शाहजहां ने 22 करोड़ रुपये की लागत से मोहब्बत की इस निशानी को बनवाया था। इसे बनाने में 22000 मजदूर लगाए गए थे, जिन्हें बाद में इसी स्मारक के आसपास क्षेत्र में बसाया गया था, जिसे हम ताजगंज के नाम से जानते हैं। इसे बनाने में मजदूरों को 22 साल लग गए थे, आखिर ताजगंज इसी 22 के तिलिस्म नहीं तोड़ पाया और सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में ही स्मारक के 500 मीटर की परिधि में व्यावसायिक गतिविधियों को बंद करने के निर्देश दिए।
अपनी आंखों से ब्रिटिश शासनकाल, आजादी को देखने वाले रियाजुद्दीन को अब अपनी उम्र तक याद नहीं है। अपनी बूढ़ी आंखों से ताजगंज के हर रंग को देखने वाले रियाजुद्दीन बताते हैं कि ताजमहल के निर्माण के बाद इसमें लगे मजदूरों को शाहजहां ने यहां पर बसाया था, जिसे लेबर कॉलोनी कहा जाता था। वह बताते हैं कि हमारे वंशज भी मजदूर थे, जिन्होंने ताजमहल के निर्माण में अपना योगदान दिया था। शाहजहां द्वारा बसाए जाने के बाद वे यहीं बस गए तब से आज तक हम यहीं रह रहे हैं। बताते हैं कि यह पूरा क्षेत्र शाहजहां ने ही आबाद किया था। बताया कि 22000 मजदूरों ने ताजमहल को बनाया था, जिन्हें यहीं बसाया गया, ताज की लागत में 22 करोड़ रुपये खर्च हुए थे और इसे बनाने में 22 साल लगे थे। आज 2022 में ही सुप्रीम कोर्ट हम लोगों को यहां से विस्थापित कर रही है।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
पहले राजा-महाराजा बसाते थे, अब सरकारें उजाड़ती हैं
उन्होंने कहा कि पहले राजा-महाराजा, सल्तनतें लोगों को बसाती थीं, लेकिन अब सरकारें तो लोगों को उजाड़ रही हैं। शाहजहां ने जब ताजगंज क्षेत्र बसाया था तो उसके पीछे मंशा यही थी कि ताजमहल के दीदार के लिए आने वालों को किसी तरह की परेशानी न हो और इस क्षेत्र का अधिक से अधिक विकास हो सके।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
जैन मंदिर के ठीक सामने है गेट, सीधी दिखती थी कब्र
व्यापारी ताहिर बताते हैं कि शाहजहां ने ताजमहल के निर्माण से पहले मजदूरों को रहने के लिए मुमताजाबाद कॉलोनी बसाई थी। ताजमहल का मुख्य द्वार साउथ गेट है। यहां पर प्राचीन जैन मंदिर हैं, जहां से सीधा सामने ताजमहल का गेट पड़ता है। यही एकमात्र ऐसा स्थान है जहां से क ब्र सीधी दिखती थी। हम सातवीं पीढ़ी से हैं जो यहां कारोबार कर रहे हैं। उनके पूर्वज बहीउद्दीन ने ताजमहल बनाते समय मजदूरी की थी, जिन्हें शाहजहां ने यहां पर जमीन सौंपी थी। इसके बाद अमीरबाग, माशाल्लाह, रियाजुद्दीन, वलीउद्दीन और अब वह खुद यहां पर उसी जगह पर कारोबार कर रहे हैं, जो जगह शाहजहां ने उन्हें दी थी।
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ताजगंज थाना
- फोटो : अमर उजाला
व्यापारियों में रोष
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यहां के कारोबारियों में रोष है। उनका कहना है कि एक ओर सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वाराणसी, उज्जैन, मथुरा आदि जगह कॉरिडोर बना रही है, वहीं दूसरी ओर पहले आबाद ताजगंज क्षेत्र को बर्बाद करने पर आमादा है। पर्यटन की दृष्टि से भारत में ताजमहल सबसे ऊपर है, सरकार को इस संबंध में भी सोचना चाहिए।
ताजगंज में घरों में खुली हैं दुकानें
- फोटो : अमर उजाला
इन नंबरों पर दें जरा ध्यान
- 22000 मजदूरों को बसाया गया था ताजगंज क्षेत्र में
- 22 साल लगे थे ताजमहल को बनाने में
- 22 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुआ था ताज
- 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के दिए निर्देश