दन्नाहार थाना क्षेत्र के गांव हविलिया के पास पांच जुलाई को हुए सड़क हादसे में घायल हुए दो मासूमों ने इलाज के दौरान मेडिकल कॉलेज सैफई में दम तोड़ दिया। हादसा में घायल हुए माता-पिता का भी इलाज चल रहा है। मां की हालत गंभीर बनी हुई है। बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचे तो कोहराम मच गया।
यहां हुआ था दर्दनाक हादसा
थाना क्षेत्र के गांव त्रिलोकपुर निवासी 30 वर्षीय रोहित कुमार पांच जुलाई मंगलवार को घिरोर किसी काम से गए थे। उनके साथ 27 वर्षीय पत्नी प्रीती व आठ वर्षीय पुत्र अंशू व चार वर्षीय माहिर भी था। शाम करीब पांच बजे घिरोर से वापस गांव आते समय थाना क्षेत्र में गांव हविलिया के पास किसी वाहन की टक्कर लगने से बाइक सवार दंपती व बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सभी को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज सैफई में भर्ती कराया गया था।
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बच्चों की मौत की सूचना के बाद आए रिश्तेदार
- फोटो : अमर उजाला
रोहित का मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा है। बच्चों की मौत होने की जानकारी मिलने के बाद से पिता के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। मां प्रीती की हालत गंभीर होने की वजह से उन्हें दुखद सूचना परिजनों की ओर से नहीं दी गई है। दोनों कलेजे के टुकड़े मां से छिन चुके हैं, लेकिन वह इससे अंजान है। बच्चों की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। देर शाम इटावा में पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे गए। बच्चों के शव गांव त्रिलोकपुर पहुंचे तो चीख पुकार मच गई। गमगीन माहौल में बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया।
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अंशु और माहिर के फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
रोहित कुमार का हंसता खेलता परिवार था। मेहनत मजदूरी करके वह दोनों बच्चों का बेहतर तरीके से लालन पालन कर रहा था। उसे क्या पता था कि एक वक्त ऐसा भी आएगा कि उसके दोनों बेटे उसे हमेशा के लिए छोड़कर चले जाएंगे। परिजनों ने बताया कि अंशू और माहिर मां-बाप के लाड़ले थे। घर के सभी लोग मासूम बच्चों की एक मुस्कान पर जान छिड़कते थे। उनकी मासूम हरकतों से आसपास के लोग भी बच्चों से बेहद प्यार व अपनापन रखते थे।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
बीते मंगलवार को हुए हादसे ने रोहित और प्रीती की सारी खुशियां छीन लीं। रोहित को पता है कि उसके दोनों बच्चे अब इस दुनियां में नहीं हैं। उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं, लेकिन गंभीर रूप से घायल प्रीती को इस बारे में बताने की हिम्मत कोई भी नहीं जुटा पा रहा था। प्रीती को नहीं पता है कि उसके लाड़ले अब इस दुनियां में नहीं हैं। त्रिलोकपुर में इस हृदय विदारक घटना के बाद से सभी लोग बेहद दुखी हैं।
हादसे में घायल बच्चों का इलाज मेडिकल कॉलेज सैफई में चल रहा था। बुधवार की शाम करीब पांच बजे अंशू की तबियत खराब हुई। चिकित्सकों के तमाम प्रयास बेकार रहे और अंशू की मौत हो गई। अभी परिजन खुद को संभाल भी नहीं पाए थे कि बृहस्पतिवार की सुबह माहिर की तबियत खराब हुई और कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया।