू हो गया है। 
विज्ञापन

3 of 5
चंबल नदी में कछुआ - फोटो : अमर उजाला
लाकडाउन में चंबल किनारे मानव गतिविधि न होने की वजह से कछुओं के नेस्ट सुरक्षित मिले है। हैचिंग पीरियड शुरू हो गया है। लुप्त प्राय प्रजातियों के कछुओं की आबादी में वृद्धि की संभावना है। - आरके सिंह राठौर, रेंजर बाह
 

4 of 5
चंबल नदी में पहुंचे नन्हें कछुए (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
चंबल नदी में मौजूद सुंदरी कछुए की कीमत लाखों में होती है। इसके चारों पंजों में 20 नाखून होते है। इसका इस्तेमाल लोग तंत्र मंत्र में करते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
चंबल सेंचुरी चेक पोस्ट
चंबल में इटावा से वाया कानपुर, बिहार, बंगाल तक कछुओं की तस्करी होती रही है। लॉकडाउन के चलते वाहन बंद रहने और चंबल में आवाजाही पर रोक रहने की वजह से तस्करी भी नहीं हुई है। इस लिहाज से भी कछुओं के लिए लॉकडाउन अच्छा रहा।        
                    
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें