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यहां प्रकट हुई थी ठाकुर बांकेबिहारी की मूर्ति, 19 दिसंबर को मनाया जाएगा 515वां प्राकट्योत्सव

Fri, 18 Dec 2020 12:36 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
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निधिवन - फोटो : अमर उजाला
वृंदावन में जन जन के आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी लाल 515 वर्ष के होने जा रहे हैं। ठाकुर बांकेबिहारी का प्राकट्य उत्सव अगहन सुदी पंचमी (विहार पंचमी) यानि 19 दिसंबर को मनाया जाएगा। 515वें प्राकट्य उत्सव पर झूमने के लिए कान्हा की नगरी तैयार है। बांकेबिहारी की प्राकट्य स्थली निधिवन में भव्य सजावट की जा रही है। यहीं ठाकुरजी की मूर्ति प्रकट हुई थी। अगली स्लाइड्स में जानिए कैसे हुआ श्रीबांकेबिहारी का प्राकट्य...
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बांकेबिहारी मंदिर, वृंदावन - फोटो : अमर उजाला
वृंदावन स्थित श्रीबांकेबिहारी का मंदिर विश्व प्रसिद्ध है। मंदिर के विशाल चौक में ऊंचे जगमोहन के पीछे निर्मित गर्भग्रह में भव्य सिंहासन पर ठाकुर बांकेबिहारी विराजते हैं। संगीत शिरोमणि हरिदास के अनुरोध पर बांकेबिहारी की मूर्ति प्रकट हुई थी। श्रीबांकेबिहारी के प्राकट्य को लेकर कहा जाता है कि हरिदास के शिष्य विट्ठल विपुलदेव एवं बिहारिन दास ने एक बार उनसे पूछा था कि जिस निकुंज के सामने आप संगीत साधना करते हैं और उसका क्या रहस्य है? 
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बांकेबिहारी की प्राकट्य स्थली निधिवन - फोटो : अमर उजाला
स्वामी हरिदास ने कहा था कि सब समाज को बुलाओ। सब समाज वहां जुट गया तो हरिदास ने स्वर लहरियों को छेड़ते हुए गाया- माई री सहज जोरी प्रगट भई जु रंग की गौर श्याम घन दामिनी जैसे...। इसके बाद प्रकाश का पुंज धीरे-धीरे बढ़ता गया और उस प्रकाश पुंज के मध्य परस्पर हाथों में हाथ लिए मुस्कुराते हुए स्यामा-कुंजबिहारी प्रकट हुए। हरिदास की प्रार्थना पर यह युगल जोड़ी एकाकार हो गई। आज श्रद्धालु जिन बांकेबिहारी के दर्शन करते हैं, वह प्रिया-प्रीतम का ही युगल स्वरूप है।

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बांकेबिहारी मंदिर में भक्त (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के प्रकाशन अधिकारी गोपाल शरण शर्मा ने बताया कि मथुरा के जिलाधिकारी रहे एफएस ग्राउस की पुस्तक मथुरा-ए-डिस्ट्रिक्ट में बांकेबिहारी मंदिर का वर्णन किया है। वह लिखते हैं कि उक्त मंदिर का निर्माण 70 हजार रुपये की लागत से हुआ है। शिल्प की दृष्टि से यह एक सुंदर मंदिर है।
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बांकेबिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
निधिवन के सेवायत भीख चंद्र गोस्वामी ने बताया कि अगहन सुदी पांचें को विहार पंचमी अर्थात ठाकुर श्रीबिहारीजी महाराज का प्राकट्योत्सव मनाया जाता है। ठाकुर बांकेबिहारी में और उनकी प्राकट्य स्थली श्री निधिवन को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। निधिवन में समाज गायन का आयोजन भी किया जाएगा।
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बांकेबिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
श्रीबांकेबिहारी मंदिर के सेवायत गोपी स्वामी ने बताया कि ठाकुर बांकेबिहारी का प्राकट्य उत्सव अगहन सुदी पंचमी को इस बार 19 दिसंबर को मनाया जा रहा है। इस बार 515वां प्राकट्योत्सव है। इसकी तैयारियां भी गोस्वामीगण और मंदिर प्रबंधन द्वारा की जा रही हैं। 
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