कासगंज में प्रभुपार्क के समीप हुए दर्दनाक हादसे ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। यहां एक निर्माणाधीन दुकान का लिंटर गिर गया। मलबे में दबकर दुकान मालिक कुलदीप कुमार बिड़ला (44) निवासी, मजदूर राकेश (20) और धीरज कश्यप (20) की मौत हो गई। सात मजदूर घायल हो गए। गली छिपट्टी निवासी कुलदीप बिड़ला अपनी दुकान का लिंटर डलवा रहे थे। शनिवार रात से काम चल रहा था। रविवार की सुबह लिंटर गिरते ही चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग मौके पर दौड़ पड़े। कुछ लोग लिंटर के ऊपर थे और कुछ नीचे। जेसीबी और हाईड्रा मशीन को मौके पर बुलाया गया। जिससे भवन की दीवारें तोड़ी गईं। इसके बाद मलबे में दबे लोगों को निकालकर अस्पताल भेजा गया। इनमें तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। मृतक धीरज की शादी एक साल पहले हुई थी। उसकी मौत की खबर सुनते ही पत्नी रो-रोकर बेसुध हो गई। अन्य परिजनों के भी आंसू नहीं थम रहे।
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कासगंज हादसा: घटनास्थल पर डीएम और एसपी
- फोटो : अमर उजाला
हादसे के बाद डीएम सीपी सिंह, एसपी मनोज कुमार सोनकर, एएसपी आदित्य वर्मा, एसडीएम ललित कुमार, सीओ आरके तिवारी, तहसील अजय कुमार ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य कराया। हादसे में घायलों में राजकुमार, विजय, अजय, धरमपाल, धर्मेंद्र , हरी सिंह और सुरेंद्र शामिल हैं। इनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
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कासगंज हादसा: घायल को ले जाते लोग
- फोटो : अमर उजाला
अस्पताल में भर्ती घायल किसरौली निवासी विजय ने बताया कि जब लिंटर का मसाला खत्म हो गया तो सभी मजदूर मसाला बनाने में जुट गए। कुछ मजदूर नीचे थे कुछ लिंटर के ऊपर काम कर रहे थे। इसी बीच गार्डर खिसके और भरभराकर लिंटर गिर गया। जब तक कुछ समझ पाते मजदूर मलबे में दब गए। हम सरियों के बीच फंस गए। गनीमत थी कि मलबा इधर-उधर हट गया और स्वयं तो कोशिश की है और अन्य लोगों की मदद से मलबे से बाहर निकल पाए।
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कासगंज हादसा: जेसीबी से हटाया गया मलबा
- फोटो : अमर उजाला
घायल मजदूर अजय और धर्मेंद्र ने बताया कि रात में लिंटर डालने का काम शुरू कर दिया था। जो सुबह तक पूरा नहीं हो पाया। सुबह मसाला बनाने में जुटे हुए थे। उस समय समझ ही नहीं पाए कि कब गार्डर खिसके और तेजी के साथ लिंटर का मलबा नीचे आ गया। बचाव के लिए चीखे और चिल्लाए। मलबे से लगी चोटों का दर्द था वहीं मौत के मुंह से बाहर निकलने की छटपटाहट भी थी। अस्पताल में भर्ती घायल में तीन मजदूर ऐसे हैं जिनके सीने और पसलियों में काफी गंभीर चोटें हैं।
कासगंज हादसा: मृतक धीरज की मां और पत्नी के नहीं थम रहे आंसू
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हादसे में मरने वाले धीरज की शादी एक साल पहले हुई थी। उसकी मौत की खबर सुनते ही पत्नी उमा देवी सुध-बुध खो बैठी। धीरज के पिता राधेश्याम बीमार हैं। वह सांस रोगी है। बेटे की मौत के बाद वह टूट गए हैं। मां मीरा देवी दोनों पैरों से दिव्यांग हैं। धीरज का एक भाई रवि है, उसकी भी शादी हो चुकी है। एक बहन है। उसकी अभी शादी नहीं हुई है।