‘जुबां खामोश, दिल गुमसुम और ये आंख नम क्यों है, जो अपने ही न हो सके, उन्हें खोने का गम क्यों है’ हाथों में मेहंदी लगाए बैठी मोहिनी की हालत को बयां करने के लिए ये पंक्तियां काफी हैं। जिस घर में बरात आने का इंतजार था, वहां दूल्हे की मौत का संदेश आया, तो कोहराम मच गया। सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं।
टेढ़ी बगिया में सोमवार को बनी सिंह के जिस घर में हल्दी-मेहंदी की रस्में होने के बाद खुशियां बिखरी हुई थीं, वहां मंगलवार को सन्नाटा पसरा हुआ था। हाथों में मेहंदी को बार-बार देख रही मोहिनी सदमे में आ गई है। पिता ने कर्ज लेकर मोहिनी के हाथ पीले करने की उम्मीद भी धुंधली हो गई हैं। शादी की सजावट भी नहीं हटी है। घर में खाने-पीने का सामान ज्यों का त्यों रखा है।
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