बांकेबिहारी की प्राकट्य स्थली निधिवन
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स्वामी हरिदास ने कहा था कि सब समाज को बुलाओ। सब समाज वहां जुट गया तो हरिदास ने स्वर लहरियों को छेड़ते हुए गाया- माई री सहज जोरी प्रगट भई जु रंग की गौर श्याम घन दामिनी जैसे...। इसके बाद प्रकाश का पुंज धीरे-धीरे बढ़ता गया और उस प्रकाश पुंज के मध्य परस्पर हाथों में हाथ लिए मुस्कुराते हुए स्यामा-कुंजबिहारी प्रकट हुए। हरिदास की प्रार्थना पर यह युगल जोड़ी एकाकार हो गई। आज श्रद्धालु जिन बांकेबिहारी के दर्शन करते हैं, वह प्रिया-प्रीतम का ही युगल स्वरूप है।