एक्यूआई कम दर्ज करने के लिए सेंसर पर पानी की बौछार का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद एक और रिपोर्ट ने प्रदूषण के आंकड़ों पर सवाल खड़ा किया है। ताजमहल पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नवंबर माह के आंकड़े जारी किए गए हैं। इनमें और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों में दो से तीन गुने का अंतर है, जबकि स्मार्ट सिटी के सेंसरों में दर्ज एक्यूआई भी दोनों विभागों से अलग हैं। तीनों विभागों की जांच रिपोर्ट अलग अलग है।
पूरे उत्तर भारत में दिवाली के बाद सांसों का संकट बना रहा, लेकिन आगरा में कागजों पर हवा की गुणवत्ता शानदार दिखाई गई। अमर उजाला ने नगर निगम की छत पर लगे प्रदूषण जांच के उपकरणों पर की जा रही पानी की बौछार का खुलासा किया तो अब ताजमहल के प्रदूषण जांच के आंकड़ों ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ऑटोमेटिक स्टेशनों की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठा दिए हैं। बृहस्पतिवार को केंद्रीय बोर्ड के आंकड़े जारी हुए। अमर उजाला ने 10 से 19 नवंबर तक दस दिनों की हवा की गुणवत्ता के आंकड़ों को एकत्र किया, जिसमें केंद्रीय बोर्ड के आंकड़ों में 7 दिन हवा खराब पाई गई, जबकि यूपी बोर्ड के आंकड़ों में सिर्फ दो दिन। स्मार्ट सिटी ने पूरे 10 दिन खतरनाक स्थिति बताई।
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