आगरा के निर्भय नगर स्थित राजा जनक के आवास पर गुरुवार दोपहर को वेद मंत्रोउच्चारण के साथ भगवान सालिगराम और तुलसी जी का विवाह संपन्न हुआ। राजा जनक और उनकी पत्नी सहित निर्भय के सैकड़ों महिलाओं ने तुलसी जी का कन्यादान किया। राजा जनक बने कैलाश गुप्ता के घर का माहौल पूरी तरह से विवाह समारोह वाला था। इस दौरान भगवान श्रीराम और माता जानकी के जयघोष से वातावरण गुंजाएमान हो गया।
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रथ पर विराजमान श्रीराम के स्वरूप
- फोटो : अमर उजाला
दोपहर करीब दो बजे श्रीराम बरात भ्रमण के बाद सभी लोग एकत्रित हुए। इसके बाद पंडित उमेश चतुर्वेदी ने वेद मंत्रोउच्चारण के साथ विवाह समारोह की शुरुआत की। राजा जनक और उनकी पत्नी तुलसी जी को लेकर पंडाल में पहुंची। जहां विधि विधान से विवाह की शुरुआत की गई। करीब दो घंटे तक विवाह की एक एक कर रस्म पूरी की गई। निर्भय नगर के महिला पुरुषों ने तुलसी जी का कन्यादान किया।
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विधि-विधान से हुआ तुलसी सालिगराम का विवाह
- फोटो : अमर उजाला
निर्भय नगर के लोग खुद को न केवल भाग्यशाली मान रहे हैं, बल्कि पूर्व जन्म के संस्कार बता रहे हैं, जिसके चलते वह माता जानकी और भगवान श्रीराम विवाह के यादगार पलों के गवाह बने है। महिलाओं का कहना है कि अभी तक शहर के दूसरे स्थानों पर जाते थे, लेकिन पहली बार उनके यहां जनकपुरी महोत्सव को नजदीक से देखने का मौका मिला है।
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श्रीराम स्वरूप की आरती उतारतीं महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
जेपी नगर की कंचने कहा कि मुझे पहली बार तुलसा जी और सालिगराम जी का विवाह देखने को अवसर प्राप्त हुआ है। यह मेरे लिए अकल्पनीय क्षण है। निर्भय नगर की अंजली गुप्ता ने कहा कि रामबरात को कई बार देखा है, लेकिन पहली बार जानकी के घर कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिला है। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
निर्भय नगर की अनिविशा गुप्ता ने कहा कि जनकपुरी महोत्सव को देखकर मन को बहुत आनंद प्राप्त होता है। हम लोगों ने पुण्य का कार्य किया है, जो जनक महोत्सव में भागेदारी करने का मौका मिला है। सीमा गुप्ता ने कहा कि अभी तक टीवी पर ही रामायण में भगवान श्रीराम और जानकी के विवाह समारोह को देखते थे, कभी सोचा भी नहीं था कि हम लोग विवाह को इतने नजदीक से देख पाएंगे।